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मुंबई में 7 दिन में मरीजों को छुट्टी

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Last Updated- December 15, 2022 | 7:58 AM IST

मुंबई में मरीजों को अस्पताल से छुट्टी देने के नियम में लगातार फेरबदल करते हुए अस्पताल में कोविड के गंभीर मरीजों के लिए बेड उपलब्ध कराने की कोशिश जारी है। इन कदमों के जरिये उन मरीजों के लिए तीसरी श्रेणी के बेड खाली कराने की कोशिश की जा रही है जो गंभीर मरीज हैं। शहर के प्रमुख अस्पतालों का कहना है कि अब कोविड-19 के मरीज को अस्पताल में औसतन करीब 7 दिन रखा जाएगा। महामारी के शुरुआती दिनों में इन मरीजों को अस्पताल में 14 दिनों तक रखा जा रहा था। शहर प्रशासन और इसके अस्पताल का पूरा ध्यान अब गंभीर मरीजों पर है हालांकि मुंबई में अब भी गंभीर मरीजों के लिए बेड मिलना एक बड़ी चुनौती है।
शहर में फि लहाल कोविड-19 के करीब 30,000 सक्रिय मामले हैं और विशेष कोविड अस्पतालों में 10,654 आइसोलेशन बेड हैं। इसके अलावा 1,315 आईसीयू बेड हैं जिनमें से 1, 222 बेड 25 जून तक भरे हुए थे। ऑक्सीजन सपोर्ट की सुविधा वाले कुल 7,374 बेड में से 5,915 बेड पर मरीज हैं। कुल 767 वेंटीलेटर में से 735 का इस्तेमाल पहले से ही हो रहा है। अगर किसी को अस्पताल में भर्ती कराये जाने की जरूरत पड़ी तब बेड का मिलना काफी मुश्किल काम है।
शहर के मशहूर वॉकहार्ट अस्पताल के सेंटर प्रमुख डॉ पराग रिंदानी उन डॉक्टरों में से एक हैं जो खुद कोविड-19 संक्रमण से उबरे हैं। उनका कहना है कि दो प्रमुख वजहों से मरीजों को अस्पताल में रखने की अवधि में कटौती की गई है, पहली बात यह है कि संक्रमण की जटिलता कम हो गई है और हम देख रहे हैं कि गंभीर मरीज कम आ रहे हैं और दूसरी बात यह है कि बीएमसी ने अब स्वैब पॉजिटिव मरीजों को घर जाने की अनुमति दे दी है। उनका कहना है कि स्वैब (नाक और गले का स्वैब आरटी-पीसीआर जांच के लिए लिया जाता है) रिपोर्ट भी तेजी से मिलने लगा है क्योंकि अब ज्यादा लैब जांच कर रहे हैं। रिंदानी कहते हैं, ‘हम पॉजिटिव स्वैब मरीजों को अस्पताल से छुट्टी दे रहे हैं अगर उनके पास घर में पर्याप्त क्वारंटीन सुविधाएं हैं। वैकल्पिक रूप से हम बीएमसी के साथ काम कर रहे हैं ताकि मरीजों को कोविड केयर सेंटर (सीसीसी) में भेजा जा सके। हम अब ठीक हो रहे मरीजों की तुलना में उन मरीजों के लिए बेड खाली कर रहे हैं जिन्हें अस्पताल में रखकर इलाज करने की ज्यादा जरूरत है।’
हालांकि अब भी जांच की तादाद में सीमित वृद्धि दिख रही है। मुंबई में जब 9 जून को संक्रमितों की तादाद 50,000 से अधिक हो गई तब जांच के मामले 4720 ही थे। अब यहां संक्रमण की तादाद 70,000 तक पहुंच चुकी है लेकिन इसके बावजूद रोजाना जांच की संख्या में मामूली बढ़ोतरी हुई है। रिंदानी ने बिज़नेस स्टैंडर्ड को बताया, ‘हम कुछ मरीजों को चार दिनों में भी घर वापस भेज देते हैं जबकि कुछ मरीज (उदाहरण के तौर पर बुजुर्ग मरीज जिन्हें पहले से भी कुछ बीमारी है) 20-25 दिनों तक भी अस्पताल में रहे हैं। लेकिन अब आईसीयू के मरीजों को छोड़कर ज्यादातर मरीज सातवें दिन तक घर भेज दिए जा रहे हैं।’
इस वक्त शहर प्रशासन ने बिना लक्षण वाले मरीजों को अस्पताल में भर्ती करने पर सख्त पाबंदी लगाई है। कई लोगों में ऐसी भी चिंता है कि अगर उनकी हालत खराब होती है तब उन्हें बेड नहीं मिलेगा ऐसे में पॉजिटिव होने के साथ ही वे अस्पताल में भर्ती होना चाहते हैं।

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First Published - June 26, 2020 | 11:48 PM IST

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