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निजी इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने में केरल देश में अव्वल, चारपहिया सेगमेंट में भी बढ़त

पारंपरिक पेट्रोल-डीजल इंजन वाले वाहनों की तुलना में इलेक्ट्रिक वाहनों की पैठ भी केरल में बहुत अधिक है और वह 2025 में दिल्ली के बाद दूसरे स्थान पर रहा

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शाइन जेकब   
Last Updated- January 18, 2026 | 10:50 PM IST

केरल के मध्यमवर्गीय परिवारों ने 2025 में पहले से कहीं अधिक चार्जिंग बॉक्स लगाए। इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) की बिक्री वाले 10 राज्यों में से केरल का निजी चारपहिया वाहनों को अपनाने में सबसे ज्यादा हिस्सा है। केरल उन पहले राज्यों में से एक है जिसने बहुत पहले ही 2019 में इलेक्ट्रिक वाहन नीति लागू की।

केरल निजी इलेक्ट्रिक वाहन (दोपहिया और चारपहिया वाहनों सहित) को अपनाने के मामले में कर्नाटक के साथ शीर्ष पर है। पारंपरिक पेट्रोल-डीजल इंजन वाले वाहनों की तुलना में इलेक्ट्रिक वाहनों की पैठ भी केरल में बहुत अधिक है और वह 2025 में दिल्ली के बाद दूसरे स्थान पर रहा। 

एनवायरोकैटलिस्ट्स द्वारा साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार, सबसे अधिक इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) की बिक्री वाले शीर्ष राज्यों में ईवी की पैठ (ईवी व पेट्रोल-डीजल इंजन वाहन का अनुपात) में दिल्ली 13.91 प्रतिशत, केरल 12.08 प्रतिशत, कर्नाटक 10.64 प्रतिशत, उत्तर प्रदेश 9.89 प्रतिशत और मध्य प्रदेश 8.23 ​​प्रतिशत शामिल हैं।

महत्त्वपूर्ण बात यह है कि वर्तमान वृद्धि 2022 में मुश्किल से 5 प्रतिशत की पैठ से हुई है, जो नीतिगत उपायों और बेहतर बुनियादी ढांचे से प्रेरित है।

एनवायरोकैटलिस्ट्स के संस्थापक और प्रमुख विश्लेषक सुनील दहिया ने कहा, ‘केरल को एक विशेष बाजार बनाने वाला सबसे महत्त्वपूर्ण कारक यह है कि कुल इलेक्ट्रिक वाहन बाजार में निजी वाहनों की हिस्सेदारी 93.4 प्रतिशत है, जो दर्शाता है कि दोपहिया और चारपहिया वाहनों में इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाया जा रहा है।’

दहिया ने कहा, ‘हालांकि कर्नाटक जैसे अन्य राज्यों में निजी वाहनों में इलेक्ट्रिक वाहनों की हिस्सेदारी 93.4 प्रतिशत के समान है, लेकिन उनमें से लगभग 84 प्रतिशत दोपहिया जबकि 9 प्रतिशत चारपहिया वाहन हैं। दूसरी ओर, केरल में दोपहिया वाहनों की हिस्सेदारी 76 प्रतिशत और चारपहिया वाहनों की हिस्सेदारी 18 प्रतिशत है, जो दर्शाता है कि मध्यम वर्ग बड़े पैमाने पर इलेक्ट्रिक वाहनों को अपना रहे हैं।

राज्य में दोपहिया वाहनों की बिक्री में वृद्धि का नेतृत्व एथर एनर्जी, बजाज ऑटो और टीवीएस मोटर कर रही हैं, जिनकी बाजार हिस्सेदारी क्रमशः 29 प्रतिशत, 24 प्रतिशत और 19 प्रतिशत है। वर्ष 2025 में कुल 80,261 वाहन बेचे गए थे।

केरल के बाजार में ओला इलेक्ट्रिक 12 प्रतिशत और रिवर मोबिलिटी 6 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ अन्य प्रमुख कंपनियां हैं। वहीं दूसरी ओर, 2025 में बेचे गए 18,891 निजी चारपहिया वाहनों में से टाटा पैसेंजर इलेक्ट्रिक मोबिलिटी ने 53 प्रतिशत, जेएसडब्ल्यू एमजी मोटर ने 26 प्रतिशत और महिंद्रा इलेक्ट्रिक ऑटोमोबाइल ने 11 प्रतिशत बाजार हिस्सेदारी के साथ दबदबा बनाया। उच्च हिस्सेदारी के कारण हालांकि चंडीगढ़ और गोवा में कुल इलेक्ट्रिक वाहन बाजार में निजी वाहनों की हिस्सेदारी क्रमशः 61 प्रतिशत और 99 प्रतिशत है, लेकिन इन क्षेत्रों में बिक्री और पैठ काफी कम है और ये शीर्ष राज्यों में शामिल नहीं हैं।

उद्योग विशेषज्ञों के अनुसार, उच्च पैठ के कारण ग्राहकों के बीच उच्च जागरूकता है। इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर कंपनी बीएनसी मोटर्स के मुख्य कार्यपालक अधिकारी अनिरुद्ध रवि नारायणन ने कहा, ‘इसका मुख्य कारण जागरूकता है, क्योंकि राज्य में कई ब्रांड अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं। लोग इलेक्ट्रिक वाहनों और प्रीमियम उत्पादों को स्टेटस सिंबल के रूप में भी देखते हैं। इसके अलावा, चार्जिंग की सुविधा भी व्यापक रूप से उपलब्ध है।’ 

विशेषज्ञ केरल में बढ़ती रुचि के कारणों में अनिवासी भारतीय आबादी की उच्च हिस्सेदारी, उच्च प्रति व्यक्ति आय, सरकारी सहायता और नए ब्रांडों के प्रति झुकाव का भी उल्लेख करते हैं।

भारी उद्योग मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, राज्य में 1,389 चार्जिंग स्टेशन हैं, जिनमें 553 फास्ट चार्जर और 836 स्लो चार्जर शामिल हैं, जो निजी कंपनियों और केरल विद्युत बोर्ड द्वारा संचालित हैं।

First Published : January 18, 2026 | 10:50 PM IST