facebookmetapixel
जिस तरह अमेरिका ने वेनेजुएला से मादुरो को उठा लिया, क्या उसी तरह चीन ताइवान के साथ कर सकता है?कहीं आपकी जेब में तो नहीं नकली नोट? RBI ने बताया पहचानने का आसान तरीकाकई बड़े शहरों में नहीं बिक रहे घर! मेट्रो सिटी में अनसोल्ड घरों का लगा अंबार, 2025 में आंकड़ा 5.7 लाख के पारMCap: शेयर बाजार की तेजी में टॉप 7 कंपनियों का मुनाफा, ₹1.23 लाख करोड़ बढ़ा मार्केट कैपसाल की शुरुआत में FPIs ने निकाले 7,608 करोड़, विदेशी निवेशक रहे सतर्कMarket Outlook: इस हफ्ते बाजार में रुझान तय करेंगे मैक्रो डेटा और FII ट्रेडिंगUS Venezuela Attack: कौन हैं Nicolás Maduro? जिनके पकड़े जाने का दावा अमेरिका ने कियाWeather Update Today: उत्तर भारत में ठंड और घने कोहरे का कहर, IMD ने जारी की चेतावनीUP: लखनऊ में बनेगी AI सिटी, उत्तर प्रदेश को मिलेगा ग्लोबल टेक पहचानHealth Insurance: हेल्थ इंश्योरेंस खरीदते समय अधिकतर लोग क्या गलती करते हैं?

निवेशक एक हफ्ते के भीतर बेच देते हैं आधे से ज्यादा IPO शेयर: Sebi स्टडी

ज्यादातर निवेशक IPO में जल्दी मुनाफा कमाने के लिए शेयर खरीदते हैं और जैसे ही उन्हें फायदा होता है, वे बेच देते हैं।

Last Updated- September 02, 2024 | 9:32 PM IST
SEBI

भारतीय बाजार नियामक सेबी (Sebi) द्वारा किए गए एक अध्ययन से पता चला है कि ज्यादातर निवेशक, जिन्हें IPO में शेयरों का आवंटन मिलता है, वे एक हफ्ते के भीतर अपने शेयर बेच देते हैं। जबकि 70 प्रतिशत शेयर एक साल के भीतर बेचे जाते हैं। यह अध्ययन अप्रैल 2021 से दिसंबर 2023 के बीच लिस्ट हुए 144 IPO पर आधारित है। इसमें पाया गया कि ज्यादातर निवेशक IPO में जल्दी मुनाफा कमाने के लिए शेयर खरीदते हैं और जैसे ही उन्हें फायदा होता है, वे बेच देते हैं।

सेबी ने एक प्रेस रिलीज में बताया कि जिन IPOs में लिस्टिंग के बाद प्रॉफिट हुआ उनमें निवेशकों ने तेजी से शेयर बेचने की प्रवृत्ति दिखाई, जबकि जिन IPO में नुकसान हुआ, उनमें शेयर बेचने की प्रवृत्ति कम थी। जब IPO में 20 प्रतिशत से अधिक का मुनाफा हुआ, तो निवेशकों ने एक हफ्ते के भीतर 67.6 प्रतिशत शेयर बेच दिए, जबकि जब मुनाफा नहीं हुआ, तो केवल 23.3 प्रतिशत शेयर बेचे गए।

अध्ययन में यह भी पाया गया कि अप्रैल 2022 में रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) द्वारा नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनियों (NBFC) के लिए IPO फाइनेंस पर 1 करोड़ रुपये की सीमा लगाने के बाद, हाई नेट-वर्थ इंडिविजुअल्स (HNI) के लिए IPO की ओवरसब्सक्रिप्शन लेवल्स में कमी आई। 1 करोड़ रुपये से अधिक के IPO आवेदनों की औसत संख्या पहले (अप्रैल 2021 – मार्च 2022) की तुलना में पॉलिसी के बाद (अप्रैल 2022 – दिसंबर 2023) में लगभग 626 से घटकर लगभग 20 प्रति IPO हो गई।

अध्ययन के अनुसार, 144 IPO ने 2.13 लाख करोड़ रुपये जुटाए, जिनमें से 75 प्रतिशत IPO ने पॉजिटिव रिटर्न दिया। इनमें से 26 IPO ने लिस्टिंग के पहले दिन ही 50 प्रतिशत से अधिक का रिटर्न दिया।

सेबी ने 9 करोड़ से अधिक यूनिक IPO निवेशकों के इन्वेस्टमेंट पैटर्न का अध्ययन किया। अध्ययन में IPO निवेशकों का जियोग्राफिकल डिस्ट्रीब्यूशन भी दिखाया गया है। लगभग 70 प्रतिशत IPO अप्लिकेंट्स केवल चार प्रमुख राज्यों – गुजरात, महाराष्ट्र, राजस्थान और उत्तर प्रदेश से आते हैं। रिटेल इन्वेस्टर्स में गुजरात के निवेशकों को 39.3 प्रतिशत, महाराष्ट्र को 13.5 प्रतिशत और राजस्थान को 10.5 प्रतिशत आवंटन मिला। HNI कैटेगरी में गुजरात के निवेशकों का आवंटन 42.3 प्रतिशत, महाराष्ट्र का 20.4 प्रतिशत और राजस्थान का 15.5 प्रतिशत रहा।

अध्ययन से यह भी पता चला कि 144 IPO में आवंटन प्राप्त करने वाले लगभग 48 प्रतिशत डीमैट अकाउंट्स 2021 से 2023 के बीच खोले गए थे। जब क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स (QIB) की बात आई, तो मेन बुक में आवंटित 65.4 प्रतिशत शेयर एक हफ्ते के भीतर और 87.8 प्रतिशत शेयर एक साल के भीतर बेच दिए गए। 1,000 करोड़ रुपये से कम के IPO में इन्वेस्टर्स की होल्डिंग अवधि कम पाई गई।

First Published - September 2, 2024 | 8:52 PM IST

संबंधित पोस्ट