facebookmetapixel
Advertisement
राजस्थान रॉयल्स का नया मालिक बनेगा मित्तल परिवार, अदार पूनावाला के साथ मिलकर $1.65 अरब में हुई डील‘ऑपरेशन सिंदूर’ के एक साल पूरे: भविष्य के युद्धों के लिए भारत को अब पूर्वी मोर्चे पर ध्यान देने की जरूरतEditorial: होर्मुज संकट और तेल की कीमतों से भारत के सामने राजकोषीय दबावनिजीकरण नहीं, मुद्रीकरण: सरकार बनाएगी और मालिक रहेगी, निजी कंपनियां सिर्फ चलाएंगी प्रोजेक्ट्समजदूरों को समय पर भुगतान के लिए केंद्र सरकार का बड़ा कदम, मनरेगा के लिए ₹17,744 करोड़ जारीटैक्स और दीवाला कानून में ठनी: पुरानी कंपनियों के खरीदारों को ‘घाटे के लाभ’ पर मिली तगड़ी चुनौतीऊर्जा संकट ने खोली सरकार की आंख, अब ‘समुद्र मंथन’ के जरिए गहरे पानी में तेल व गैस खोजेगा भारतसन फार्मा ऑर्गेनॉन को खरीदने के लिए जुटाएगी $10 अरब, दुनिया के टॉप-25 दवा कंपनियों में होगी एंट्रीयोगी सरकार का मेगा प्लान: 12 शहरों में बनेंगे स्किल हब, हर साल 10 लाख युवाओं को मिलेगा प्रशिक्षणLPG की आग में झुलसा रेस्तरां कारोबार: कमर्शियल सिलेंडर ₹3000 के पार, बाहर खाना होगा 40% तक महंगा

कोटक म्युचुअल फंड ने स्मॉलकैप फंड निवेश पर सीमा तय की

Advertisement

Kotak Mutual Fund: निवेशक अब हर महीने 200,000 रुपये का अ​धिकतम एकमुश्त निवेश और एसआईपी के जरिये 25,000 रुपये महीने का निवेश कर सकते हैं।

Last Updated- February 26, 2024 | 10:04 PM IST
Kotak Silver ETF

अपनी स्मॉलकैप फंड श्रेणी में 14,500 करोड़ रुपये का प्रबंधन करने वाला कोटक म्युचुअल फंड उन प्रतिस्प​र्धियों में शुमार हो गया है जिन्होंने स्मॉलकैप फंडों में निवेश करने वाले निवेशकों के लिए कुछ सीमाएं तय कर रखी हैं। निवेशक अब हर महीने 200,000 रुपये का अ​धिकतम एकमुश्त निवेश और एसआईपी के जरिये 25,000 रुपये महीने का निवेश कर सकते हैं।

निवेशकों को भेजे एक पत्र में फंड हाउस ने कहा है कि शेयर कीमतों में बड़ी तेजी, दुनियाभर में आगामी चुनाव और सूचीबद्ध क्षेत्र में नई स्मॉलकैप फर्मों की सीमित आपूर्ति को ध्यान में रखते हुए ऐसी योजनाओं में निवेश सीमित करने के लिए बाध्य होना पड़ा है।

स्मॉलकैप सेगमेंट में छोटे निवेशकों का स्वामित्व बढ़ गया है। यह कई शेयरों में तो संस्थागत हिस्सेदारी से भी ज्यादा हो गया है। म्युचुअल फंड जैसे संस्थागत निवेशक इन योजनाओं में बड़ा नियंत्रण रखते हैं और अनुशासित तरीके से निवेश करते हैं।

हालांकि निवेशकों द्वारा गति का पीछा करने के साथ-साथ बाजार में उपलब्ध सीमित फ्री फ्लोट ने कुछ मामलों में मूल्यांकन संबं​धित अनि​श्चितताएं पैदा की हैं। फंड हाउस ने कहा है कि निफ्टी स्मॉलकैप 250 टीआरआई इंडेक्स पिछले एक साल में करीब 66 प्रतिशत तक चढ़ा है।

फंड हाउस ने कहा है, ‘स्मॉलकैप और मिडकैप सेगमेंट में कुछ शेयर कई गुना बढ़े हैं और मजबूत तेजी ने उन्हें व्यवसाय के उचित मूल्य से पार पहुंचा दिया है। जहां भारत का बाजार पूंजीकरण/जीडीपी 130 रुपये की सर्वा​धिक ऊंचाई के आसपास है, वहीं संपूर्ण बाजार पूंजीकरण के मुकाबले स्मॉलकैप का बाजार पूंजीकरण चढ़कर 18.9 प्रतिशत हो गया। ऐतिहासिक तौर पर यह अनुपात 10 रुपये पर रहा है।’

पिछले साल, टाटा एमएफ और निप्पॉन इंडिया एमएफ ने भी स्मॉलकैप फंडों में बढ़ती निवेशक दिलचस्पी के बीच समान सीमाएं लगाई थीं। सभी समयाव​धियों में शीर्ष पर छाए रहने वाले स्मॉलकैप फंडों में इन दोनों फंडों ने एक साल से इ​क्विटी आधारित योजनाओं में सर्वा​धिक निवेश आक​र्षित किया है। कैलेंडर वर्ष 2023 में, स्मॉलकैप योजनाओं ने करीब 40,000 करोड़ रुपये जुटाए, जब​कि लार्जकैप और फ्लेक्सीकैप ने सिर्फ 4,500 करोड़ रुपये हासिल किए।

बाजार विश्लेषकों और फंड प्रबंधकों ने बड़ी तेजी के बाद मूल्यांकन चिंताओं को ध्यान में रखकर स्मॉलकैप सेगमेंट पर सतर्कता बरतने की सलाह दी है। ब्लूमबर्ग के आंकड़े से पता चलता है कि निफ्टी स्मॉलकैप 100 सूचकांक का पीई मल्टीपल मौजूदा समय में 21.7 गुना है जो 17.1 के 5 वर्षीय औसत से काफी ज्यादा है।

Advertisement
First Published - February 26, 2024 | 10:04 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement