बाजार नियामक सेबी जल्द ही म्युचुअल फंडों के वर्गीकरण के ढांचे में बदलाव ला सकता है। इस तरह से साल 2017 में इन मानदंडों की शुरुआत के बाद 80 लाख करोड़ रुपये वाले एमएफ उद्योग के मानदंडों की पहली व्यापक समीक्षा होगी।
सेबी के कार्यकारी निदेशक मनोज कुमार ने एसोसिएशन ऑफ इन्वेस्टमेंट बैंकर्स ऑफ इंडिया (एआईबीआई) के सालाना सम्मेलन में कहा, हम म्युचुअल फंड उद्योग से सुझाव लेने की कोशिश कर रहे हैं और जल्द ही आपको वर्गीकरण के संबंध में हमारे द्वारा किए गए कार्यों के बारे में जानकारी मिलेगी। चूंकि हमने हाल ही में एक बड़ा सुधार लागू किया है, इसलिए हम इस स्तर पर उद्योग पर अधिक बोझ नहीं डालना चाहते। उन्होंने कहा कि यह ढांचा तैयार है और जल्द इसे लागू किया जाएगा।
पोर्टफोलियो ओवरलैप को लेकर चिंताओं के बीच, माइक्रो-कैप फंड के एनएफओ में हाल ही में किए गए हस्तक्षेप के बाद बाजार नियामक का वर्गीकरण पर फिर से ध्यान केंद्रित हुआ है। बाजार के जानकारों का मानना है कि आगामी ढांचा इस तरह के ओवरलैप से संबंधित मुद्दों को हल करने में मददगार साबित हो सकता है।
जुलाई 2025 में सेबी ने म्युचुअल फंड हाउसों द्वारा योजनाओं के डिजायन और पेशकश से संबंधित नियमों में बदलाव का प्रस्ताव करते हुए एक परामर्श पत्र जारी किया था। इस कदम का मकसद विभिन्न श्रेणियों में लगभग एक जैसी योजनाओं के प्रसार को रोकना था।
कुमार ने कहा, चुनौती यह है कि स्मॉल-कैप, मिड-कैप और लार्ज-कैप शेयरों को इस तरह से वर्गीकृत किया जाए, जो दीर्घकालिक रूप से व्यवहार्य बना रहे। कुछ लोगों ने माइक्रो-कैप श्रेणी शुरू करने का सुझाव दिया है, लेकिन आपने देखा होगा कि हाल ही में हमें ऐसे ही एक मामले में हस्तक्षेप करना पड़ा।