ब्रिटिश-स्वीडिश औषधि निर्माता कंपनी एस्ट्राजेनेका ने मंगलवार को भले ही ब्रिटेन में कोरोनावायरस के संभावित टीके एजेडी1222 का परीक्षण रोकने का निर्णय लिया है लेकिन भारत में टीके का परीक्षण पूर्व निर्धारित तरीके से जारी रहेगा। ब्रिटेन में परीक्षण उस समय रोका गया जब एक प्रतिभागी अनजानी बीमारी से पीडि़त हो गया।
सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (एसआईआई) के प्रवक्ता ने कहा, ‘हम ब्रिटेन के परीक्षण के बारे में ज्यादा कुछ नहीं कह सकते लेकिन उन्हें आगामी समीक्षा तक लंबित रखा गया है और उनके जल्दी दोबारा शुरू होने की आशा है। जहां तक भारतीय परीक्षणों का संबंध है, ये जारी हैं और हमें किसी तरह की दिक्कत नहीं हुई है।’ जानकारी के मुताबिक ब्रिटेन में चिकित्सकीय परीक्षण के तीसरे चरण में एक प्रतिभागी गंभीर विपरीत प्रभावों का शिकार हो गया और उसे अस्पताल में दाखिल कराना पड़ा। कंपनी ने स्वैच्छिक रूप से परीक्षण रोका है और कहा कि वह घटना की समीक्षा कर रही है। किसी भी टीके के परीक्षण में दुष्प्रभावों की आशंका रहती है लेकिन यह घटना इसलिए महत्त्वपूर्ण है क्योंकि यह बीमारी न केवल गंभीर है बल्कि इसके बारे में कुछ पता नहीं चल रहा है। कंपनी यह सुनिश्चित करने का प्रयास कर रही है कि अध्ययन में ज्यादा देरी न हो।
भारत में भी परीक्षण से जुड़े लोगों के मन में कुछ चिंताएं हैं। पश्चिमी भारत में एक परीक्षण स्थल के प्रमुख परीक्षणकर्ता का कहना है कि चूंकि टीका वही है इसलिए आदर्श स्थिति में परीक्षण रोक दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि उन्हें इस विषय में भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) और एसआईआई के बयान की प्रतीक्षा है। उन्होंने बताया कि डेटा ऐंड से टी मॉनिटरिंग कमिटी (डीएसएमसी) भी हालात की समीक्षा करेगा।
वायरोलॉजिस्ट कहते हैं कि टीकों के परीक्षण में अनजान बीमारियों का होना अस्वाभाविक नहीं है। ये बीमारी ऐसे व्यक्ति को भी हो सकती है जिसे असल दवा के बजाय प्लसीबो (प्रायोगिक औषधि) दी गई हो। वरिष्ठ वायरोलॉजिस्ट और वेल्लोर के क्रिश्चियन मेडिकल कॉलेज के पूर्व प्रोफेसर जैकब जॉन ने कहा कि डीएसएमसी द्वारा समीक्षा और विश्लेषण के बाद ही सही स्थिति पता लगेगी। उन्होंने कहा कि अगर बीमार व्यक्ति ऐसा है जिसे प्लसीबो दिया गया हो तो परीक्षण जल्द दोबारा शुरू हो जाएंगे। उन्होंने यह भी कहा कि भारत में परीक्षण रोकने की आवश्यकता
नहीं है क्योंकि यहां स्वतंत्र परीक्षण हो रहे हैं।
ऑक्सफर्ड ऐस्ट्राजेनेका के संभावित टीके को विश्व स्वास्थ्य संगठन ने हाल ही में कोरोनावायरस के टीके का सबसे अग्रणी दावेदार बताया था। दुनिया भर के देशों ने इस टीके की एक अरब से अधिक खुराक पहले ही बुक कर ली हैं। दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में इस टीके का अंतिम चरण का परीक्षण चल रहा है। अमेरिका, दक्षिण अफ्रीका, ब्राजील, भारत, जापान आदि देशों में 50,000 लोगों पर इसके परीक्षण की योजना है। अमेरिका और ब्रिटेन समेत कई जगह लाखों खुराक बुक की जा चुकी हैं।
सबकी नजर टीके पर थी और दुष्प्रभाव की खबर ने शेयर कीमतों पर नकारात्मक असर डाला। ब्रिटिश कंपनी की भारतीय शाखा के शेयर बुधवार को 12 फीसदी गिरे हालांकि दिन के अंत तक कुछ सुधार के बाद यह गिरावट 3.8 फीसदी रह गई। लंदन में शेयर कीमतों में दो फीसदी गिरावट आई। अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों के अनुसार परीक्षण शुरू करने का अंतिम निर्णय ब्रिटिश चिकित्सा नियामक एमएचआरए द्वारा शीघ्र लिया जाएगा। यह जांच के नतीजों पर निर्भर करेगा।यदि परीक्षण रुक जाता है तो इसका असर एसआईआई की वित्तीय स्थिति पर भी पड़ेगा।
एसआईआई भारतीय माहौल में असर के आकलन के लिए दूसरे और तीसरे चरण का परीक्षण कर रहा है। भारतीय औषधि महानियंत्रक ने एसआईआई को अगस्त के पहले सप्ताह में इसकी मंजूरी दी थी। एसआईआई के सीईओ अदार पूनावाला कह चुके हैं कि परीक्षण के नतीजे आने के पहले ही वो अपने जोखिम पर टीका बनाना शुरू कर देंगे। एसआईआई पुणे में टीका निर्माण की क्षमता बढ़ा कर 1.5 अरब खुराक सालाना से 1.9 अरब खुराक सालाना कर रही है। कंपनी ऐस्ट्राजेनेका को एक अरब खुराक बनाकर देगी। इसके लिए कंपनी को कुछ मौजूदा टीकों का निर्माण रोकना होगा।