विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा है कि मौजूदा वैश्विक हालात काफी जटिल हो गए हैं और कई चुनौतियां खड़ी हो गई हैं मगर इनके बीच ब्रिक्स समूह संवाद और सहयोग के लिए एक अहम मंच साबित हो रहा है। विदेश मंत्री का यह बयान अमेरिका के इस ऐलान के बाद आया है कि ईरान के साथ व्यापार करने वाले देश पर अमेरिका अतिरिक्त 25 प्रतिशत शुल्क लगा देगा।
भारत इस वर्ष ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की मेजबानी करने वाला है। जयशंकर ने मंगलवार को औपचारिक रूप से इस सम्मेलन का लोगो और इसकी वेबसाइट का अनावरण किया।
जयशंकर ने कहा,‘मौजूदा समय में दुनिया कई जटिल चुनौतियों का सामना कर रही है। एक पुनर्जीवित, समावेशी और प्रभावी बहुपक्षीय व्यवस्था की जरूरत पहले से काफी बढ़ गई है।’
विदेश मंत्री ने कहा कि ब्रिक्स को एक ऐसे सधे बहुपक्षवाद के लिए प्रतिबद्ध होना चाहिए जो समकालीन वास्तविकताओं को दर्शाए। ब्रिक्स में संयुक्त राष्ट्र, विश्व व्यापार संगठन, अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष और विश्व बैंक जैसे संस्थानों का प्रतिनिधित्व होना चाहिए। उन्होंने कहा कि ब्रिक्स द्वारा स्थापित न्यू डेवलपमेंट बैंक (एनडीबी) आर्थिक सहयोग के एक महत्त्वपूर्ण साधन के रूप में उभरा है। उन्होंने कहा कि भारत एनडीबी को एक विश्वसनीय, उत्तरदायी और वित्तीय रूप से टिकाऊ संस्थान के रूप में और मजबूत करने के लिए जारी गतिविधियों और प्रयासों का समर्थन करने के लिए प्रतिबद्ध है।
जयशंकर ने कहा,‘भू-राजनीतिक अनिश्चितताएं, जटिल आर्थिक परिदृश्य, जलवायु संबंधी जोखिम, तकनीकी बदलाव और लगातार विकास अंतराल क्षेत्रों में देशों को प्रभावित करते रहते हैं।’ उन्होंने कहा,‘इस संदर्भ में ब्रिक्स एक अहम मंच बना हुआ है जो राष्ट्रीय प्राथमिकताओं और विकास के विभिन्न चरणों को ध्यान में रखते हुए संवाद एवं सहयोग और व्यावहारिक प्रतिक्रियाओं को प्रोत्साहित करता है।’
उन्होंने कहा कि ब्रिक्स की अध्यक्षता के लिए भारत का दृष्टिकोण ‘मानवता प्रथम’ और ‘जन-केंद्रित’ है। ब्रिक्स समूह के अध्यक्ष के रूप में भारत की अध्यक्षता का विषय ‘लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता के लिए निर्माण’ है। उन्होंने कहा,‘यह हमारे इस विश्वास को दर्शाता है कि ब्रिक्स अपन सदस्यों के बीच संतुलित और समावेशी तरीके से साझा चुनौतियों का सामना करने में मदद कर सकता है।’
जयशंकर ने कहा कि भारत वैश्विक झटकों का सामना करने में सक्षम संरचनात्मक संस्थागत ताकत को बढ़ावा देने की दिशा में प्रयास करेगा, खासकर कृषि, स्वास्थ्य सेवा, आपदा जोखिम में कमी, ऊर्जा और आपूर्ति श्रृंखलाओं में जिनमें सामूहिक तैयारी और प्रतिक्रिया को बढ़ाने वाले सहकारी ढांचे शामिल हैं।
जयशंकर ने कहा कि ब्रिक्स 2026 में अपनी स्थापना के 20 वर्ष पूरे कर लेगा। उन्होंने कहा कि इस अवधि में यह उभरते बाजारों और विकासशील अर्थव्यवस्थाओं के बीच सहयोग के लिए एक महत्त्वपूर्ण मंच के रूप में लगातार अपनी उपयोगिता साबित करता रहा है।
उन्होंने कहा कि ब्रिक्स के अध्यक्ष के रूप में भारत नए और उभरते प्रौद्योगिकियों में उन्नत सहयोग, स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने और इस तरह से सतत विकास मार्गों का समर्थन करने पर भी ध्यान केंद्रित करेगा जो राष्ट्रीय परिस्थितियों के प्रति निष्पक्ष और संवेदनशील हो।
जयशंकर ने कहा कि भारत ब्रिक्स को संवाद और विकास के लिए एक रचनात्मक मंच के रूप में देखता है जो व्यापक बहुपक्षीय प्रणाली का पूरक है। पारस्परिक सम्मान, संप्रभु समानता और सहमति के सिद्धांतों द्वारा निर्देशित, भारत अपनी अध्यक्षता को समावेशी, व्यावहारिक, जन-केंद्रित और परिणामोन्मुखी बनाने का प्रयास करेगा।