facebookmetapixel
Advertisement
JK Cement के शेयर पर ब्रोकरेज बुलिश, बढ़ती कीमतें और मजबूत डिमांड से 32% तक अपसाइड का अनुमानStock Market Today: US-Iran तनाव से हिला बाजार! GIFT Nifty गिरा 100 अंक, एशिया में रिकॉर्ड तेजीमुनाफा घटा लेकिन ONGC ने निवेशकों को किया खुश, डिविडेंड का ऐलान, चेक करें डिटेल्सUS-Iran War: ट्रंप का मीडिया पर बड़ा हमला, कहा- ‘ईरान सरेंडर करे तब भी अमेरिका की जीत नहीं दिखाएंगे’Stocks To Watch Today: Coal India से Sun Pharma तक, आज इन शेयरों में रह सकती है तगड़ी हलचलNHPC ने 15 साल के बॉन्ड से जुटाए ₹2,000 करोड़, 7.67% ब्याज दर पर मिला जोरदार रिस्पॉन्सआय सर्वेक्षण में लोगों की झिझक बड़ी चुनौती, विदेशी मॉडल्स से सीखने की तैयारी में भारत Aviva Life का बड़ा लक्ष्य: 5 साल में न्यू बिजनेस प्रीमियम ₹1,000 करोड़ पहुंचाने की तैयारीसुरक्षा और नॉन-पार्टिसिपेटिंग पॉलिसियों से जीवन बीमा कंपनियों का VNB बढ़ा, LIC सबसे आगेसरकार ने बड़े MFIs को दी राहत, क्रेडिट गारंटी सीमा ₹300 करोड़ से बढ़ाकर ₹1,000 करोड़ की

रिसर्च में हुआ खुलासा, छोटे तारों की परिक्रमा करने वाले ग्रहों में हो सकता है जीवन

Advertisement
Last Updated- May 30, 2023 | 4:37 PM IST

समूची आकाशगंगा (Galaxy) में तारों की परिक्रमा करने वाले एक तिहाई ग्रहों पर तरल अवस्था में पानी और जीवन होने की संभावना है। हाल में किए गए टेलीस्कोपीय आंकड़ों पर आधारित अध्ययन से यह जानकारी मिली। हमारी आकाशगंगा में जो सबसे आम तारे हैं वे सामान्यत: सूर्य के आकार की तुलना में छोटे और ठंडे होते हैं।

अरबों ग्रह इन आम छोटे तारों की परिक्रमा करते हैं। यह विश्लेषण ‘प्रोसीडिंग्स ऑफ द नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेज’ में प्रकाशित हुआ है जो दर्शाता है कि इन छोटे तारों के चक्कर काटने वाले दो तिहाई ग्रह चरम ज्वारीय स्थिति से प्रभावित हो सकते हैं। हालांकि एक तिहाई ग्रहों (आकाशगंगा के लाखों ग्रहों) पर जीवन की संभावनाएं हो सकती हैं।

अमेरिका में फ्लोरिडा विश्वविद्यालय (यूएफ) में डॉक्टरेट की छात्रा शीला सगीर ने कहा, ‘मुझे लगता है कि यह परिणाम वास्तव में अगले दशक के अन्य तारों के ग्रहों के अनुसंधान की दिशा में महत्वपूर्ण साबित होगा।’ सगीर ने एक बयान में कहा, ‘ये तारे उन छोटे ग्रहों की खोज का उत्कृष्ट जरिया हो सकते हैं जहां पानी तरल अवस्था में मौजूद हो सकता है और इसलिए संभवत: उस ग्रह पर जीवन की संभावना हो सकती है।’

सगीर और यूएफ की खगोल प्रोफेसर सारा बलार्ड ने ‘एम ड्वार्फ स्टार्स’ के आसपास के 150 से अधिक उन ग्रहों की कक्षीय विकेन्द्रता का अध्ययन किया जो बृहस्पति के आकार के बराबर हैं। किसी खगोलीय पिंड की कक्षीय विकेन्द्रता उसकी कक्षा के एक पूर्ण वृत्त से विचलन का माप होता है। यह कक्षा जितनी अधिक अंडाकार होती है, ग्रह उतने अधिक विकेंद्रित होते हैं।

ग्रह अपनी अनियमित कक्षा में बदलते गुरुत्वाकर्षण बलों से फैलते और अपना स्वरूप बदलते रहते हैं और घर्षण से ऊष्मा उत्पन्न होती है। ऐसे में चरमोत्कर्ष पर पहुंचने से ग्रह अत्यंत गर्म हो सकता है और उस पर पानी होने की हर संभावना खत्म हो सकती है। अध्ययन के लिए अनुसंधानकर्ताओं ने नासा के केपलर टेलीस्कोप से प्राप्त आंकड़े का इस्तेमाल किया जो अन्य तारों के बारे में सूचना एकत्र करता है।

Advertisement
First Published - May 30, 2023 | 4:37 PM IST (बिजनेस स्टैंडर्ड के स्टाफ ने इस रिपोर्ट की हेडलाइन और फोटो ही बदली है, बाकी खबर एक साझा समाचार स्रोत से बिना किसी बदलाव के प्रकाशित हुई है।)

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement