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चांदी ने तोड़ा सारे रिकॉर्ड: MCX पर 5% उछाल के साथ ₹3 लाख प्रति किलो के पार, आगे और तेजी के संकेत

चांदी में तेजी का अंदाजा इससे लगा सकते हैं कि इस साल अभी तक दाम करीब 28 फीसदी बढ़ चुके हैं

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पुनीत वाधवा   
Last Updated- January 19, 2026 | 11:24 PM IST

सोने-चांदी के दाम आसमान पर हैं। चांदी के भाव तो सोने से भी ज्यादा चमक रहे हैं। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) में दिन के कारोबार में आज चांदी करीब 5 फीसदी उछलकर 3,02,800 रुपये प्रति किलोग्राम के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई। चांदी में तेजी का अंदाजा इससे लगा सकते हैं कि इस साल अभी तक दाम करीब 28 फीसदी बढ़ चुके हैं। पिछले साल चांदी के भाव में अप्रत्याशित 216.7 फीसदी की तेजी आई थी और सभी परिसंप​त्तियों में इसका प्रदर्शन सबसे अच्छा रहा था।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में चांदी के दाम 4 फीसदी बढ़कर 93.5 डॉलर प्रति औंस के पार पहुंच गए।बीते एक साल में अंतरराष्ट्रीय बाजार में चांदी करीब 196 फीसदी महंगी हुई है। दाम में अप्रत्या​शित उछाल के बावजूद विश्लेषक आगे कीमतें और बढ़ने को लेकर उत्साहित हैं तथा निवेशकों को लंबी अवधि के नजरिये से गिरावट पर चांदी खरीदने की सलाह दे रहे हैं।

वै​श्विक कंस​ल्टिंग फर्म डी वेरे ग्रुप के मुख्य कार्या​धिकारी नाइजेल ग्रीन का मानना है कि चांदी का 90 डॉलर प्रति औंस के पार जाना बाजार मनोविज्ञान में एक निर्णायक बदलाव का संकेत है। डी वेरे ग्रुप के प्रबंधन के तहत 14 अरब डॉलर की संपत्ति (एयूएम) है। उन्होंने कहा कि निवेशक अमेरिका के केंद्रीय बैंक पर बढ़ते राजनीतिक दबाव, ब्याज दर में कटौती की उम्मीद, बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप के जवाबी शुल्क पर अमेरिका के शीर्ष अदालत के एक महत्त्वपूर्ण फैसले पर प्रतिक्रिया दे रहे हैं।

उनके अनुसार भू-राजनीति भी आग में घी डालने का काम कर रही है। ईरान से जुड़े बढ़ते तनाव से ऊर्जा बाजार को लेकर चिंता बढ़ गई है, जिससे सुरक्षित ठिकाना माने जाने वाली परिसंपत्तियों की मांग फिर से बढ़ रही है।

ग्रीन ने कहा, ‘चांदी में अभी भी तेजी की काफी गुंजाइश है। संरचनात्मक मांग, सीमित आपूर्ति और नीति अनिश्चितता से कीमतों में तेजी का संकेत मिलता है। हमारा अनुमान है कि इस साल के अंत तक चांदी 200 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच सकती है।’

इक्विनॉमिक्स रिसर्च के संस्थापक और शोध प्रमुख जी चोक्कालिंगम निवेशकों को गिरावट पर चांदी खरीदने और लंबी अवधि तक निवेश बनाए रखने का सुझाव दे रहे हैं। उन्हें उम्मीद है कि साल 2026 में चांदी के दाम बीच-बीच में घटेंगे जिससे खरीदारी का मौका मिल सकता है।

चोकालिंगम ने कहा, ‘चांदी में तेजी 2025 में शुरू हुई और तब से यह सरपट भाग रही है। छोटी से मध्यम अवधि में इसकी कीमतों में 10 से 20 फीसदी की गिरावट आ सकती है और खरीदारी का मौका मिल सकता है। ऐसी खबरें आई हैं कि भारतीय परिवार भी चांदी की कीमत में तेजी का फायदा उठा रहे हैं और मुझे उम्मीद है कि आने वाले महीनों में चांदी की बहुत अधिक पुनर्बिक्री हो सकती है जिससे कीमतें काबू में रह सकती हैं। उत्पादक चांदी का उत्पादन बढ़ा सकते हैं जिससे कीमतों में वृद्धि को रोकने में मदद मिलेगी। अगले छह महीनों में अस्थिरता के बीच कीमतों में और 10 फीसदी की वृद्धि हो सकती है।’

एचएसबीसी में बहुमूल्य धातुओं के प्रमुख विश्लेषक जेम्स स्टील के अनुसार सीएमई वायदा बाजार में आपूर्ति वाली चांदी की तंगी निकट अवधि की कमी को रेखांकित करता है। उनका मानना है कि इसका समाधान 2026 के अंत तक नहीं हो पाएगा। एचएसबीसी फॉरेक्स रिसर्च ने अनुमान लगाया है कि डॉलर में नरमी की संभावना से चांदी को बल मिल सकता है। हालांकि भविष्य में फेडरल रिजर्व द्वारा दर में कटौती, फेड की स्वतंत्रता और भू-राजनीतिक जोखिम कीमतों के लिए सहायक बनी हुई हैं।

उसने हाल ही में एक नोट में लिखा, ‘हम कीमतों को मौलिक रूप से अधिक मानते हैं लेकिन हमें उम्मीद है कि निकट अवधि की तंगी कम होने तक स्थितियां अस्थिर बनी रहेंगी, जिसमें चांदी के दाम में तेजी की संभावना है। कीमतों में तेजी के कारण औद्योगिक मांग घट रही है। मगर संस्थागत खरीद में तेजी को देखते हुए चांदी की सिल्ली (बड़े बार) की मांग बढ़ेगी। सिक्के और छोटी सिल्ली की मांग भी अच्छी रह सकती है। लेकिन कीमतों में ज्यादा तेजी से मांग ज्यादा नहीं होगी। आभूषणों की मांग विशेष रूप से कमजोर होगी। सिल्वर एक्सचेंज-ट्रेडेड फंड (ईटीएफ) की तरफ से भी मांग बढ़ सकती है।’

First Published : January 19, 2026 | 10:55 PM IST