तेल-गैस

अमेरिकी प्रतिबंधों से वेनेजुएला की तेल अर्थव्यवस्था झुलसी, निर्यात पर गहरा असर; भारत का आयात भी घटा

वित्त वर्ष 2025 में भारत ने वेनेजुएला से 1.65 अरब डॉलर का सामान आयात किया था, जिसमें 93.3 प्रतिशत कच्चा तेल और अन्य पेट्रोलियम उत्पाद शामिल थे

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यश कुमार सिंघल   
Last Updated- January 05, 2026 | 11:00 PM IST

राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप सरकार के वेनेजुएला में निकोलस मादुरो की सरकार गिराने के कदम से इस लैटिन अमेरिकी देश की तेल अर्थव्यवस्था पर तेज आंच पड़ी है। अभी इसके और भी प्रभावित होने की संभावना है। अमेरिकी प्रतिबंधों के बाद हाल के वर्षों में वेनेजुएला से भारत का तेल आयात पहले ही काफी कम हो गया है।

कच्चे तेल के भंडार में वैश्विक स्तर पर वेनेजुएला की हिस्सेदारी 17 प्रतिशत है। वित्त वर्ष 2025 में भारत ने वेनेजुएला से 1.65 अरब डॉलर का सामान आयात किया था, जिसमें 93.3 प्रतिशत कच्चा तेल और अन्य पेट्रोलियम उत्पाद शामिल थे। उसी अवधि में वेनेजुएला को भारत से निर्यात 0.22 अरब डॉलर रहा।

पिछले एक दशक के दौरान कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पाद के भारत के आयात में वेनेजुएला की हिस्सेदारी वित्त वर्ष 2015 में 8.45 प्रतिशत से घटकर वित्त वर्ष 26 के पहले आठ महीनों में 0.28 प्रतिशत रह गई है। वेलेजुएला अभी अपने तेल भंडारों का पूरा फायदा नहीं उठा पा रहा है। सबसे बड़े तेल भंडार होने के बावजूद 2023 में इस देश का कच्चा तेल निर्यात 4 अरब डॉलर से थोड़ा ही अधिक था। दूसरी ओर 2023 में रूस का कच्चा तेल निर्यात 122 अरब डॉलर का था। वेनेजुएला के पास रूस के मुकाबले एक चौथाई भंडार होने के बावजूद उसका निर्यात काफी कम है।

तेल ही नहीं, इस लैटिन अमेरिकी देश के पास व्यापक प्राकृतिक गैस भंडार भी हैं और पिछले 4 दशक में उसकी वैश्विक हिस्सेदारी बढ़ी ही है। वर्ष 1983 में वैश्विक कच्चे तेल भंडार में उसकी हिस्सेदारी 3 प्रतिशत थी जो 2020 में 18 प्रतिशत तक बढ़ी और 2024 में 17 प्रतिशत के स्तर पर रही। इसी प्रकार प्राकृतिक गैस भंडारों में भी उसकी हिस्सेदारी 1983 में 2 प्रतिशत थी, जो 1995 में सर्वाधिक 5 प्रतिशत तक बढ़कर 2024 में 3 प्रतिशत के स्तर पर दर्ज की गई।

First Published : January 5, 2026 | 11:00 PM IST