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मौद्रिक नीति से निराश शेयर बाजार पहुंचा 8,700 अंकों पर

Last Updated- December 08, 2022 | 1:07 AM IST

दलाल स्ट्रीट के लिए शुक्रवार का दिन काफी भारी गुजरा जब सेंसेक्स में करीब 1,100 अंकों की गिरावट दर्ज हुई और सेंसेक्स तीन साल के न्यूनतम स्तर 8,701 अंकों तक जा पहुंचा।


निवेशकों को आज 3 लाख करोड़ रुपये का चूना लगा और यह शुक्रवार ‘काला शुक्रवार’ साबित हुआ।शेयर बाजार के इतिहास में आज की गिरावट अब तक की दूसरी सबसे बड़ी गिरावट रही। इससे पहले इस साल 21 जनवरी को सेंसेक्स में 1,408 अंकों की गिरावट हुई थी।

वित्त मंत्री पी चिदंबरम की ओर से बाजार को प्रोत्साहित करने की कोशिशों के बावजूद बाजार संभल नहीं पाया। लगातार तीन दिनों की गिरावट से सेंसेक्स 1,982 अंक लुढ़क चुका है। गौरतलब है कि वित्त मंत्री ने निवेशकों को सलाह दी थी कि वे अफरा-तफरी में बिकवाली न करें, लेकिन निवेशकों ने उनके बयान पर ध्यान नहीं दिया।

नैशनल स्टॉक एक्सचेंज के 50 शेयरों वाले निफ्टी ने भी 359.15 अंक यानी 12. 20 फीसदी का गोता लगाया और यह 2,584 के स्तर पर बंद हुआ।आरबीआई की मौद्रिक नीति की समीक्षा में मुख्य दरों को अनछुआ छोड़ने के बावजूद बैंकों ने ऐसी कोई प्रतिक्रिया जाहिर नहीं की कि वे ऋण दरों में कटौती करेंगे।

जानकारों के अनुसार, शेयर बाजार पर इसका भी नकारात्मक असर हुआ। घरेलू शेयर ब्रोकरों का कहना है कि आरबीआई ने मौद्रिक नीति की मध्यावधि समीक्षा में प्रमुख दरों को अपरिवर्तित रखकर उन्हें निराश किया है। ब्रिटेन और अमेरिका की मंदी के और गहराने की खबरों के बीच वैश्विक बाजारों विशेषकर पूर्वी एशियाई देशों में आज सुबह बिकवाली के जोर पकड़ने का भी घरेलू शेयर बाजारों पर असर हुआ।

यूनिटेक के मामले में यह गिरावट सबसे अधिक साफ थी। इसके भाव में आधे से भी ज्यादा की कमी हुई जबकि रियल्टी क्षेत्र ने बाजार पूंजीकरण के लिहाज से अपनी एक तिहाई संपत्ति गंवा दी। तेल एवं गैस, बैंकिंग एवं धातु के शेयर भी बहुत पीछे नहीं रहे और उनके भावों में भी 12 से 15 फीसदी की गिरावट दर्ज हुई।

इसके अलावा सरकारी उपक्रम, वाहन और बिजली खंड में भी 10 फीसदी से ज्यादा की गिरावट हुई। तीस शेयरों वाले सेंसेक्स में एक भी शेयर ऐसा नहीं रहा जिसने बढ़त दर्ज की। हालांकि बड़े पूंजीकरण वाली सिर्फ एक कंपनी कंटेनर कारपोरेशन के ही शेयरों में 45 पैसे की बढ़त दर्ज की गई।

ब्रिटेन के वित्त मंत्री एलिस्टेयर डार्लिंग ने कहा है कि जुलाई से सितंबर की तिमाही के दौरान सकल घरेलू उत्पाद में 0. 5 फीसदी की गिरावट से संकेत मिलता है कि ब्रिटेन मंदी के करीब है। यह आंकड़ा तब आया है जब आईएमएफ ने कहा कि अमेरिकी अर्थव्यवस्था 2008 की दूसरी छमाही से 2009 की पहली छमाही के बीच मंदी की चपेट में रहेगी।

भारतीय रिजर्व बैंक ने भी चालू वित्त वर्ष के अपने आर्थिक विकास अनुमान को घटाकर 7.5 से 8 फीसदी कर दिया है। आर्थिक मंदी के भय ने विश्व भर के शेयर बाजारों को प्रभावित किया है। अमेरिकी डाओ फ्यूचर भी मंदी की आशंका से 550 अंक गिरा है।

दक्षिण कोरिया का कोस्पी 10.57 फीसदी, निक्केई 9.60 फीसदी, हैंगसेंग 8.38 फीसदी, स्ट्रेट टाइम्स 8.33 फीसदी और ताइवान का सूचकांक 3.19 फीसदी गिरा। सुबह के कारोबार के दौरान जर्मनी, फ्रांस और लंदन के बाजार भी क्रमश: 9.24, 9.55 और 8.55 फीसदी गिरे।

First Published - October 24, 2008 | 9:40 PM IST

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