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US Immigration Policy: अमेरिका में राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप के सत्ता में लौटने के बाद इमिग्रेशन नीतियों में बड़े बदलाव किए गए हैं। इन बदलावों के चलते 15 लाख से ज्यादा प्रवासियों का अस्थायी कानूनी दर्जा (लीगल स्टेटस) या तो खत्म हो चुका है या जल्द खत्म होने वाला है। इसमें काम करने की अनुमति और निर्वासन से सुरक्षा भी शामिल है।
इमिग्रेशन नीति विशेषज्ञों का कहना है कि इतने कम समय में इतने बड़े पैमाने पर लीगल स्टेटस खत्म होना अमेरिका के हाल के इतिहास में पहले कभी नहीं देखा गया। विशेषज्ञों के मुताबिक, ट्रंप प्रशासन ने 10 लाख से ज्यादा लोगों के लिए टेम्पररी प्रोटेक्टेड स्टेटस (TPS) खत्म कर दिया है और करीब 5 लाख लोगों से मानवीय पैरोल सुरक्षा भी वापस ले ली है।
कानूनी दर्जा खत्म होने का सबसे बड़ा असर रोजगार पर पड़ेगा। बड़ी संख्या में लोग अब अमेरिका में कानूनी रूप से काम नहीं कर पाएंगे। इमिग्रेशन विशेषज्ञ जूलिया गेलाट ने कहा कि एक ही साल में 10 लाख से ज्यादा लोगों का वर्क परमिट खत्म होना न सिर्फ प्रवासियों, बल्कि नियोक्ताओं, परिवारों और पूरी अर्थव्यवस्था पर असर डालेगा। इन फैसलों के खिलाफ प्रवासी अधिकार समूहों और TPS धारकों ने कई मुकदमे दायर किए हैं। उनका कहना है कि ये फैसले कानून के खिलाफ हैं।
अल सल्वाडोर के टीपीएस धारक और नेशनल टीपीएस एलायंस के समन्वयक जोस पाल्मा ने कहा, “यह ट्रंप प्रशासन द्वारा प्रवासी समुदाय पर किए जा रहे हमलों की ही अगली कड़ी है, और खास तौर पर टीपीएस कार्यक्रम के खिलाफ है। यह एक ऐसा कार्यक्रम जो हम में से कई लोगों के लिए अच्छा रहा है, एक जीवन बचाने वाला कार्यक्रम रहा है।
टेम्पररी प्रोटेक्टेड स्टेटस (TPS) उन देशों के नागरिकों को दिया जाता है, जिन्हें युद्ध, हिंसा, प्राकृतिक आपदा या अन्य अस्थिर हालात के कारण असुरक्षित माना जाता है। कांग्रेस ने इस कार्यक्रम को 1990 में एक अस्थायी व्यवस्था के तौर पर शुरू किया था। टीपीएस की मंजूरी आमतौर पर 6 से 18 महीने के लिए होती है और इसे समय-समय पर रिन्यूवल करना पड़ता है। हर बार बेनेफिशियरी की पृष्ठभूमि जांच की जाती है, लेकिन यह स्टेटस नागरिकता के लिए रास्ता नहीं खेलता है। ।
राष्ट्रपति जो बाइडन के कार्यकाल में टीपीएस और मानवीय पैरोल दोनों का दायरा बढ़ा, जिस पर रिपब्लिकन नेताओं ने आलोचना की। इसी साल सीनेट में पुष्टि सुनवाई के दौरान गृह सुरक्षा मंत्री क्रिस्टी नोएम ने कहा था कि टीपीएस नामांकन की समीक्षा की जाएगी और जरूरत पड़ने पर इसे खत्म किया जाएगा।
नोएम ने कहा, “इस कार्यक्रम का बाइडन प्रशासन द्वारा दुरुपयोग और हेरफेर किया गया है, और अब ऐसा आगे नहीं होने दिया जाएगा।” जनवरी के अंत में ट्रंप प्रशासन के दोबारा सत्ता में लौटने से पहले, 17 देशों के 13 लाख से ज्यादा प्रवासी टीपीएस के तहत कवर थे। ट्रंप के पहले कार्यकाल में यह संख्या करीब 4 लाख थी।
इमिग्रेशन विशेषज्ञ जूलिया गेलाट ने कहा, “राष्ट्रपति बाइडन के दौर में लगभग 10 लाख नए लोग टीपीएस के दायरे में आए, इसलिए इसमें बहुत तेजी से विस्तार हुआ। अब हम उतनी ही तेजी से इसमें कटौती होते देख रहे हैं। ट्रंप के पहले कार्यकाल में टीपीएस पाने वालों की संख्या इतनी ज्यादा नहीं थी।”
नोएम ने 11 देशों के प्रवासियों के लिए टेम्पररी प्रोटेक्टेड स्टेटस (TPS) खत्म कर दिया है। इसके चलते फरवरी तक 10 लाख से ज्यादा लोग अपनी कानूनी सुरक्षा खो सकते हैं। इस साल की शुरुआत में उन्होंने दक्षिण सूडान के लिए टीपीएस को छह महीने के लिए बढ़ाया था, लेकिन नवंबर में इसे जनवरी तक खत्म करने का फैसला कर लिया गया। वहीं, इथियोपिया के लिए टीपीएस को 12 दिसंबर को वापस ले लिया गया।
जिन अन्य देशों के लोग प्रभावित हुए हैं, उनमें अफगानिस्तान, बर्मा (म्यांमार), कैमरून, हैती, होंडुरास, नेपाल, निकारागुआ, सीरिया, वेनेजुएला शामिल हैं। कैटो इंस्टीट्यूट में इमिग्रेशन स्टडीज के निदेशक डेविड बीयर ने सोशल मीडिया पर लिखा, “अमेरिका के इतिहास में हमने कभी इतने लोगों को एक साथ अपना कानूनी दर्जा खोते नहीं देखा। यह पूरी तरह अभूतपूर्व है।”
बीयर ने कहा कि इसका असर पूरे देश में एक जैसा नहीं होगा। फ्लोरिडा में 4 लाख से ज्यादा टीपीएस धारक हैं, जबकि टेक्सास में करीब 1.5 लाख। कंस्ट्रक्शन और हेल्थ जैसे सेक्टर, जो टीपीएस कामगारों पर काफी निर्भर हैं, उन पर इसका दबाव सबसे ज्यादा पड़ने की संभावना है।
टीपीएस (टेम्पररी प्रोटेक्टेड स्टेटस) खत्म होने से सबसे ज्यादा असर हैती और वेनेजुएला के प्रवासियों पर पड़ेगा। करीब 9.35 लाख लोग इससे प्रभावित होने वाले हैं। इनमें से लगभग 6.05 लाख वेनेजुएलावासी हैं। उन्हें पहली बार ट्रंप के पहले कार्यकाल में सुरक्षा दी गई थी। जनवरी 2021 में अपने कार्यकाल के आखिरी दिन ट्रंप प्रशासन ने डिफर्ड एनफोर्समेंट डिपार्चर (DED) के तहत 18 महीने की निर्वासन से सुरक्षा दी थी। इसका कारण राष्ट्रपति निकोलस मादुरो के शासन में देश की अस्थिर स्थिति बताई गई थी।
19 जनवरी 2021 के एक आधिकारिक नोट में कहा गया था, “जबरदस्ती और धोखाधड़ी के जरिए मादुरो शासन हाल के वर्षों में पश्चिमी गोलार्ध के सबसे गंभीर मानवीय संकट के लिए जिम्मेदार है। भीषण आर्थिक संकट और जरूरी सामान व दवाओं की कमी के कारण करीब 50 लाख वेनेजुएलावासियों को खतरनाक हालात में देश छोड़ना पड़ा।” इसके बाद बाइडन प्रशासन ने 2021 और फिर 2023 में अमेरिका आने वाले वेनेजुएलावासियों को टीपीएस दिया, जिससे टीपीएस के तहत दो अलग-अलग समूह बन गए।
जॉर्ज मेसन यूनिवर्सिटी के अर्थशास्त्र प्रोफेसर माइकल क्लेमेंस ने कहा, “सीधी बात यह है कि अगर 9.35 लाख वेनेजुएला और हैती के लोगों को हटाया गया, तो अमेरिकी अर्थव्यवस्था को 14 अरब डॉलर से ज्यादा का नुकसान हो सकता है।” क्लेमेंस ने बताया कि सभी टीपीएस धारक कामकाजी नहीं हैं। इनमें कुछ बच्चे और कुछ बुजुर्ग आश्रित हैं। उनके अनुमान के मुताबिक, हैती और वेनेजुएला के करीब 4 लाख टीपीएस धारक कामकाजी आबादी का हिस्सा हैं।
TPS के साथ-साथ मानवीय पैरोल को भी सीमित कर दिया गया है। बाइडन प्रशासन के दौरान करीब 7.5 लाख प्रवासियों को पैरोल के तहत कानूनी दर्जा दिया गया था। यह फैसला मुख्य रूप से यूक्रेन युद्ध और मध्य अमेरिका से बढ़ते पलायन के जवाब में लिया गया था। अब गृह सुरक्षा विभाग (DHS) ने क्यूबा, हैती, निकारागुआ और वेनेजुएला के 5.32 लाख लोगों के लिए पैरोल खत्म करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इससे ये लोग निर्वासन की कार्रवाई के खतरे में आ गए हैं।
CASA संस्था की वरिष्ठ इमिग्रेशन वकील एलिस बैरेट ने कहा, “हम अस्थायी इमिग्रेशन दर्जों पर, खासकर मानवीय आधार वाले दर्जों पर, जो लगातार हमले देख रहे हैं, वे बेहद दुखद और चिंता पैदा करने वाले हैं।” हालांकि कुछ समूहों को अभी छूट मिली हुई है। DHS ने 2022 में रूस के हमले के बाद आए 1.40 लाख यूक्रेनियों और अमेरिका की वापसी के बाद निकाले गए 76 हजार अफगानों के लिए पैरोल बरकरार रखा है। लेकिन पिछले महीने वॉशिंगटन डीसी में नेशनल गार्ड की गोलीबारी की एक घटना के बाद जांच और सख्त हो गई है। इस घटना में कथित तौर पर एक ऐसे अफगान नागरिक का नाम सामने आया है, जिसे शरण (असाइलम) दी गई थी। इसके बाद से अफगानों से जुड़ी इमिग्रेशन फाइलों की प्रक्रिया रोक दी गई है।गई है।
ट्रंप प्रशासन ने अपने पहले कार्यकाल के दौरान भी TPS को खत्म करने की कोशिश की थी, लेकिन 2018 में अदालतों ने हैती, निकारागुआ, अल सल्वाडोर और सूडान के लिए टीपीएस समाप्त करने पर रोक लगा दी थी।
इस बार कानूनी स्थिति बदल गई है, जोस पाल्मा ने कहा। उन्होंने कहा, “इस समय सबसे बड़ा फर्क यह है कि सुप्रीम कोर्ट ट्रंप प्रशासन को टीपीएस समाप्त करने की प्रक्रिया जारी रखने की अनुमति दे रहा है, जबकि निचली अदालतें कह रही हैं कि फिलहाल टीपीएस को रद्द करना रोका जाना चाहिए।” आपात अपीलों में सुप्रीम कोर्ट ने प्रशासन को वेनेजुएला के नागरिकों के लिए टीपीएस खत्म करने और मानवीय पैरोल वापस लेने की अनुमति दे दी है। बैरेट ने कहा कि इस बार टीपीएस समाप्त करने की रफ्तार और तेज हो गई है।
उन्होंने कहा, “ट्रंप के दूसरे कार्यकाल में जो हम देख रहे हैं, वह पहले कार्यकाल की तुलना में कहीं ज्यादा सख्त और तेज रूप है।” बैरेट ने यह भी कहा कि जो टीपीएस धारक लंबी अवधि के कानूनी दर्जे में जाना चाहते हैं, उन्हें अब अतिरिक्त बाधाओं का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा, “हम देख रहे हैं कि शरण (असाइलम) साक्षात्कारों के दौरान उन्हें सवालों के घेरे में लिया जा रहा है या राहत से इनकार किया जा रहा है, क्योंकि उन्होंने अमेरिका में प्रवेश के एक साल के भीतर असाइलम के लिए आवेदन नहीं किया, जबकि संघीय नियम स्पष्ट रूप से इसके लिए अपवाद की अनुमति देते हैं।”
उन्होंने कहा, “हमारे समुदाय के ये सदस्य, जो अब तक कानूनी दर्जे में थे, अब निर्वासन की कार्रवाई में डाले जाने और यहां तक कि इमिग्रेशन एंड कस्टम्स एनफोर्समेंट (ICE) की हिरासत में भेजे जाने का खतरा झेल रहे हैं, जहां हालात लगातार अमानवीय और खतरनाक होते जा रहे हैं।” टीपीएस धारकों द्वारा दायर कानूनी चुनौतियां अभी भी जारी हैं और कई राज्यों में अदालती मामले चल रहे हैं।