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ONGC की बड़ी छलांग: जापानी कंपनी के साथ मिलकर इथेन ले जाने वाले विशाल जहाज उतारने की तैयारी में

ONGC ने जापानी कंपनी मित्सुई के साथ संयुक्त उद्यम बनाकर इथेन कैरियर जहाज खरीदने और अमेरिका से इथेन आयात 2028 से शुरू करने की योजना बनाई है

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बीएस वेब टीम   
Last Updated- January 05, 2026 | 7:14 PM IST

ऑयल एंड नेचुरल गैस कॉर्पोरेशन (ONGC) ने जापान की मशहूर शिपिंग कंपनी मित्सुई OSK लाइंस (MOL) के साथ हाथ मिलाया है। दोनों मिलकर दो संयुक्त कंपनियां बनाएंगे, जिनमें ONGC की 50 फीसदी हिस्सेदारी होगी। ये कंपनियां बहुत बड़े साइज के इथेन कैरियर जहाज (VLEC) खरीदेंगी और चलाएंगी। इससे सरकारी कंपनी ONGC पहली बार स्पेशल इथेन शिपिंग के क्षेत्र में कदम रख रही है।

ONGC ने बताया कि उसने मित्सुई OSK लाइंस के साथ संयुक्त उद्यम और पूंजी निवेश के समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। ये समझौते भारत इथेन वन IFSC प्राइवेट लिमिटेड और भारत इथेन टू IFSC प्राइवेट लिमिटेड नाम की दो कंपनियों के लिए हैं। दोनों कंपनियां गुजरात के गिफ्ट सिटी, गांधीनगर में रजिस्टर्ड हैं।

हर कंपनी में बाकी 50 फीसदी हिस्सा MOL के पास रहेगा। हर संयुक्त कंपनी एक-एक VLEC जहाज की मालिक होगी। इन जहाजों को MOL ही चलाएगा और ये भारतीय झंडे के नीचे चलेंगे। ये जहाज अमेरिका से इथेन लाकर ONGC की पेट्रोकेमिकल सब्सिडियरी कंपनी ONGC पेट्रो एडिशंस लिमिटेड (OPAL) को सप्लाई करेंगे।

ONGC ने कहा, “महारत्न कंपनी हर संयुक्त उद्यम में 2 लाख इक्विटी शेयर लेगी, जिनकी कीमत 100 रुपये प्रति शेयर है। शेयर लेने के बाद ONGC की हर कंपनी में 50 फीसदी हिस्सेदारी हो जाएगी, जबकि बाकी 50 फीसदी MOL के पास रहेगी।”

कंपनी का मानना है कि इस साझेदारी से MOL की ग्लोबल शिपिंग स्पेशलिटी और ONGC की बड़ी पहुंच का फायदा मिलेगा। इससे ऊर्जा की पूरी वैल्यू चेन को मजबूत किया जा सकेगा।

यह कदम ONGC के लिए ऊर्जा लॉजिस्टिक्स और विशेष शिपिंग में नया विस्तार है। इसका मकसद लंबे समय तक इथेन की सप्लाई सुनिश्चित करना और सिर्फ अपस्ट्रीम कामों से आगे बढ़कर ज्यादा मूल्य हासिल करना है।

ये विशेष जहाज कोरिया के शिपयार्ड में बनाए जाएंगे। दोनों जहाजों की अनुमानित कीमत करीब 370 मिलियन अमेरिकी डॉलर है। इनका इस्तेमाल OPAL के दाहेज प्लांट के लिए पेट्रोकेमिकल कच्चा माल सुरक्षित करने में होगा। इथेन की आयात 2028 के आसपास शुरू हो जाएगी।

मित्सुई और उसके पार्टनर पहले से ही भारत की सबसे बड़ी LNG आयातक कंपनी पेट्रोनेट LNG लिमिटेड के लिए चार LNG जहाज चलाते हैं। इसके अलावा रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड के लिए छह इथेन कैरियर भी चलाते हैं।

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कतर से बदलते LNG समझौते की वजह से नया प्लान

ONGC इस साल मार्च में एक टेंडर निकाला था, जिसमें VLEC बनाने और चलाने के लिए पार्टनर चुना जाना था। उस टेंडर के मुताबिक कंपनी मध्य-2028 से इथेन आयात शुरू करना चाहती है। वजह यह है कि कतर से आने वाले LNG की संरचना बदल रही है।

भारत हर साल कतर से 75 लाख टन LNG आयात करता है। पुराने समझौते में कतरएनर्जी हर साल 50 लाख टन LNG फर्म आधार पर सप्लाई करती थी। इसमें मीथेन के साथ-साथ इथेन और प्रोपेन भी होते थे। मीथेन से बिजली, खाद, CNF या खाना बनाने की गैस बनती है, जबकि इथेन और प्रोपेन से LPG और पेट्रोकेमिकल्स बनते हैं। बाकी सप्लाई बेस्ट एफर्ट आधार पर होती थी।

यह पुराना समझौता 2028 में खत्म हो रहा है। पिछले साल नया समझौता हुआ, जिसमें कतरएनर्जी अब सिर्फ ‘लीन’ गैस सप्लाई करेगी, यानी इथेन और प्रोपेन निकालकर सिर्फ मीथेन वाली गैस देगी।

ONGC ने गुजरात के दाहेज में करीब 1500 करोड़ रुपये खर्च करके 2008-09 में C2 (इथेन) और C3 (प्रोपेन) निकालने का प्लांट लगाया था। इससे निकले इथेन और प्रोपेन को उसकी सब्सिडियरी OPAL में पेट्रोकेमिकल बनाने के लिए इस्तेमाल किया जाता था।

अब LNG की संरचना बदलने की वजह से कंपनी अलग से इथेन आयात करने की योजना बना रही है।

OPAL का दाहेज प्लांट दक्षिण-पूर्व एशिया का सबसे बड़ा स्टैंडअलोन डुअल फीड क्रैकर है। इसमें नैफ्था के साथ-साथ C2 (इथेन), C3 (प्रोपेन) और C4 (ब्यूटेन) को कच्चे माल के तौर पर इस्तेमाल किया जाता है।

टेंडर डॉक्यूमेंट में लिखा था कि मई 2028 से ONGC हर साल 8 लाख टन इथेन सोर्स करके OPAL को सप्लाई करना चाहती है। इसी इथेन को लाने के लिए मित्सुई के साथ संयुक्त उद्यम बनाकर VLEC बनवाए जा रहे हैं। इथेन सोर्स करने की जिम्मेदारी ONGC की होगी। वह संयुक्त उद्यम से जहाज किराए पर लेकर इथेन की ढुलाई करेगी।

दाहेज में बना C2-C3 प्लांट हर साल 49 लाख टन LNG हैंडल कर सकता है। OPAL प्लांट में सालाना 11 लाख टन एथिलीन बनाने की क्षमता वाला डुअल फीड क्रैकर है। इसके साथ जुड़े दूसरे यूनिट और पॉलीमर प्लांट भी हैं, जहां HDPE, LLDPE, PP और स्टाइरीन ब्यूटाडीन रबर बनाया जाता है।

OPAL का पेट्रोकेमिकल प्लांट 2017 में ही बनकर तैयार हुआ था। इससे पहले 2008-09 से निकाला गया C2-C3 कंपाउंड रिलायंस की आईपीसीएल को बेचा जाता था, जब तक अपना प्लांट तैयार नहीं हो गया।

(PTI के इनपुट के साथ)

First Published : January 5, 2026 | 7:13 PM IST