प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो
कर्मचारियों के प्रॉविडेंट फंड (EPF) से पैसे निकालना अब पहले से कहीं ज्यादा आसान हो गया है। हालांकि एक्सपर्ट्स सलाह देते हैं कि इसमें सावधानी बरतें। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) ने निकासी के नियमों को सरल बना दिया है, जिससे सदस्यों को ये समझना आसान हो गया है कि कब और कैसे अपना PF का पैसा निकाला जा सकता है।
पहले PF से पैसे निकालने के लिए 12 से ज्यादा अलग-अलग कैटेगरी थीं, और हर एक के लिए अलग-अलग सर्विस पीरियड (2 से 7 साल तक) की जरूरत पड़ती थी। इससे काम बहुत पेचीदा हो जाता था, खासकर तब जब किसी को जल्दी पैसों की जरूरत होती थी। अब EPFO ने इन सबको सिर्फ पांच बड़ी कैटेगरी में बांट दिया है, जिससे योग्यता के नियम आसान हो गए हैं और क्लेम में गलती होने की संभावना काफी कम हो गई है।
नए नियमों में सबसे बड़ा बदलाव ये है कि ज्यादातर निकासी के लिए अब सिर्फ एक साल की सर्विस काफी है। पहले अलग-अलग वजहों के लिए अलग-अलग वक्त लगता था, जिससे लोगों को कन्फ्यूजन होता था। अब ये 12 महीने का एक समान नियम आ गया है, जिससे प्लानिंग करना आसान हो गया है।
नए नियमों से अब PF फंड का बड़ा हिस्सा निकाला जा सकता है। निकासी में कर्मचारी और एम्प्लॉयर दोनों का योगदान, साथ में ब्याज भी शामिल हो जाता है। ज्यादातर मामलों में सदस्य अपना 75 फीसदी तक बैलेंस निकाल सकते हैं, जिससे छोटी-मोटी फाइनेंशियल जरूरतों के लिए ज्यादा सुविधा मिलती है।
EPFO ने साफ बता दिया है कि एक साल की सर्विस पूरी करने के बाद किन स्थितियों में सदस्य 100 फीसदी PF निकाल सकते हैं। ये स्थितियां हैं:
नए नियम अब ज्यादा आसान तो हैं, लेकिन EPFO ने रिटायरमेंट के लिए लंबे समय तक पैसे बचाने की सुरक्षा भी बरकरार रखी है। करीब 25 फीसदी PF बैलेंस को ऐसे सुरक्षित रखा गया है कि बार-बार निकासी न हो और खासकर कम आय वाले लोगों को कंपाउंडिंग का फायदा मिलता रहे।
नौकरी छूटने पर कर्मचारी तुरंत 75 फीसदी PF निकाल सकते हैं और अगर बेरोजगारी एक साल तक चलती रहे तो बाकी पैसा भी मिल जाता है। रिटायरमेंट (55 साल की उम्र पर), स्थायी विकलांगता, छंटनी, वॉलंटरी रिटायरमेंट या विदेश में हमेशा के लिए बसने पर पूरा बैलेंस निकाला जा सकता है। कर्मचारी पेंशन योजना (EPS) के तहत पेंशन पर कोई असर नहीं पड़ता, और 10 साल की पेंशनेबल सर्विस पूरी करने के बाद ही मासिक पेंशन मिलती है।