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भारतीय ऑटोमोबाइल और ऑटो-एंसिलरी सेक्टर के लिए Q3FY26 मजबूत रहने की उम्मीद है। त्योहारों के मौसम में बढ़ी मांग, कुछ वाहन श्रेणियों पर GST में तर्कसंगत बदलाव, ब्याज दरों में नरमी और ग्रामीण इलाकों में बेहतर माहौल ने सेक्टर को सहारा दिया है। ब्रोकरेज अनुमानों के मुताबिक, ऑटो OEM और एंसिलरी कंपनियों की आय में सालाना आधार पर 18-32 फीसदी और मुनाफे (PAT) में 15-35 फीसदी तक की बढ़त देखी जा सकती है। हालांकि, इनपुट लागत और डिस्काउंटिंग से मार्जिन पर हल्का दबाव बना रह सकता है।
सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (SIAM) के आंकड़ों के अनुसार, Q3FY26 में पैसेंजर व्हीकल (PV) बिक्री 12.7 लाख यूनिट पर पहुंच गई, जो सालाना आधार पर 20.6 फीसदी की बढ़त है और अब तक का सबसे मजबूत Q3 प्रदर्शन माना जा रहा है। निर्यात भी नए शिखर पर रहा, जहां PV एक्सपोर्ट 11.7 फीसदी बढ़कर 2.25 लाख यूनिट तक पहुंच गया।
दोपहिया वाहनों में भी जबरदस्त तेजी दिखी। Q3FY26 में 5.70 मिलियन यूनिट की बिक्री के साथ यह अब तक का सबसे ऊंचा Q3 स्तर रहा, जिसमें 16.9 फीसदी की सालाना वृद्धि दर्ज की गई।
कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज के अनुसार, ऑटो OEMs की कुल आय में 5 फीसदी की सालाना बढ़त संभव है, लेकिन टाटा मोटर्स को छोड़ दें तो यह वृद्धि करीब 25 फीसदी तक हो सकती है। PV और टू-व्हीलर सेगमेंट में बेहतर प्रोडक्ट मिक्स और अनुकूल फॉरेक्स से औसत बिक्री मूल्य में हल्का सुधार देखा गया है, हालांकि JLR के कम उत्पादन का असर आंशिक रूप से नतीजों पर पड़ सकता है।
ब्रोकरेज का मानना है कि (टाटा मोटर्स को छोड़कर) EBITDA मार्जिन में सालाना 90 बेसिस पॉइंट का सुधार हो सकता है। ऑपरेटिंग लेवरेज और बेहतर प्रोडक्ट मिक्स से EBITDA में Q3FY26 में करीब 33 फीसदी की वृद्धि का अनुमान है।
जगुआर लैंड रोवर (JLR) के लिए तिमाही कमजोर रह सकती है। अमेरिकी टैरिफ और साइबर हमले से जुड़े उत्पादन व्यवधानों के कारण इसकी आय में सालाना आधार पर करीब 41 फीसदी की गिरावट का अनुमान है। साथ ही, श्रम कानूनों में बदलाव से कर्मचारी लागत पर एकमुश्त असर पड़ सकता है।
डेवेन चोकसी रिसर्च का अनुमान है कि JLR चुनौतियों के चलते टाटा मोटर्स की PV आय में करीब 9 फीसदी की गिरावट आ सकती है। EBITDA में 5.4 फीसदी और PAT में 17.6 फीसदी की सालाना गिरावट संभव है। हालांकि, GST 2.0 और नई सिएरा लॉन्च के चलते वॉल्यूम में 6 फीसदी की बढ़त की उम्मीद जताई गई है।
मारुति सुजुकी इंडिया के लिए Q3FY26 मजबूत रह सकता है। कोटक के अनुसार, कंपनी की आय में 34 फीसदी और EBITDA में 38 फीसदी की सालाना बढ़त संभव है। बेहतर वॉल्यूम, ASP में सुधार, अनुकूल फॉरेक्स और बेहतर क्षमता उपयोग इसका प्रमुख कारण हैं।
दोपहिया सेगमेंट में बजाज ऑटो का EBITDA 24 फीसदी बढ़ने की उम्मीद है, जबकि हीरो मोटोकॉर्प के मार्जिन में 60 बेसिस पॉइंट का सुधार संभव है। TVS मोटर का EBITDA 47 फीसदी तक बढ़ सकता है, जिसे ऑपरेटिंग लेवरेज, बेहतर प्रोडक्ट मिक्स और PLI लाभ से समर्थन मिलेगा।
कमर्शियल व्हीकल सेगमेंट में ईicher मोटर्स का EBITDA सालाना 22 फीसदी बढ़ सकता है। अशोक लेलैंड का EBITDA तिमाही आधार पर 24 फीसदी और टाटा मोटर्स के घरेलू CV बिजनेस का EBITDA 44 फीसदी तक बढ़ने का अनुमान है।
वहीं, ट्रैक्टर सेगमेंट में FY26 में 16 फीसदी की तेज वृद्धि के बाद FY27 में ग्रोथ घटकर 2 फीसदी रह सकती है, जिसका कारण ऊंचा बेस और कुछ राज्यों की सब्सिडी का खत्म होना है।
नुवामा के मुताबिक, ऑटो एंसिलरी कंपनियों की आय में 13 फीसदी की सालाना वृद्धि संभव है। घरेलू मांग के चलते CEAT की बिक्री बढ़ सकती है और कम इनपुट लागत से मार्जिन में सुधार की उम्मीद है। वहीं, Uno Minda को सीटिंग, कास्टिंग, सेंसर, EV पार्ट्स और स्विच जैसे सेगमेंट्स से मजबूती मिलने की संभावना है।
ब्रोकरेज हाउस ऑटो सेक्टर को लेकर सकारात्मक बने हुए हैं। बेहतर अफोर्डेबिलिटी, नए प्रोडक्ट लॉन्च, आसान फाइनेंसिंग और सरकारी कर्मचारियों के लिए वेतन आयोग जैसे कारक आने वाले वर्षों में घरेलू मांग को सहारा दे सकते हैं। कुल मिलाकर, Q3FY26 ऑटो सेक्टर के लिए मजबूत प्रदर्शन की तस्वीर पेश करता है।