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Budget Trivia: ब्रिटिश दौर से डिजिटल युग तक, बजट पेश करने की परंपरा में बदलाव

Budget 2026: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण पेश करेंगी रविवार को बजट, ब्रीफकेस से टैब तक भारत की आधुनिक, पेपरलेस और निवेशक-मित्र बजट यात्रा।

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मानसी वार्ष्णेय   
Last Updated- January 14, 2026 | 1:44 PM IST

Budget 2026-27: यूनियन बजट पेश करने का समय नजदीक है। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 1 फरवरी 2026 को संसद में बजट पेश करेंगी। इस बार का बजट रविवार को पेश किया जाएगा। ध्यान देने वाली बात यह है कि बजट सप्ताहांत में पेश करना भारत में नई बात नहीं है। 2015 और 2016 में पूर्व वित्त मंत्री अरुण जेटली ने भी शनिवार और रविवार को बजट पेश किया था।

ब्रीफकेस से बहीखाता और अब टैब

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट पेश करने की परंपरा में बदलाव किए हैं। 2019 में उन्होंने पारंपरिक ब्रीफकेस की जगह लाल रंग के बहीखाते का इस्तेमाल किया। इसे भारतीय संस्कृति के अनुरूप तैयार किया गया था। मुख्य आर्थिक सलाहकार केवी सुब्रमण्यन ने इसे पश्चिमी प्रभाव से मुक्त भारतीय परंपरा बताया था।

कोविड-19 महामारी के दौरान डिजिटल तकनीक ने रास्ता आसान बनाया। 2021-22 का बजट वित्त मंत्री ने टैबलेट पर पेश किया, जिससे बजट पूरी तरह से पेपरलेस हो गया।

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ब्रीफकेस का इतिहास

सूटकेस या ब्रीफकेस की परंपरा 1860 में ब्रिटेन के चांसलर ऑफ द एक्सचेकर विलियम एवर्ट ग्लैडस्टन से शुरू हुई। लंबे भाषण और दस्तावेजों के लिए उन्हें बड़े बैग की जरूरत थी। भारत में भी ब्रिटिश शासन के दौरान लाल चमड़े का ब्रीफकेस इस्तेमाल किया गया। इसका उद्देश्य बजट दस्तावेज सुरक्षित रखना और शाही मानकों का पालन करना था।

भारत में बदलाव और विविधता

स्वतंत्रता के बाद भी भारत ने इस परंपरा को जारी रखा। स्वतंत्र भारत के पहले वित्त मंत्री शणमुखम शेट्टी ने भी इस ब्रीफकेस का इस्तेमाल किया। 1991 में पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने एक साधारण काले बैग को चुना। 1998-99 में वित्त मंत्री यशवंत सिन्हा ने पट्टियों और बकल वाले काले चमड़े के बैग का इस्तेमाल किया। साल दर साल रंग और डिजाइन बदलते रहे, लेकिन बैग में हमेशा भारत की अर्थव्यवस्था का लेखा-जोखा सुरक्षित रहा।

बजट का यह सफर ब्रीफकेस से बहीखाते और अब टैब तक भारत की प्रगति और आधुनिकता की कहानी बताता है।

बजट पेश करने के समय में बदलाव

पारंपरिक रूप से भारत में केंद्रीय बजट शाम के समय प्रस्तुत किया जाता था, जो ब्रिटिश शासनकाल की प्रथा का हिस्सा था।

लेकिन 1999 में इस समय में बदलाव किया गया और बजट अब सुबह 11 बजे पेश किया जाने लगा। इसका उद्देश्य न सिर्फ संसद के सत्र और बाजार के समय के साथ तालमेल बिठाना था, बल्कि आम जनता और निवेशकों के लिए भी इसे अधिक सुलभ बनाना था।

तब से, हर साल केंद्रीय बजट सुबह के समय प्रस्तुत किया जाता है, जिससे वित्तीय बाजारों में बजट के प्रभाव को समय रहते समझने और नीतिगत निर्णय लेने में आसानी होती है।

First Published : January 14, 2026 | 10:46 AM IST