प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो
उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को दिल्ली दंगों की साजिश मामले में उमर खालिद और शरजील इमाम को जमानत देने से इनकार कर दिया। शीर्ष अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष के ठोस सबूत पेश किए गए हैं, जिनके तहत दोनों आरोपियों के खिलाफ गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम, 1967 (यूएपीए) के तहत प्रथम दृष्टया मामला बनता है। इसी मामले में आरोपी गुलफिशा फातिमा, मीरान हैदर, शिफा उर रहमान, मोहम्मद सलीम खान और शादाब अहमद को जमानत दे दी गई है। पीठ ने कहा कि अन्य अपीलकर्ताओं की तुलना में उमर खालिद और शरजील इमाम का मामला अलग है। दोनों को एक तराजू में नहीं तौला जा सकता।
न्यायमूर्ति अरविंद कुमार और न्यायमूर्ति एनवी अंजारिया के पीठ ने कहा कि खालिद और इमाम के मामले में यूएपीए की धारा 43डी(5) लागू होती है, जिसमें जमानत की शर्तें बहुत कड़ी होती हैं। अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष द्वारा पेश किए गए सबूतों से साबित होता है कि दंगों की साजिश में इन दोनों की मुख्य भूमिका थी।
हालांकि, अदालत ने यह स्पष्ट किया कि खालिद और इमाम सूबतों की जांच या आदेश की तारीख से एक वर्ष बाद, जो भी पहले हो, दोबारा जमानत याचिका दाखिल करने को स्वतंत्र होंगे। जिन आरोपियों को जमानत दी गई, उन पर बारह शर्तें लगाई गई हैं। अदालत ने कहा कि स्वतंत्रता का दुरुपयोग किए जाने पर जमानत रद्द कर दी जाएगी। पीठ ने निचली अदालत को कार्यवाही में तेजी लाने का भी निर्देश दिया।