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कच्चे तेल में नरमी और मजबूत मार्जिन से तेल रिफाइनिंग कंपनियों की रहेगी मजबूत तिमाही

एलारा कैपिटल ने कहा कि दिसंबर तिमाही में सरकारी तेलशोधकों का जीआरएम 10 से 13 डॉलर प्रति बैरल रहने की उम्मीद है, जबकि पिछले साल की समान अवधि में मार्जिन $3 से $6 प्रति बैरल था।

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शुभांगी माथुर   
Last Updated- January 15, 2026 | 9:18 AM IST

वित्त वर्ष 2025-26 की तीसरी तिमाही में भारत की तेलशोधन और विपणन कंपनियों का प्रदर्शन मजबूत रहने की उम्मीद है।  कंपनियों का ग्रॉस रिफाइनिंग मार्जिन (जीआरएम) काफी सुधरा है और कच्चे तेल की कम कीमतों के कारण विपणन में भी अच्छा मुनाफा हुआ है।

विपणन से होने वाले मुनाफे का मतलब पेट्रोल और डीजल जैसे रिफाइंड उत्पादों की बिक्री पर होने वाला मुनाफा है, जबकि ग्रॉस रिफाइनिंग मार्जिन से कच्चे तेल के एक बैरल को रिफाइंड उत्पादों में बदलने पर होने वाले मुनाफे का पता चलता है। प्रमुख सरकारी तेलशोधन कंपनियों में इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (आईओसीएल), भारत पेट्रोलियम (बीपीसीएल), हिंदुस्तान पेट्रोलियम (एचपीसीएल) और प्राइवेट कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (आरआईएल) शामिल हैं।

येस सिक्योरिटीज ने एक नोट में कहा, ‘रिफाइनिंग के मामले में देखें तो भारतीय रिफाइनरों के लिए प्रमुख प्रोडक्ट क्रैक मजबूत थे और बेंचमार्क से प्रीमियम पर रिपोर्ट करना जारी रखेंगे। हमें उम्मीद है कि कंपनियां रिफाइनिंग इन्वेंट्री और मार्केटिंग के आकस्मिक नुकसान के साथ कोर जीआरएम में क्रमिक सुधार की सूचना देंगी।’

वहीं एलारा कैपिटल ने कहा कि वित्त वर्ष 2026 की तीसरी तिमाही में सरकारी तेलशोधकों का जीआरएम 10 से 13 डॉलर प्रति बैरल रहने की उम्मीद है, जबकि पिछले साल की समान अवधि में मार्जिन 3 से 6 डॉलर प्रति बैरल था।

इस तिमाही के दौरान आरआईएल का जीआरएम 13.4 डॉलर प्रति बैरल रहने का अनुमान है, जो पिछले साल की समान अवधि के 10.4 डॉलर प्रति बैरल से अधिक होगा। इलारा कैपिटल ने कहा है कि कंपनी सालाना आधार पर 13 प्रतिशत की मजबूत इबिटा वृद्धि दर्ज कर सकती है, क्योंकि इसका ऑयल-टु-केमिकल्स (ओ2सी) कारोबार और डिजिटल सेवाएं या टेलीकॉम से कमाई अच्छी रही है।

कच्चे तेल की कीमतें कम रहने के कारण इस तिमाही के दौरान तेल कंपनियों का विपणन मुनाफा भी मजबूत रहने की संभावना है। तिमाही के दौरान ब्रेंट क्रूड की औसत कीमत 63.1 डॉलर प्रति बैरल रही, जो सालाना आधार पर 10.9 डॉलर प्रति बैरल और तिमाही आधार पर 5 डॉलर प्रति बैरल कम है।

इस तिमाही के दौरान सकल विपणन मुनाफा पेट्रोल और डीजल के लिए औसतन क्रमशः 7.38 और 5.25 रुपये प्रति लीटर रहा है। इसके साथ ही भारत में पेट्रोलियम उत्पादों की खपत भी इस तिमाही में अधिक रही है, जिससे तेल विपणन कंपनियों की बिक्री बढ़ी है।

रसोई गैस (एलपीजी) सिलिंडरों की बिक्री पर तेल कंपनियों को होने वाले नुकसान की भरपाई केंद्र सरकार करेगी, जिससे इनके प्रदर्शन को समर्थन मिलेगा। येस सिक्योरिटीज ने कहा, ‘कुल मिलाकर तेल विपणन कंपनियों का प्रदर्शन पिछली तिमाही से बेहतर रहेगा और इसे एलपीजी के बोझ में कमी आने से भी समर्थन मिलेगा। विदेशी मुद्रा की हानि का कमाई पर नकारात्मक असर पड़ने की उम्मीद है।’
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने हाल ही में 3 सरकारी तेल विपणन कंपनियों को रसोई गैस सिलिंडर की बिक्री पर हुए नुकसान के लिए 30,000 करोड़ रुपये के मुआवजे को मंजूरी दी है।

First Published : January 15, 2026 | 9:18 AM IST