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‘कम दाम का मतलब ज्यादा मकानों की बिक्री नहीं’

Last Updated- December 15, 2022 | 8:09 PM IST

केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल के बयान ने रियल एस्टेट क्षेत्र में हलचल पैदा कर दी है। गोयल ने सुझाव दिया था कि डेवलपरों को सरकार की सहायता या बाजार का मुंह नहीं देखना चाहिए बल्कि कीमतें कम करनी चाहिए और खराब कारोबारी फैसलों के कारण किए गए निवेश को जरूरत पडऩे पर भूल जाने की जरूरत है।
अधिकारियों का कहना है कि यह क्षेत्र एनबीएफसी के संकट में फंसने के बाद से ही कम से कम दो साल से संकट के दौर से गुजर रहा है। महामारी के कारण की गई बंदी इस क्षेत्र के लिए ताबूत में आखिरी कील साबित हुई है और इस क्षेत्र को तत्काल मदद की जरूरत है।
गोयल ने कहा कि कीमतें घटाना एकमात्र रास्ता है, जबकि उद्योग से जुड़े लोगों का कहना है कि दबाव में आए इस क्षेत्र के लिए अतिरिक्त कदम उठाने की जरूरत है।
एंबेसी ग्रुप के चेयरमैन जीतू विरवानी ने कहा, ‘सिर्फ रियल एस्टेट कारोबारियों के लिए ही नहीं, बल्कि सभी उद्यमियों व उद्योगपतियों के लिए अगले 3 साल तक ब्याज दरों में कमी करने की जरूरत है।’ उन्होंने कहा, ‘मैं ब्याज माफी की बात नहीं कर रहा, क्योंकि बैंकों को भी ब्याज की जरूरत है, लेकिन रीपो रेट अगर इतना कम है तो वे इतना ज्यादा मुनाफा क्यों ले रहे हैं। मेरा मानना है कि मकान के खरीदारों के लिए अगले 3 साल के लिए ब्याज दरें 5.5 प्रतिशत की जानी चाहिए, जिससे यह कारोबार बहाल हो सके।’
मुंबई की एक रियल्टी के सीईओ ने नाम न दिए जाने की शर्त पर कहा कि सर्किल रेट या रेडी रेकनर रेट को बाजार में ग्राहकों को वापस लाने का सहारा बनाया जा सकता है। उन्होंने कहा, ‘अगर डेवलपरों को कोई छूट नहीं दी जा रही है तो बिक्री बढ़ाने के लिए ग्राहकों को छूट देने की जरूरत है।’ उन्होंने कहा कि खरीदारों को प्रोत्साहन देने की जरूरत है, क्योंकि रियल एस्टेट पर कम से कम 250 उद्योग निर्भर हैं, जिसमें सीमेंट, स्टील से लेकर पेंट और कारोबारी सेवाएं तक शामिल हैं। लग्जरी रियल एस्टेट ब्रोकरेज फर्म बाला ऐंड एसोसिएट्स के सीईओ बाला सेट्टी ने कहा कि बिक्री और कारोबार में 6 महीने की देरी का मतलब यह है कि डेवलपरों का बोझ बढ़ रहा है। उनका कहना है कि सरकार ब्याज दरों का पुनर्गठन कर और उनके लिए ब्याज की दरें कम करके मदद कर सकता है, जिनके पास पैसे तो हैं, लेकिन दूसरा या तीसरा मकान खरीदने के लिए कर्ज नहीं ले रहे हैं।
बैंकिंग दरों से इतर अन्य संभव कदम जीएसटी ढांचे में बदलाव हो सकता है। बेंगलूरु की लग्जरी डेवलपर माइया एस्टेट के सीईओ मयंक रुइया ने कहा, ‘शहरों में कीमत का दबाव कम करने के लिए इनपुट टैक्स क्रेडिट की पेशकश की जा सकती है।’
डेवलपरों का कहना है कि गोयल के बयान से डेवलपरों पर दबाव और बढ़ेगा। नाइट फ्रैंक इंडिया के कार्यकारी निदेशक गुलाम जिया ने कहा, ‘आज डेवलपर पहले से ही भारी दबाव में हैं। बिक्री कम हो गई है और मुनाफा मामूली है। अगर कीमत और घटाई जाती है तो डेवलपर दीवालिया हो जाएंगे और इससे बैंक संकट में पड़ जाएंगे।’
विशेषज्ञों का कहना है कि वाणिज्यिक और खुदरा क्षेत्र पर बहुत बुरा असर पड़ रहा है और मझोले आकार की परियोजनाओं की स्थिति में तेजी से सुझार होगा।  जिया कहते हैं कि केंद्र सरकार को आयकर अधिनियम की संबंधित धाराओं में बदलाव की जरूरत है, जिससे करों का बोझ घट सके।

First Published - June 5, 2020 | 12:14 AM IST

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