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Small-Cap Funds: 2025 में कराया बड़ा नुकसान, क्या 2026 में लौटेगी तेजी? एक्सपर्ट्स ने बताई निवेश की सही स्ट्रैटेजी

स्मॉल-कैप फंड्स का रिटर्न साल 2025 में -5.5 फीसदी रहा। इससे पहले 2023 में इन फंड्स ने 43.4 फीसदी और 2024 में 26.3 फीसदी का मजबूत रिटर्न दिया था

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हिमाली पटेल   
Last Updated- January 07, 2026 | 4:05 PM IST

Small-Cap Funds Outlook 2026: स्मॉल-कैप फंड्स का रिटर्न साल 2025 में -5.5 फीसदी रहा। इससे पहले 2023 में इन फंड्स ने 43.4 फीसदी और 2024 में 26.3 फीसदी का मजबूत रिटर्न दिया था। दो साल की तेजी के बाद अब इनका प्रदर्शन कमजोर हुआ है। हालांकि, लंबी अवधि का नजरिया रखने वाले निवेशकों को इस स्तर पर हिम्मत नहीं हारना चाहिए।

मोतीलाल ओसवाल एएमसी के फंड मैनेजर अजय खंडेलवाल कहते हैं, “कमजोर प्रदर्शन के दौर में निवेश के अच्छे मौके बन सकते हैं। ऐसे ही समय में भारतीय शेयर बाजार में नए लीडर उभरते हैं, खासकर जब घरेलू आर्थिक मजबूती का साथ मिलता है।”

स्मॉल कैप फंड्स ने क्यों किया निराश?

साल 2024 में केंद्र सरकार और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने महंगाई पर काबू पाने और अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपये को स्थिर रखने के लिए कई फाइनैंशियल और मौद्रिक सख्ती के कदम उठाए। इन उपायों से लक्ष्य तो पूरे हुए, लेकिन इनका असर विकास पर कुछ समय बाद दिखाई दिया। 2025 के दौरान उपभोक्ता मांग कमजोर पड़ी और कंपनियों की इनकम ग्रोथ की रफ्तार धीमी हो गई। इस सुस्ती का सबसे ज्यादा असर स्मॉल-कैप शेयरों पर पड़ा।

हेलिओस इंडिया के मैनेजिंग डायरेक्टर और सीईओ दिनशॉ ईरानी कहते हैं, “जब वैल्यूएशन ऊंचे हों और कमाई घटने लगे, तो आय में आई गिरावट के अनुरूप शेयरों में करेक्शन होना स्वाभाविक है।”

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वाल्ट्रस्ट के चीफ इन्वेस्टमेंट ऑफिसर और फाउंडर अरिहंत बार्डिया के अनुसार, “कमाई उम्मीदों पर खरी नहीं उतरी, खासकर कैपिटल गुड्स, कंजप्शन से जुड़े और निर्यात पर निर्भर छोटी कंपनियों में।”

अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों ने भी इसमें भूमिका निभाई। आनंद राठी वेल्थ में म्युचुअल फंड हेज श्वेता रजनी कहती हैं, “वैश्विक अनिश्चितता, कैपिटल फ्लो में उतार-चढ़ाव और जोखिम से बचने के बढ़ते रुझान ने भी कमजोर प्रदर्शन में योगदान दिया।”

कमाई की रफ्तार में फिर तेजी आने की उम्मीद

स्मॉल-कैप शेयरों के लिए कमाई का नजरिया अब बेहतर होने लगा है। 2024 के अंत से सरकार और आरबीआई दोनों ने सख्ती के उपायों को वापस लेना शुरू किया, जिससे लिक्विडिटी बढ़ी और उधार लेने की लागत कम हुई। इससे मांग में सुधार और कमाई की रफ्तार में फिर से तेजी आने का समर्थन मिला है।

ईरानी कहते हैं, “यदि सितंबर 2025 तिमाही के NSE 500 की कमाई को मार्केट कैप के आधार पर देखें, तो स्मॉल-कैप कंपनियों ने सबसे तेज इनकम ग्रोथ दर्ज की है।” लो बेस का फायदा इस सेगमेंट को 2026 में ज्यादा ग्रोथ रेट देने में मदद कर सकता है।

बार्डिया के अनुसार, “ऑपरेटिंग लीवरेज के असर में आने, मार्जिन के स्थिर होने और घरेलू मांग के मजबूत बने रहने से व्यापक स्तर पर कमाई में सुधार हो सकता है। इंफ्रास्ट्रक्चर, मैन्युफैक्चरिंग, डिफेंस और रिन्यूएबल्स में चल रहा पूंजीगत व्यय चक्र (capital expenditure cycle) छोटी कंपनियों के लिए कई वर्षों के विकास अवसर पैदा कर रहा है।” मेक इन इंडिया पहल और ग्लोबल सप्लाई-चेन के डायवर्सिफिकेशन से मिलने वाले स्ट्रक्चरल सपोर्ट स्मॉल-कैप सेगमेंट के मीडियम टर्म आउटलुक को और मजबूत करते हैं।

रजनी कहती हैं, “पूरे साल के लिहाज से कमाई में इजाफा 10 से 12 फीसदी के दायरे में सामान्य होने की उम्मीद है।”

स्मॉल-कैप सेगमेंट के लिए कुछ अनुमान इससे भी ज्यादा हैं। ईरानी के अनुसार, “जहां NSE 500 की कमाई में 12–15 फीसदी वृद्धि की उम्मीद है, वहीं स्मॉल-कैप कंपनियों की कमाई 22–25 फीसदी की दर से बढ़ सकती है।”

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रजनी का कहना है, “आने वाले समय में रिटर्न का आधार वैल्यूएशन बढ़ने के बजाय कमाई का प्रदर्शन ज्यादा रहेगा।” इससे गिरावट का जोखिम कम होता है और अगले बाजार चक्र में ज्यादा स्थिर और टिकाऊ रिटर्न की संभावना बढ़ती है।

ईरानी कहते हैं, “अमेरिका के साथ संभावित टैरिफ समझौता और रुपये की स्थिरता निवेशकों के सेंटीमेंट को और बेहतर कर सकती है, जिससे विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) का निवेश बढ़ सकता है।”

हालांकि निकट अवधि में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है, लेकिन 2026 रिकवरी के दौर की शुरुआत हो सकता है। खंडेलवाल के अनुसार, “सिस्टमेटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) के जरिए घरेलू निवेश मजबूत स्ट्रक्चरल सहारा दे रहे हैं, जिससे तेज और लंबे समय तक गिरावट की संभावना कम होती है।”

वैल्यूएशन अब ज्यादा बेहतर

2025 में करेक्शन और कंसोलिडेशन के बाद वैल्यूएशन में नरमी आई है। स्मॉल-कैप सेगमेंट अब मिड-ट्वेंटीज़ के प्राइस-टू-अर्निंग (पी/ई) मल्टीपल पर ट्रेड कर रहा है। हालांकि यह अब भी लॉन्ग टर्म एवरेज से ऊपर है, लेकिन वैल्यूएशन अब उत्साहपूर्ण स्तर पर नहीं हैं और अनुमानित इनकम ग्रोथ के मुकाबले सही नजर आते हैं। यह ग्रोथ लार्ज और मिड-कैप कंपनियों से ज्यादा रहने की उम्मीद है।

बाहरी जोखिम का रखें ध्यान

स्मॉल-कैप सेगमेंट में कुछ संभावित जोखिम अब भी बने हुए हैं। बार्डिया के अनुसार, “मुख्य जोखिमों में वैश्विक आर्थिक सुस्ती, जिससे निर्यात और ऑर्डर इनफ्लो प्रभावित हो सकते हैं; वैश्विक हालात कमजोर होने पर निजी क्षेत्र के पूंजीगत व्यय (कैपेक्स) में देरी; और अचानक जोखिम से बचने की स्थिति (रिस्क-ऑफ) शामिल हैं, जिनका असर लिक्विडिटी की कमी के कारण स्मॉल-कैप शेयरों पर ज्यादा पड़ता है।”

ईरानी का कहना है कि जीएसटी सुधार के बाद मांग में आई तेजी कमजोर पड़ सकती है। हालांकि वे आगे कहते हैं कि इसकी संभावना कम है, क्योंकि उपभोग में सुधार हाल ही में शुरू हुआ है। बार्डिया के अनुसार, 2025 के निराशाजनक प्रदर्शन के बाद निवेशकों के सतर्क होने के कारण निकट अवधि में रिटेल निवेश और SIP इनफ्लो की रफ्तार कुछ धीमी पड़ सकती है।

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जोखिम सहने की क्षमता के अनुसार ही करें निवेश

स्मॉल-कैप फंडों में निवेश करते समय निवेशक को अपनी जोखिम उठाने की क्षमता और निवेश की अवधि को ध्यान में रखना चाहिए, क्योंकि इस सेगमेंट में उतार-चढ़ाव ज्यादा होता है। बार्डिया का सुझाव है कि मध्यम जोखिम लेने वाले और कम से कम तीन से पांच साल तक निवेश बनाए रखने को तैयार निवेशकों के लिए स्मॉल-कैप फंड्स में करीब 10–20 फीसदी का एलोकेशन बेहतर हो सकता है।

रजनी कहती हैं, “लार्ज-कैप, मिड-कैप और स्मॉल-कैप फंड्स में लगभग 55:25:20 का बैलेंस इक्विटी मिक्स स्थिरता और लिक्विडिटी बनाए रखने के साथ-साथ मिड और स्मॉल-कैप से विकास की संभावनाओं को भी पकड़ने में मदद करता है।”

एकमुश्त निवेश की बजाय सिस्टमैटिक तरीके से, यानी किस्तों में पैसा लगाना बेहतर रहता है।

इन गलतियों से बचें

स्मॉल-कैप में निवेश की सबसे बड़ी गलतियों में से एक है कम समय के नजरिये से निवेश करना और जल्दी मुनाफे की उम्मीद रखना। निवेशक अक्सर पिछले तेज प्रदर्शन को देखकर जरूरत से ज्यादा निवेश कर लेते हैं। रजनी कहती हैं, “तेजी के दौर में सिर्फ प्रदर्शन के पीछे भागने से हाई वैल्यूएशन पर एंट्री हो सकती है, जिससे बाजार में करेक्शन (गिरावट) आने पर नुकसान का जोखिम बढ़ जाता है।”

फंड का चयन भी उतना ही महत्वपूर्ण है। ईरानी उन फंड्स से सावधान रहने की सलाह देते हैं, जिनमें फंड मैनेजर केवल इनकम ग्रोथ पर ध्यान देते हैं, लेकिन मैनेजमेंट की क्वालिटी, कॉरपोरेट गवर्नेंस और साफ-सुथरी अकाउंटिंग को नजरअंदाज कर देते हैं।

First Published : January 7, 2026 | 3:52 PM IST