facebookmetapixel
Advertisement
खरीफ बुआई पर मॉनसून की मार, सोयाबीन का रकबा 65% घटा; खाद्य तेल के दाम बढ़ने का खतराITR Deadline: सिर्फ 31 तारीख ही नहीं, जुलाई के महीने में टैक्सपेयर्स के लिए जरूरी हैं ये तारीखें भीAxis MF ने लॉन्च किया ‘Axis Account Plus’, कंपनियां अब खाली पड़े पैसे पर भी कमा सकेंगी रिटर्नबाहरी खतरों के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत, लेकिन हर जोखिम पर रहेगी पैनी नजर: संजय मल्होत्राRBI FSR 2026: बाहरी झटकों के बावजूद घरेलू फाइनैंशियल सिस्टम मजबूत, AI आधारित साइबर हमले सबसे बड़ा खतराDelhi EV Policy: आपकी पेट्रोल-डीजल, CNG कार नहीं चलेगी? जानिए ऐसे 9 सवालों के जवाबExplainer: जमीन बेचने से हुई कमाई? जानें ‘लैंड सेल’ को लेकर क्या हैं टैक्स के नियम, नहीं तो होगी मुश्किलNoel Tata resign: एक हफ्ते में दूसरा बड़ा कदम, ट्रेंट के बाद वोल्टास को भी अलविदा कहेंगे नोएल टाटाJio IPO के पीछे का सीक्रेट मिशन! मुकेश अंबानी का ‘Project Jupiter’ क्या था?ITR Status Check: ITR फाइल के बाद खुद अपना इनकम टैक्स रिटर्न स्टेटस करें ट्रैक, जानें स्टेप-बाय-स्टेप आसान तरीका

सुप्रीम कोर्ट के ब्रह्मास्त्र से अर्जुन विजयी

Advertisement
Last Updated- December 05, 2022 | 9:13 PM IST

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को आईआईटी, आईआईएम और अन्य केंद्रीय शैक्षणिक संस्थानों में अन्य पिछड़ा वर्ग को 27 प्रतिशत आरक्षण देने वाले संविधान संशोधन को बतौर कानून बरकरार रखा।


इसप्रकार आरक्षण पर अर्जुन की मुहिम को आखिरकार विजयश्री मिल ही गई। हालांकि सर्वोच्च संस्था ने आरक्षण की इस नई व्यवस्था का फायदा उठाने से ‘क्रीमीलेयर’ को जरूर वंचित कर दिया।


कोर्ट की पांच सदस्यों की संविधान पीठ ने एक सर्वसम्मत फैसले में आरक्षण केन्द्रीय शैक्षणिक संस्थान (दाखिले में आरक्षण) कानून 2006 को मंजूरी दे दी। मुख्य न्यायाधीश के.जी. बालाकृष्णन की अध्यक्षता वाली न्यायमूर्ति अरिजित पसायत, सी.के. ठक्कर, आर.वी. रवीन्द्रन और दलवीर भंडारी की पीठ ने यह व्यवस्था दी कि यह कानून संविधान के मूल ढांचे का उल्लंघन नहीं करता।


कोर्ट ने यह फैसला आरक्षण विरोधी कार्यकर्ताओं की याचिकाओं पर सुनाया। इन याचिकाओं में कहा गया था कि पिछड़े वर्गों की पहचान के लिए जाति को पूरी तरह से आधार नहीं माना जा सकता। इसी के मद्देनजर क्रीमी लेयर को आरक्षण नीति में शामिल किए जाने का भी विरोध किया गया था।


बहरहाल, कोर्ट के इस फैसले के बाद अब आरक्षण नीति को 2008-09 शैक्षणिक सत्र में लागू किया जा सकेगा। कोर्ट ने कहा कि संविधान संशोधन (93वां संशोधन) कानून, जिसके तहत सरकार ने सरकारी सहायता प्राप्त केंद्रीय संस्थानों में 27 प्रतिशत आरक्षण देने वाला कानून तैयार किया था, संविधान के मूल ढांचे का उल्लंघन नहीं करता।


पीठ के सभी न्यायाधीशों ने 27 प्रतिशत आरक्षण के कार्यान्वयन की समय-समय पर समीक्षा करने का समर्थन किया। कोर्ट ने कहा कि ओबीसी पहचान का अधिकार केन्द्र को देना कानूनसम्मत है।


कोर्ट ने कहा कि 8 सितंबर 1993 के सरकारी ज्ञापन के अनुरूप नौकरियों के लिए ओबीसी में क्रीमीलेयर की पहचान के लिए निर्धारित मापदंड, सामाजिक और शैक्षणिक पिछड़े वर्गों की पहचान के लिए लागू होंगे।


कौन आता है क्रीमीलेयर में?


सुप्रीम कोर्ट ने पहली बार 1992 में क्रीमीलेयर शब्द का इस्तेमाल किया था। क्रीमीलेयर में राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के न्यायधीशों, यूपीएससी के चेयरमैन समेत राज्य व केंद्र सरकार के ए और बी वर्ग कर्मचारी शामिल हैं। इसके साथ ही, जिनकी आय 2.5 लाख रुपये सालाना है, उन्हें भी क्रीमीलेयर में शामिल किया गया है। क्रीमीलेयर में शामिल लोगों के बच्चों को आरक्षण का लाभ नहीं मिलेगा।


अर्जुन उवाच


सुप्रीम कोर्ट का फैसला ऐतिहासिक। आने वाले शैक्षणिक सत्र से इसे लागू करने के प्रयास किए जाएंगे। ओबीसी को आरक्षण दिए जाने से दूसरे वर्ग के छात्र प्रभावित नहीं होंगे और न ही हितों का कोई टकराव होगा। समस्या इसलिए थी क्योंकि लोग इस मसले को सही तरीके से समझते नहीं हैं।


क्या कहते हैं बाकी महारथी


यह एक ऐतिहासिक फैसला है लेकिन क्रीमी लेयर को बाहर रखे जाने से हम उदास हैं। हम इस मुद्दे को समान विचारों वाली पार्टियों के साथ-साथ यूपीए और मंत्रिमंडल में उठाएंगे।
अंबुमणि रामदॉस, स्वास्थ्य मंत्री


क्रीमी लेयर को कोटे से अलग नहीं रखा जाना चाहिए था।
रामविलास पासवान, केंद्रीय इस्पात और उर्वरक मंत्री


यह एक महत्वपूर्ण फैसला है। अब सभी आरोप और प्रदर्शन भी शांत हो गए हैं।
कांग्रेस


हम फैसले का स्वागत करते हैं। सरकार इसे आगामी शैक्षणिक सत्र से लागू करे। इस फैसले से सामाजिक तौर पर पिछड़े लोगों का उत्थान होगा। ओबीसी से क्रीमी लेयर को बाहर किए जाने का कदम भी अच्छा है।
माकपा


शीर्ष अदालत की यह व्यवस्था आ जाने के बाद सरकार को चाहिए वह तुरंत प्रभाव से इसे लागू कर दे। लेकिन 27 प्रतिशत आरक्षण के साथ संस्थानों में 27 प्रतिशत सीटों में भी बढ़ोतरी की जाए।
भाजपा


कब हुआ था आरक्षण का शंखनाद
मोरारजी देसाई के नेतृत्व वाली जनता पार्टी सरकार के कार्यकाल में 1979 में बिंदेश्वरी प्रसाद मंडल की अध्यक्षता में मंडल कमीशन का गठन किया गया था।


1980 में मंडल कमीशन ने रिपोर्ट पेश किया, जिसमें अ अन्य पिछड़ा वर्ग को सरकारी नौकरी और उच्च शिक्षण संस्थानों में 27 फीसदी आरक्षण देने, साथ ही अनुसूचित जाति-जनजाति को 22.5 फीसदी आरक्षण देने की बात कही थी। 1990 में तत्कालीन प्रधानमंत्री विश्वनाथ प्रताप सिंह ने इसे लागू करने की पहल की, जिसका देशभर में व्यापक विरोध हुआ।


नई व्यवस्था पर क्या कहते हैं केंद्रीय संस्थान


अंतिम सूची शुक्रवार को प्रकाशित करनी थी। नई व्यवस्था के बाद सभी भारतीय प्रबंधन संस्थान अपनी सूची को एक हफ्ते तक टाल सकते हैं। हम एक ही दिन दाखिले की सूची जारी करते हैं।
समीर बरुआ, निदेशक, भारतीय प्रबंधन संस्थान, अहमदाबाद


आरक्षण दिए जाने के सुप्रीम कोर्ट के फैसले को हम चरणबध्द ढंग से लागू करेंगे। जाहिर सी बात है कि हम एक बार में 27 फीसदी आरक्षण लागू नहीं कर सकते हैं। इसे चरणबध्द ढंग से लागू करना होगा।
सुरेंद्र प्रसाद, निदेशक, आईआईटी (दिल्ली)


हम अपनी चयन प्रक्रिया में बदलाव में इस नई व्यवस्था को लागू करने के लिए तैयार हैं। अगर जून से पहले हमें सरकारी आदेश मिल गया तो हम इसी सत्र में थोड़ा-बहुत बदलाव लागू कर सकते हैं।
सुनील छुबेर, सब डीन,अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान


क्यों हो रही है सीटों में बढ़ोतरी की मांग
एक औसत के मुताबिक, देश के शीर्ष शिक्षण संस्थानों में दाखिले के लिए आवेदन करने वाले कुल छात्र-छात्राओं में से महज एक फीसदी ही इनमें दाखिला ले पाते हैं।


कितना हो जाएगा कोटा
इन संस्थानों में ओबीसी को 27 फीसदी आरक्षण दिए जाने के बाद यहां कुल आरक्षण 49.5 फीसदी हो जाएगा।
अनुसूचित जाति को 15 प्रतिशत और अनुसूचित जनजाति को 7.5 प्रतिशत आरक्षण इनमें पहले से ही लागू था। 


किन संस्थानों में होगा कोटा


भारतीय प्रबंधन संस्थान (आईआईएम)
भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी)
भारतीय विज्ञान संस्थान, बेंगलुरु
राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी)
नेशनल इंस्टीटयूट ऑफ टीचर्स टेक्निकल रिसर्च
नेशनल इंस्टीटयूट ऑफ फाउंड्री एंड फोर्ज टेक्नोलॉजी, रांची
इंडियन इंस्टीटयूट ऑफ इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी डिजाइन एंड मैन्युफैक्चरिंग, जबलपुर
स्कूल ऑफ प्लानिंग एंड आर्किटेक्चर, नई दिल्ली
इंडियन स्कूल ऑफ माइन्स, धनबाद
केंद्रीय विश्वविद्यालय
भारतीय कृषि शोध संस्थान, नई दिल्ली
इंडियन वेटनरी रिसर्च संस्थान, इातनगर
सेंट्रल डेयरी रिसर्च इंस्टीटयूट
अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), पीजीआईएमईआर (चंडीगढ़), एनआईएमएचएएनएस (बेंगलुरु) समेत 11 मेडिकल संस्थान
सेंट्रल इंस्टीटयूट ऑफ फिशरीज नॉटिकल एंड इंजीनियरिंग ट्रेनिंग, कोच्चि
भारतीय जनसंचार संस्थान (आईआईएमसी)
सेंट्रल इंस्टीटयूट ऑफ प्लास्टिक इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी
श्री चित्रा तिरुनल इंस्टीटयूट फॉर मेडिकल साइंसेज एंड टेक्नोलॉजी, तिरुवंतपुरम


…और किनमें नहीं होगा


केंद्र सरकार की ओर से सहायता प्राप्त अल्पसंख्यकों के संस्थान
जनजाति इलाकों में स्थापित केंद्रीय शिक्षण संस्थान
होमी भाभा एटोमिक रिचर्स सेंटर, ट्रॉम्बे
इंदिरा गांधी सेंटर फॉर एटोमिक रिसर्च, कलपक्कम
राजा रमन्ना सेंटर फॉर एडवांस टेक्नोलॉजी, इंदौर
इंस्टीटयूट फॉर प्लाजमा रिसर्च, गांधीनगर
वेरिएबल एनर्जी साइक्लोट्रॉन सेंटर, कोलकाता
साहा इंस्टीटयूट ऑफ न्यूक्लियर फिजिक्स, कोलकाता
इंस्टीटयूट ऑफ फिजिक्स, भुवनेश्वर
इंस्टीटयूट ऑफ मैथेमैटिकल साइंसेज, चेन्नई
हरिश्चंद्र रिचर्स इंस्टीटयूट, इलाहाबाद
टाटा मेमोरियल सेंटर, मुंबई
टाटा इंस्टीटयूट ऑफ फंडामेंटल रिचर्स, मुंबई
नॉर्थ इस्टर्न इंदिरा गांधी रीजनल इंस्टीटयूट ऑफ हेल्थ एंड मेडिकल साइंसेज, शिलांग

Advertisement
First Published - April 11, 2008 | 12:52 AM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement