प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो
सोशल मीडिया पर फैली अफवाहों के बीच सरकार ने साफ किया है कि इनकम टैक्स डिपार्टमेंट (ITD) लोगों की निजी डिजिटल गतिविधियों, ऑनलाइन खर्चों या लाइफस्टाइल की आदतों पर नजर नहीं रखता। इंस्टाग्राम पर ‘bingewealth’ नाम के एक अकाउंट की हालिया पोस्ट में दावा किया गया था कि ईमेल, सोशल मीडिया, ट्रेडिंग ऐप्स और निजी अकाउंट्स जैसी व्यक्तिगत डिजिटल गतिविधियों पर टैक्स अधिकारी निगरानी रख सकते हैं। प्रेस इंफॉर्मेशन ब्यूरो (PIB) ने इसे गलत और भ्रामक बताया है।
ITD के पास व्यक्तिगत खर्चों या ऐप आधारित लेन-देन पर नजर रखने का कोई तरीका नहीं है। इनकम टैक्स एक्ट 1961 के सेक्शन 285BA के तहत स्टेटमेंट ऑफ फाइनेंशियल ट्रांजेक्शंस (SFT) के जरिए बड़े लेन-देन की रिपोर्टिंग होती है, जो सिर्फ सामान्य अनुपालन (कानून का पालन) का हिस्सा है। ये रिपोर्ट बैंक, रजिस्ट्रार और अन्य तय संस्थाओं से आती हैं। इसमें लोगों का प्रोफाइल बनाना या उनकी ऑनलाइन आदतों पर नजर रखना शामिल नहीं है।
1 अप्रैल 2026 से कुछ खबरों में कहा गया था कि ITD निजी डिजिटल जगहों तक पहुंच बना सकता है। सरकार ने स्पष्ट किया कि इनकम टैक्स एक्ट 2025 की सेक्शन 247 सिर्फ सर्च और सर्वे ऑपरेशंस के दौरान लागू होती है। ये अधिकार गंभीर टैक्स चोरी के मामलों में ही इस्तेमाल होते हैं और आम मूल्यांकन या ईमानदार नागरिकों की निगरानी के लिए नहीं।
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एक्सपर्ट्स का कहना है कि सोशल मीडिया पर घूम रही गलत बातों को दूर करने के लिए ऐसे स्पष्टीकरण जरूरी हैं, खासकर जब डिजिटल प्राइवेसी को लेकर चिंताएं बढ़ रही हैं। ITD की ताकतें काले धन और बड़े पैमाने पर टैक्स चोरी से लड़ने तक सीमित हैं, न कि आम लोगों के रोजाना खर्चों पर।