facebookmetapixel
Advertisement
तेल, रुपये और यील्ड का दबाव: पश्चिम एशिया संकट से बढ़ी अस्थिरता, लंबी अनिश्चितता के संकेतवैश्विक चुनातियों के बावजूद भारतीय ऑफिस मार्केट ने पकड़ी रफ्तार, पहली तिमाही में 15% इजाफाJio IPO: DRHP दाखिल करने की तैयारी तेज, OFS के जरिए 2.5% हिस्सेदारी बिकने की संभावनाडेटा सेंटर कारोबार में अदाणी का बड़ा दांव, Meta और Google से बातचीतभारत में माइक्रो ड्रामा बाजार का तेजी से विस्तार, 2030 तक 4.5 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमानआध्यात्मिक पर्यटन में भारत सबसे आगे, एशिया में भारतीय यात्रियों की रुचि सबसे अधिकबांग्लादेश: चुनौतियों के बीच आजादी का जश्न, अर्थव्यवस्था और महंगाई बनी बड़ी चुनौतीपश्चिम एशिया संकट के बीच भारत सतर्क, रणनीतिक तेल भंडार विस्तार प्रक्रिया तेजGST कटौती से बढ़ी मांग, ऑटो और ट्रैक्टर बिक्री में उछाल: सीतारमणसरकार का बड़ा फैसला: पीएनजी नेटवर्क वाले इलाकों में नहीं मिलेगा एलपीजी सिलिंडर

गुरु बढ़े, शिष्य घटे: शिक्षा व्यवस्था में बदला परिदृश्य, शिक्षक 1 करोड़ पार, मगर छात्रों की संख्या 2 करोड़ घटी

Advertisement

शिक्षकों की संख्या बढ़ी और निजी स्कूलों का हिस्सा मजबूत हुआ, लेकिन नामांकन घटने और कमजोर छात्र-शिक्षक अनुपात ने शिक्षा प्रणाली की चुनौतियां उजागर

Last Updated- September 05, 2025 | 11:15 PM IST
CBSE Board Exam: 10th, 12th board exams begin, more than 42 lakh students will appear
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

हर साल 5 सितंबर को मनाया जाने वाला शिक्षक दिवस केवल महान गुरुओं को याद करने और मौजूदा बेहतरीन अध्यापकों का सम्मान करने का ही दिन नहीं है, यह देश में स्कूलों, शिक्षा और इस पूरी व्यवस्था को चलाने वालों की स्थिति पर विचार करने का भी मौका होता है। ताजा आंकड़े 3 स्पष्ट पैटर्न दिखाते हैं- निजी स्कूलों में शिक्षकों की अनुपातिक हिस्सेदारी बढ़ रही है, लेकिन आधे से अधिक अभी भी सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों में कार्यरत हैं। स्कूलों में छात्रों का नामांकन लगातार गिर रहा है। हालांकि हाल के वर्षों में छात्र-शिक्षक अनुपात में सुधार हुआ है, फिर भी यह अधिकांश वैश्विक मानकों से पीछे है।

ताजा आंकड़ों के मुताबिक वित्त वर्ष 2025 में 50.9 प्रतिशत शिक्षक सरकारी क्षेत्र में कार्यरत हैं। इसके बाद दूसरे नंबर पर निजी क्षेत्र आता है, जहां लगभग 40 प्रतिशत शिक्षक काम कर रहे हैं। जबकि शिक्षकों की कुल संख्या वित्त वर्ष 2020 में 96.9 लाख से बढ़कर वित्त वर्ष 2025 में 1.01 करोड़ हो गई, लेकिन यह वृद्धि ज्यादातर निजी स्कूलों में दर्ज की गई है।

शिक्षक बढ़े लेकिन छात्र घटे

स्कूली शिक्षा व्यवस्था में शिक्षण कार्यबल का तो विस्तार हुआ है, लेकिन छात्र आधार घटा है। स्कूलों में छात्रों का नामांकन 2019-20 में 26.5 करोड़ से गिरकर 2024-25 में 24.7 करोड़ दर्ज किया गया। यानी दाखिला लेने वाले छात्रों की संख्या में लगभग 1.8 करोड़ की गिरावट आई है। कोविड महामारी के दौरान 2020-21 में छात्रों का नामांकन बहुत तेजी से गिरा था, लेकिन हालात सुधरने के बाद भी स्कूलों में छात्रों की संख्या नहीं बढ़ी। इसके उलट पिछले तीन वर्षों से लगातार नामांकन में गिरावट देखी जा रही है।

छात्र-शिक्षक अनुपात अधिक

छात्रों की संख्या लगातार कम होने बावजूद 2022 में देश में छात्र-शिक्षक अनुपात अधिकांश विकसित और घनी आबादी वाले देशों की तुलना में ज्यादा दर्ज किया गया था। देश का प्राथमिक स्तर पर छात्र और शिक्षकों का अनुपात 23 था।

Advertisement
First Published - September 5, 2025 | 11:02 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement