राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में काम कर रही ऑटोमोबाइल कंपनियों के लिए जल्द ही इलेक्ट्रिक वाहनों की अनिवार्य बिक्री लक्ष्य प्रणाली लागू की जा सकती है। वायु प्रदूषण पर नियंत्रण के उद्देश्य से इस दिशा में गंभीर विचार किया जा रहा है। प्रस्ताव के अनुसार प्रत्येक वित्तीय वर्ष के लिए ईवी बिक्री का एक निश्चित न्यूनतम प्रतिशत तय किया जाएगा, जिसे हर साल बढ़ाया जाएगा। संक्रमण अवधि पूरी होने के बाद स्थिति ऐसी बनाई जा सकती है कि क्षेत्र की डीलरशिप केवल इलेक्ट्रिक वाहन ही बेचें।
इस विषय पर Commission for Air Quality Management की विशेषज्ञ समिति ने शुक्रवार को वाहन निर्माताओं के साथ बैठक की। समिति ने संकेत दिया कि वह एनसीआर और आसपास के क्षेत्रों में संचालित दोपहिया और चारपहिया कंपनियों के लिए अनिवार्य वार्षिक ईवी बिक्री लक्ष्य तय करने की व्यवहारिकता का अध्ययन कर रही है।
दिसंबर 2025 में गठित 15 सदस्यीय पैनल का मकसद दिल्ली एनसीआर में वाहनों से होने वाले उत्सर्जन को कम करने के लिए व्यापक और दीर्घकालिक रणनीति तैयार करना है। बैठक के दौरान कंपनियों को बताया गया कि यदि प्रस्ताव को अधिसूचना के रूप में लागू किया जाता है तो ईवी बिक्री लक्ष्य हर साल क्रमिक रूप से बढ़ेंगे, जिससे उद्योग को चरणबद्ध तरीके से पूरी तरह इलेक्ट्रिक वाहनों की ओर स्थानांतरित किया जा सके।
Business Standard को मिली जानकारी के मुताबिक, यह पहल निर्माताओं को समय के साथ पूर्ण इलेक्ट्रिक बिक्री मॉडल अपनाने के लिए प्रेरित करेगी। हालांकि अंतिम निर्णय से पहले चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर, उत्पादन क्षमता और बाजार की मांग जैसे पहलुओं पर भी विचार किया जाएगा।
राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में बढ़ते वायु प्रदूषण को देखते हुए Commission for Air Quality Management अब परिवहन क्षेत्र में सख्त कदम उठाने की तैयारी में है। समिति का मानना है कि दिल्ली एनसीआर में प्रदूषण के प्रमुख स्रोतों में वाहनों से निकलने वाला धुआं अहम भूमिका निभाता है। इसी कारण इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री को अनिवार्य लक्ष्य से जोड़ने का प्रस्ताव व्यापक कार्ययोजना का हिस्सा माना जा रहा है।
विशेषज्ञ पैनल को स्वच्छ गतिशीलता से जुड़ी मौजूदा नीतियों की समीक्षा की जिम्मेदारी दी गई है। इसमें भारत स्टेज उत्सर्जन मानक, ईंधन दक्षता नियम और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी से जुड़े कार्यक्रम शामिल हैं। समिति इन सभी पहलुओं का आकलन कर एक बहुस्तरीय और व्यवहारिक रणनीति तैयार कर रही है, जिसे तय समयसीमा के भीतर लागू किया जा सके।
दिल्ली एनसीआर में बढ़ते वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) एक बड़ा कदम उठाने की तैयारी में है। आयोग क्षेत्र में इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री को बढ़ावा देने के लिए वार्षिक अनिवार्य लक्ष्य तय करने पर विचार कर रहा है। यह प्रस्ताव उस व्यापक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है, जिसका उद्देश्य परिवहन क्षेत्र से होने वाले उत्सर्जन में ठोस और समयबद्ध कमी लाना है।
क्यों जरूरी हुआ यह कदम
दिल्ली, गुरुग्राम, नोएडा, गाजियाबाद और आसपास के इलाकों में वाहनों से निकलने वाला धुआं प्रदूषण का प्रमुख स्रोत है। डीजल और पेट्रोल आधारित वाहनों की संख्या लगातार बढ़ने से हवा की गुणवत्ता पर गंभीर असर पड़ रहा है। ऐसे में आयोग का मानना है कि यदि नए वाहनों की बिक्री को चरणबद्ध तरीके से पूरी तरह इलेक्ट्रिक किया जाए, तो प्रदूषण में उल्लेखनीय कमी लाई जा सकती है।
आयोग ने साफ संकेत दिए हैं कि भविष्य की नीति का रुख नए वाहनों की पूर्ण विद्युतीकरण की दिशा में रहेगा। हालांकि यह बदलाव अचानक नहीं बल्कि चरणबद्ध और संतुलित तरीके से लागू किया जाएगा, ताकि ऑटो उद्योग को अपनी उत्पादन योजनाओं और डीलरशिप नेटवर्क में आवश्यक बदलाव करने का समय मिल सके।
मौजूदा नीतियों की समीक्षा
आयोग को यह जिम्मेदारी दी गई है कि वह स्वच्छ गतिशीलता से जुड़ी वर्तमान नीतियों की समीक्षा करे। इसमें भारत स्टेज उत्सर्जन मानक, ईंधन दक्षता नियम और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी से संबंधित प्रोत्साहन योजनाएं शामिल हैं। उद्देश्य यह है कि सभी नीतियों को समन्वित कर एक व्यवहारिक और बहुआयामी कार्ययोजना तैयार की जाए, जिसे निर्धारित समय सीमा में लागू किया जा सके।
ऑटो कंपनियों की चिंताएं
हाल ही में हुई बैठक में वाहन निर्माताओं ने कई व्यावहारिक मुद्दों को उठाया। उद्योग जगत के प्रतिनिधियों ने कहा कि चार्जिंग स्टेशन का नेटवर्क अभी पर्याप्त नहीं है और बिजली ग्रिड की क्षमता को भी मजबूत करना होगा। बैटरी और अन्य महत्वपूर्ण पुर्जों की आपूर्ति शृंखला को लेकर भी अनिश्चितताएं जताई गईं।
इसके अलावा उपभोक्ताओं की वहन क्षमता एक अहम विषय रहा। इलेक्ट्रिक वाहन अभी भी पारंपरिक वाहनों की तुलना में महंगे हैं, जिससे आम खरीदारों पर आर्थिक दबाव बढ़ सकता है। कुछ कंपनियों ने यह भी सुझाव दिया कि क्षेत्रीय नियमों को केंद्र सरकार की नीतियों और प्रोत्साहन योजनाओं के साथ समन्वित किया जाना चाहिए, ताकि अलग अलग स्तर पर नियमों में टकराव न हो।
आगे की प्रक्रिया
आयोग आने वाले सप्ताहों में अपनी सिफारिशों को अंतिम रूप देकर आधिकारिक तौर पर अधिसूचित करेगा। यदि अनिवार्य लक्ष्य तय किए जाते हैं, तो उनके पालन के लिए स्पष्ट समयसीमा और निगरानी तंत्र भी घोषित किया जाएगा।
यदि यह योजना लागू होती है, तो राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र देश के उन प्रमुख ऑटो बाजारों में शामिल हो जाएगा, जहां नए वाहनों की बिक्री को समयबद्ध तरीके से पूरी तरह इलेक्ट्रिक बनाने की दिशा में ठोस कदम उठाए जाएंगे। इसे क्षेत्र में वाहनों से होने वाले प्रदूषण पर लगाम लगाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।
इस प्रस्ताव पर अंतिम फैसला आने वाले समय में स्पष्ट करेगा कि एनसीआर की सड़कों पर इलेक्ट्रिक वाहनों की संख्या कितनी तेजी से बढ़ेगी और प्रदूषण नियंत्रण के प्रयास कितने प्रभावी साबित होंगे।