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साल 2024 में शेयर बाजार में निवेश करनेवालों की assets value 77 लाख 66 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा बढ़ी। BSE Sensex करीब 9%, NSE Nifty50 9.5% से अधिक चढ़ा।

Last Updated- December 31, 2024 | 9:18 PM IST
Market Outlook
प्रतीकात्मक तस्वीर

साल 2024 में तेजड़ियों और मंदड़ियों के बीच काफी संघर्ष देखने को मिला। वैश्विक वृहद आर्थिक आंकड़ों और भू-राजनीतिक तनाव ने बाजार को काफी प्रभावित किया, जिसकी वजह से बाजार में लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिला। यह साल काफी घटनाक्रमों का रहा। साल के दौरान भारत में आम चुनाव के अलावा अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव मुख्य घटनाक्रम रहे। इसके अलावा शेयर बाजारों पर इजरायल-ईरान संघर्ष और रूस-यूक्रेन युद्ध जैसे दो प्रमुख भू-राजनीतिक घटनाक्रमों का भी असर पड़ा।

हालांकि, दुनियाभर में अनिश्चितताओं के बावजूद भारतीय बाजारों ने काफी हद तक दबाव के बीच अच्छा प्रदर्शन किया और निवेशकों को बेहतर रिटर्न दिया। 2024 लगातार नौवां साल रहा है जबकि स्थानीय शेयर बाजारों ने निवेशकों को सकारात्मक रिटर्न दिया है। इस दौरान छोटी और मझोली कंपनियों के शेयरों का प्रदर्शन बड़ी कंपनियों से बेहतर रहा। यही वजह है कि मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों ने निवेशकों को ‘लार्जकैप’ की तुलना में अधिक रिटर्न दिया है। बीते साल यानी 2023 में सेंसेक्स 11,399.52 अंक या 18.73 प्रतिशत चढ़ा था। वहीं निफ्टी 3,626.1 अंक या 20 प्रतिशत के लाभ में रहा था।

सितंबर, 2024 याने Historic High का महीना

सितंबर में BSE और NSE अपने रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचें। BSE का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स इस साल 27 सितंबर को 85,978.25 के अपने रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा था। उसी दिन निफ्टी ने भी अपने 26,277.35 अंक के सर्वकालिक उच्चस्तर को छुआ था। इस साल 27 दिसंबर तक BSE का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स 6,458.81 अंक या 8.94 प्रतिशत चढ़ा है। वहीं नेशनल स्टॉक एक्सचेंज के निफ्टी में 2,082 अंक या 9.58 प्रतिशत का उछाल आया है।

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शेयर बाजार की Historic High से low तक

शेयर बाजार सितंबर के अपने सर्वकालिक उच्चस्तर से सेंसेक्स 8.46 प्रतिशत नीचे आ चुका है। वहीं, निफ्टी रिकॉर्ड स्तर से 9.37 प्रतिशत टूट चुका है। अकेले October में सेंसेक्स 4,910.72 अंक या 5.82 प्रतिशत नीचे आया था। इसी महीने निफ्टी में 1,605.5 अंक या 6.22 प्रतिशत की गिरावट आई थी। अक्टूबर में FIIs ने भारतीय बाजारों से 94,017 करोड़ रुपये की निकासी की थी।  December में सेंसेक्स 1,103.72 अंक या 1.38 प्रतिशत नीचे आया।

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क्या कहते हैं शेयर बाजार के एक्सपर्ट

मेहता इक्विटीज लिमिटेड के वरिष्ठ उपाध्यक्ष (शोध) प्रशांत तापसे  ने कहा, ”वर्ष 2024 बाजारों के लिए चुनौतीपूर्ण लेकिन फायदेमंद रहा। जनवरी से सितंबर तक निफ्टी लगातार चढ़ता रहा और 26,277.35 के ऐतिहासिक उच्च स्तर पर पहुंच गया। इसके बाद कुछ गिरावट के बाद भी साल का अंत प्रभावशाली वृद्धि के साथ हुआ। एफआईआई की बिकवाली के बावजूद निफ्टी ने लगातार नौवें साल सकारात्मक प्रतिफल दिया।” इस साल 30 शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स 5,898.75 अंक यानी 8.16 फीसदी उछला। सेंसेक्स 27 सितंबर को 85,978.25 के अपने सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गया। बीएसई में सूचीबद्ध कंपनियों का बाजार पूंजीकरण (एमकैप) 2024 में 77,66,260.19 करोड़ रुपये बढ़कर 4,41,95,106.44 करोड़ रुपये हो गया। इस साल आठ अप्रैल को पहली बार बीएसई में सूचीबद्ध कंपनियों का बाजार पूंजीकरण 400 लाख करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंच गया था।

पीएल कैपिटल – प्रभुदास लीलाधर के निदेशक (शोध, संस्थागत इक्विटी) अमनीश अग्रवाल  ने कहा, ”साल की शुरुआत में मुद्रास्फीति में कमी, ब्याज दरों में कटौती और भाजपा के फिर से जीत कर आने की उम्मीद में एक मजबूत तेजी देखी गई। ऐसे में सूचकांक रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गए। चुनाव परिणाम हालांकि भाजपा के पक्ष में थे, लेकिन पार्टी को पूर्ण बहुमत नहीं मिला। ऐसे में बाजार में एक संक्षिप्त गिरावट देखने को मिली।” इसके बाद अगस्त में ‘येन कैरी ट्रेड’ को खत्म कर दिया गया, जिसने अस्थिरता के एक और दौर को जन्म दिया। इन झटकों के बावजूद बाजार सितंबर में नए शिखर पर पहुंच गया। इसके बाद एफआईआई की बिकवाली, अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव के बाद बढ़ी वैश्विक अनिश्चितताओं और बढ़ती मुद्रास्फीति के चलते तेजी से गिरावट हुई। सिर्फ अक्टूबर में बीएसई सेंसेक्स 4,910.72 अंक यानी 5.82 प्रतिशत गिर गया।

मास्टर कैपिटल सर्विसेज लिमिटेड की निदेशक पलक अरोड़ा चोपड़ा  ने कहा कि विदेशी संस्थागत निवेशक (FIIs) उच्च मूल्यांकन के कारण मुनाफावसूली कर रहे हैं, जबकि घरेलू संस्थागत निवेशक (DIIs) लगातार बाजार का समर्थन कर रहे हैं। इस साल बाजार के सकारात्मक रुझान में खुदरा निवेशकों (Retail Investors) की भारी भागीदारी ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

मोतीलाल ओसवाल वेल्थ मैनेजमेंट  ने कहा है कि साल की पहली छमाही में Nifty सितंबर, 2024 में 26,277.35 अंक के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंचा गया था। पिछले दो महीने में बाजार अपने सर्वकालिक उच्च स्तर से नीचे आ गया है। यह 2020 में कोविड-19 महामारी के बाद तीसरी बड़ी गिरावट थी। इसकी मुख्य वजह घरेलू और वैश्विक कारकों की वजह से विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की जबर्दस्त बिकवाली है।’’

मेहता इक्विटीज लि. के वरिष्ठ उपाध्यक्ष (शोध-अनुसंधान) प्रशांत तापसे  ने कहा, ‘‘यह मूल्यांकन में उछाल का साल भी था, जिसने भारतीय बाजारों को दुनिया में सबसे महंगा बना दिया। बाजार में अतिरिक्त तरलता ने मूल्यांकन को ऊंचाई पर पहुंचा दिया जिसकी वजह से अंतत: ‘करेक्शन’ देखने को मिला।

स्वस्तिका इन्वेस्टमार्ट लि. के शोध प्रमुख संतोष मीणा  ने कहा, ‘‘हालांकि, निफ्टी (Nifty) और सेंसेक्स (Sensex) का प्रदर्शन अन्य देशों विशेष रूप से अमेरिका के बाजारों से कमजोर रहा है। इस खराब प्रदर्शन की वजह विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की जबर्दस्त बिकवाली है।’’

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First Published - December 31, 2024 | 8:21 PM IST

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