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छत्तीसगढ़ के हर जिले में निवेश बढ़ा, रायपुर से परे औद्योगिक विकास का नया चेहरा: साय

मुख्यमंत्री ने कहा कि नवंबर 2024 से छत्तीसगढ़ में 7.83 लाख करोड़ रुपये की 219 निवेश प्रतिबद्धताओं को आकार दिया गया है और ये परियोजनाएं राज्य के 33 में से 26 जिलों में फैली हैं

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आर कृष्णा दास   
Last Updated- January 19, 2026 | 11:17 PM IST

छत्तीसगढ़ में तरक्की का केंद्र केवल राजधानी रायपुर या उसके आसपास के इलाके नहीं हैं, यह राज्य विकास की ऐसी कहानी गढ़ रहा है जिसमें हर जिले, हर क्षेत्र को शामिल करते हुए संतुलित आ​र्थिक वृद्धि हो रही है। इसके उलट देश के कई राज्य ऐसे हैं, जहां दशकों से राजधानी समेत मुख्य शहरों में तो निवेश होता दिखता है, लेकिन दूसरे जिलों को उपेक्षा का दंश झेलना पड़ता है। यह बात छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने बिज़नेस स्टैंडर्ड से बातचीत में कही।

मुख्यमंत्री ने कहा कि नवंबर 2024 से छत्तीसगढ़ में 7.83 लाख करोड़ रुपये की 219 निवेश प्रतिबद्धताओं को आकार दिया गया है और ये परियोजनाएं राज्य के 33 में से 26 जिलों में फैली हैं। विकास की यह व्यापक तस्वीर राज्य के संरचनात्मक बदलाव का आईना है, जहां औद्योगिक इकाइयां प्रशासनिक निकटता के बजाय भूमि की उपलब्धता, श्रम पूल और स्थानीय क्षमता के आधार पर आ रही हैं। इसका उदाहरण स्वयं निवेश परियोजनाएं हैं। लगभग 33 प्रतिशत निवेश परियोजनाएं रायपुर संभाग में केंद्रित हैं, जबकि 46 प्रतिशत बिलासपुर, दुर्ग और सरगुजा संभागों के लिए हैं। इसके अलावा 21 प्रतिशत बस्तर संभाग को भी मिली हैं, जिसे लंबे समय से मुख्यधारा के औद्योगीकरण से बाहर ही माना जाता रहा है। साय ने कहा, ‘यह राज्य के बहुत व्यापक भौगोलिक क्षेत्र में निवेशकों के बढ़ते विश्वास का प्रतीक है।’

मुख्यमंत्री के अनुसार, सबसे महत्त्वपूर्ण बात यह है कि निवेशक विरासत स्थलों के बजाय भूमि पार्सल, कच्चे माल से निकटता और स्थानीय श्रम बल की आसान उपलब्धता जैसे आर्थिक पहलुओं को ध्यान में रखकर जिलों का चयन कर रहे हैं। इस तरह शहरी केंद्रों की तुलना में दूसरे जिले भी निवेश के मामले में प्रतिस्पर्धा कर रहे हैं।

कई जिले कम लागत, आसानी से विस्तार की संभावनाएं और नए सिरे से स्थानीय पारिस्थितिक तंत्र को आकार देने के अवसरों के आधार पर कई उद्योगों को अपने यहां आक​र्षित कर रहे हैं। उदाहरण के लिए कृषि और वन उत्पाद आधारित क्षेत्रों, खाद्य प्रसंस्करण, वस्त्र, स्वास्थ्य सेवा और लॉजि​स्टिक्स से जुड़े उद्योगों के लिए कच्चे माल की उपलब्धता प्रमुख कारक होते हैं। इसी प्रकार विनिर्माण और ऊर्जा आधारित परियोजनाओं को जिला स्तर पर व्यापक रूप से भूमि उपलब्धता का लाभ मिलता है, जो बड़े शहर आसानी से प्रदान नहीं कर सकते। 

साय ने कहा कि विकास के मामले में अब तक उपे​क्षित माने जाने वाले जिले विविध क्षेत्रीय सुविधाओं के साथ प्रमुख उद्योग केंद्र बन रहे हैं। एआई डेटा सेंटर, सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी सेवाओं जैसी नए जमाने की जरूरत वाली निवेश परियोजनाएं अब बिजली, स्टील, सीमेंट, खाद्य प्रसंस्करण और स्वास्थ्य सेवा जैसे पारंपरिक क्षेत्रों के साथ-साथ आगे बढ़ रहे हैं। स्वास्थ्य सेवा से जुड़ी कंपनियां बस्तर आ रही हैं जबकि कृषि-समृद्ध जिलों में खाद्य-प्रसंस्करण इकाइयां खूब लग रही हैं। शहरी क्षेत्रों के बाहर विनिर्माण क्लस्टर विकसित हो रहे हैं। 

उन्होंने कहा कि विकेंद्रीकरण अब ठोस संपत्तियों में तब्दील हो रहा है। पहले से ही चालू 6,000 करोड़ रुपये से अधिक की 9 परियोजनाओं में से कई मुंगेली, बालोदाबाजार, राजनांदगांव, बेमेतरा, बिलासपुर और बालोद जैसे जिलों में स्थित हैं। इनमें 5,500 से अधिक लोगों को नौकरियां मिल रही हैं। इन क्षेत्रों में अब कारखाने, अस्पताल, खाद्य-प्रसंस्करण इकाइयां और सेवा-क्षेत्र से जुड़े उद्यम आ रहे हैं, जिनमें बड़ी संख्या में स्थानीय युवाओं को रोजगार मिलेगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि यही पैटर्न निर्माणाधीन या पूरी होने वाली परियोजनाओं में दिखाई दे रहा है। राज्य के 24 जिलों में कुल 109 परियोजनाओं के लिए भूमि चिह्नित करने के बाद आगे की कार्रवाई चल रही हैं। इनमें 2.10 लाख करोड़ का निवेश होगा और 87,000 से अधिक लोगों को रोजगार मिलेगा। 

उद्योगों को आक​र्षित करने का कौन सा नुस्खा काम कर रहा है, इस सवाल पर मुख्यमंत्री साय ने कहा, ‘इसका एक ही मंत्र है- उद्योगों की स्थापना के लिए प्रशासनिक प्रक्रिया की तेज गति।’ उन्होंने कहा कि तमाम मंजूरियों के लिए वन-क्लिक सिंगल विंडो सिस्टम, डिजिटल भूमि प्रबंधन और भूमि अभिलेखों के स्वचालित रूप से बदलाव जैसे प्रशासनिक सुधारों ने उनके काम को काफी आसान बना दिया है। चाहे कोई निवेशक रायपुर, बस्तर या सरगुजा का विकल्प चुने, प्रक्रियाएं समयबद्ध और पारदर्शी हैं। इससे उद्यमी बिना डरे, बिना हिचकिचाए अपनी पसंद के क्षेत्र में निवेश के लिए तैयार हो जाते हैं।

दिसंबर 2023 में मुख्यमंत्री के रूप में पदभार संभालने वाले साय कहते हैं कि औद्योगीकरण के लिए छत्तीसगढ़ का दृष्टिकोण देश की विकास यात्रा के लिए बड़ा सबक है। नतीजे देखने के बाद पूंजी वितरण के बजाय राज्यों को नीतियां ऐसी बनानी चाहिए, जो शुरुआत से ही निवेश को आक​र्षित करें। छत्तीसगढ़ में बस्तर से लेकर बिलासपुर, राजनांदगांव या रायपुर, हर जिले के लिए समान पूंजी प्रवाह सुनि​श्चित कर समावेशी औद्योगीकरण की तस्वीर गढ़ी जा रही है। यह केवल सु​र्खियां बटोरने वाला निवेश आंकड़ा नहीं है, यह नौकरियां पैदा करने, जरूरत वाले क्षेत्रों में बुनियादी ढांचा विकसित करने और जिलों में आत्मविश्वास जगाने के लिए है। 

छत्तीसगढ़ का वर्तमान निवेश परिदृश्य इस बात का गवाह है कि जब शासन मानकों के साथ-साथ आसान पहुंच को प्राथमिकता देता है, तो आर्थिक विकास न केवल तेज होता है, बल्कि अधिक न्यायसंगत भी होता है।

First Published : January 19, 2026 | 11:17 PM IST