facebookmetapixel
Advertisement
स्मार्ट लाइटिंग से चमकेगा भारत! 2031 तक 24 अरब डॉलर पार करेगा स्मार्ट होम मार्केटकैबिनेट का बड़ा फैसला, नागपुर एयरपोर्ट बनेगा वर्ल्ड क्लास हब; यात्रियों को मिलेंगी नई सुविधाएंKharif MSP 2026: खरीफ फसलों की MSP में इजाफा, धान का समर्थन मूल्य ₹72 बढ़ाFMCG कंपनियों में निवेश का मौका, DSP म्युचुअल फंड का नए ETF की पूरी डीटेलUS-Iran War: चीन यात्रा से पहले ट्रंप की ईरान को खुली चेतावनी, बोले- ‘डील करो वरना तबाही तय’Cabinet decisions: कोयले से गैस बनाएगी सरकार! ₹37,500 करोड़ की स्कीम से बदल सकती है देश की ऊर्जा तस्वीरहर महीने ₹30,000 करोड़ का नुकसान! आखिर कब तक पेट्रोल-डीजल के दाम रोक पाएगी सरकार?IT Sector Outlook: AI और क्लाउड से मिल रहा बड़ा काम, भारतीय IT कंपनियों के लिए बदल रही तस्वीरFuel Price Update: क्या बढ़ने वाले हैं पेट्रोल-डीजल के दाम? RBI गवर्नर के बयान से बढ़ी चिंताबढ़िया ग्रोथ के बाद Max Financial पर बुलिश हुए ब्रोकरेज, दिए ₹1,980 तक के टारगेट

BSE की डेरिवेटिव यात्रा में अवरोध

Advertisement

कई बड़े ब्रोकर अपने-अपने प्लेटफॉर्म पर अभी तक बीएसई डेरिवेटिव की पेशकश नहीं कर पाए हैं

Last Updated- July 21, 2023 | 9:45 PM IST
BSE Sensex

डेरिवेटिव बाजार को भेदने बीएसई की कोशिश अभी तक बहुत ज्यादा कामयाब नहीं हो पाई है, हालांकि उसकी शुरुआत शानदार रही थी। एशिया का सबसे पुराना एक्सचेंज ब्रोकरेज फर्मों से प्रतिरोध का सामना कर रहा है और करीब 10 बड़ी ब्रोकरेज फर्मों ने अभी तक अपने-अपने प्लेटफॉर्म पर दोबारा पेश सेंसेक्स व बैंकेक्स डेरिवेटिव की पेशकश नहीं कर पाए हैं।

कई ब्रोकरों ने कहा कि उनके यहां बैक एंड पर काम चल रहा है ताकि ऐप व वेबसाइट पर बीएसई डेरिवेटिव उपलब्ध हो सके। कुछ ने कहा, वॉल्यूम हालांकि जोर पकड़ रहा है लेकिन यह अभी भी बड़े प्रतिस्पर्धी एनएसई का मामूली है, जो डेरिवेटिव ट्रेडिंग का तरजीही ठिकाना है। कुछ ही ब्रोकरों ने बीएसई डेरिवेटिव की उनके प्लेटफॉर्म पर अनुमति जैसे मसले पर बिजनेस स्टैंडर्ड के औपचारिक सवालों का जवाब दिया।

सैमको सिक्योरिटीज के कार्यकारी निदेशक व उपाध्यक्ष निवेश शर्मा ने कहा, हम इस पर काम कर रहे हैं। हमारा फ्रंट व बैक ऑफिस ऐसी योजनाओं के लिए नहीं है और हम अपने आंतरिक ऐप को व्यवस्थित कर रहे हैं। नकदी में तेजी बेहतर रहेगी ताकि क्लाइंटों के पास अपनी पोजीशन बेचने का मौका हो। अन्यथा ब्रोकरों के लिए भी जोखिम भरा होगा।

सेंसेक्स व बैंकेक्स डेरिवेटिव 15 मई को बीएसई ने दोबारा पेश किया था, जिसका लॉट साइज छोटा था और साप्ताहिक एक्सपायरी हर शुक्रवार को होती है ताकि एनएसई के एकाधिकार को उच्च कारोबार वाले ऐसे सेगमेंट में चुनौती दी जा सके। ब्रोकिंग प्लेटफॉर्म फायर्स के सह-संस्थापक व सीईओ तेजस खोड़े ने कहा, विभिन्न चुनौतियों में से एक ट्रेडरों व निवेशकों के बीच कम जागरूकता और भागीदारी है क्योंकि ज्यादातर एनएसई पर ट्रेड को प्राथमिकता देते हैं, जिसका डेरिवेटिव सेगमेंट में वर्चस्व है और वॉल्यूम में भी।

Also read: Reliance Jio Q1 result: नेट प्रॉफिट 12% बढ़कर 4,863 करोड़ रुपये, राजस्व 9.9% बढ़ा

बीएसई विभिन्न बाजार भागीदारों और अल्गो-ट्रेडिंग समुदाय को अपने डेरिवेटिव में भागीदारी के लिए प्रोत्साहित कर रहा है। साथ ही वह डेटा वेंडरों को सेंसेक्स व बैंकेक्स डेरिवेटिव के लाइव प्राइस और चार्ट की पेशकश के लिए जोड़ रहा है ताकि यह ब्रोकर के टर्मिनल पर उपलब्ध हो और उनकी योजनाओं के तेज गति से अपनाने में सुविधा मिल सके। इस बारे में जानकारी के लिए बीएसई को भेजी गई प्रश्नावली का जवाब नहीं मिला।

खोड़े ने कहा, हम अपने तकनीकी साझेदारों के साथ सहयोग कर रहे हैं ताकि हमारे सिस्टम का दोनों एक्सचेंजों के क्लियरिंग कॉरपोरेशन के साथ अबाध तरीके से एकीकरण सुनिश्चित हो सके। हम अपनी प्रक्रियाओं की जांच व सत्यापन भी कर रहे हैं ताकि नियामकीय मानकों व दिशानिर्देशों का अनुपालन सुनिश्चित हो।

जुलाई में अब तक बीएसई डेरिवेटिव का रोजाना औसत कारोबार 2.33 लाख करोड़ रुपये रहा है, जो पिछले महीने के रोजाना औसत कारोबार में दोगुने से ज्यादा उछाल दर्शाता है। इसकी तुलना में एनएसई का रोजाना औसत कारोबार जुलाई में 324 लाख करोड़ रुपये रहा। कुछ ब्रोकरों का मानना है कि बीएसई की योजनाओं में नकदी तभी बढ़ेगी बड़ी कंपनियां अपने ब्रोकरों को इसकी पेशकश शुरू करेंगी।

शेयरखान बाय बीएनपी पारिबा के चीफ बिजनेस अफसर परमिंदर वर्मा ने कहा, अभी नकदी में अवरोध कुछ निश्चित ट्रेडिंग रणनीति का इस्तेमाल सीमित कर देता है। हालांकि स्थिति तब काफी सुधरेगी जब बीएसई ऑप्शन की पेशकश सभी अग्रणी ब्रोकों के ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म पर होगी और निवेशकों के बीच बढ़ती जागरूकता से भी लाभ मिलेगा। हम कारोबारी मौके को लेकर काफी उत्साहित हैं और अपने ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म पर बीएसई के ऑप्शन की ट्रेडिंग की सुविदा उपलब्ध कराने के लिए काम कर रहे हैं। बीएसई डेरिवेटिव सेगमेंट को आगामी महीनों में नियामकीय प्रोत्साहन भी मिल सकता है।

Also read: RIL Q1 results: रिलायंस का नेट प्रॉफिट 11 फीसदी घटकर 16,011 करोड़ रुपये पर पहुंचा

जून में बाजार नियामक सेबी ने परिपत्र जारी कर सभी स्टॉक ब्रोकरों को ट्रेडिंग प्रेफरेंस की पेशकश अनिवार्य कर दिया था। यह परिपत्र 1 अगस्त से प्रभावी होगा। नियामक ने अनुपालन के लिए ब्रोकरों को तीन महीने का समय दिया है।

अभी क्लाइंटों को अलग से ऑथराइजेशन देना होता है अगर वह दूसरे स्टॉक एक्सचेंजों पर ट्रेड करना चाहता है। आने वाले समय में नए क्लाइंटों को जोड़ते समय ब्रोकिंग फर्मों को उन्हें सभी सक्रिय स्टॉक एक्सचेंजों पर पंजीकृत करना होगा, लेकिन इसके लिए उन्हें उनका ट्रेडिंग प्रेफरेंस हासिल करना होगा। साथ ही उन्हें मौजूदा व नए क्लाइंटों को सभी स्टॉक एक्सचेंजों तक पहुंच मुहैया करना होगा।

साइबर सुरक्षा के जोखिम व तकनीकी जोखिम को कम करने के लिएनियामक कई ट्रेडिंग गंतव्य पर जोर दे रहा है। पिछले महीने एनएसई ने बैंक निफ्टी डेरिवेटिव की एक्सपायरी गुरुवार से शुक्रवार करने के फैसले से हाथ पीछे खींच लिया क्योंकि यह बीएसई की डेरिवेटिव एक्सपायरी से टकरा गया था।

Advertisement
First Published - July 21, 2023 | 9:45 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement