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सेबी की पूर्व चेयरपर्सन माधबी बुच को बड़ी राहत, बंबई हाई कोर्ट ने FIR दर्ज करने के आदेश पर लगाई रोक

शिकायतकर्ता के अनुसार, SEBI अधिकारियों ने एक ऐसी कंपनी को लिस्ट करने की इजाजत दी, जो नियामक मानकों को पूरा करने में विफल रही।

Last Updated- March 04, 2025 | 1:28 PM IST
Madhabi Puri Butch

बंबई हाई कोर्ट ने शेयर बाजार धोखाधड़ी मामले में सेबी की पूर्व चेयरपर्सन माधबी पुरी बुच (Madhabi Puri Butch) और अन्य के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के स्पेशल कोर्ट के आदेश पर मंगलवार को चार हफ्ते की रोक लगा दी।

जस्टिस शिवकुमार डिगे की सिंगल बेंच ने कहा कि 1 मार्च का स्पेशल कोर्ट का आदेश विवरण में गए बिना और आरोपी को कोई विशिष्ट भूमिका बताए बिना मैकेनिकली पारित किया गया था।

हाई कोर्ट ने कहा, “इसलिए, आदेश पर अगली तारीख तक रोक लगाई जाती है। मामले में शिकायतकर्ता (सपन श्रीवास्तव) को याचिकाओं के जवाब में अपना हलफनामा दाखिल करने के लिए चार सप्ताह का समय दिया जाता है।”

बंबई हाई कोर्ट का यह निर्णय बुच, सेबी के तीन वर्तमान पूर्णकालिक निदेशकों – अश्विनी भाटिया, अनंत नारायण जी और कमलेश चंद्र वार्ष्णेय तथा बीएसई के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) राममूर्ति और इसके पूर्व चेयरमैन तथा जनहित निदेशक प्रमोद अग्रवाल द्वारा दायर याचिकाओं पर आया।

याचिकाओं में स्पेशल कोर्ट की तरफ से पारित आदेश को रद्द करने की मांग की गई थी। इसमें भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) को 1994 में बीएसई में एक कंपनी को लिस्ट करते समय धोखाधड़ी के कुछ आरोपों से संबंधित उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया गया था।

माधबी बुच पर क्या आरोप हैं?

शिकायतकर्ता के अनुसार, SEBI अधिकारियों ने एक ऐसी कंपनी को लिस्ट करने की इजाजत दी, जो नियामक मानकों को पूरा करने में विफल रही। इससे बाजार में हेरफेर हुआ और निवेशकों को नुकसान हुआ। इसके अलावा, यह आरोप लगाया गया कि SEBI और कॉर्पोरेट संस्थाओं के बीच मिलीभगत थी, जिसके कारण इनसाइडर ट्रेडिंग हुआ और लिस्टिंग के बाद पैसे का गबन किया गया।

शिकायतकर्ता ने यह भी दावा किया कि उन्होंने कई बार पुलिस स्टेशन और संबंधित नियामक निकायों से संपर्क किया, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई। अदालत ने कहा कि वह इस जांच की निगरानी करेगी और साथ ही 30 दिनों के भीतर जांच रिपोर्ट मांगी है।

First Published - March 4, 2025 | 12:34 PM IST

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