facebookmetapixel
‘हमें अमेरिकी बनने का कोई शौक नहीं’, ग्रीनलैंड के नेताओं ने ट्रंप की बात को ठुकराया, कहा: हम सिर्फ ‘ग्रीनलैंडर’Bonus Issue Alert: अगले हफ्ते दो कंपनियां अपने निवेशकों को देंगी बोनस शेयर, रिकॉर्ड डेट फिक्सDMart Q3 Results: Q3 में मुनाफा 18.28% बढ़कर ₹855 करोड़ के पार, रेवेन्यू ₹18,100 करोड़ पर पहुंचाभारत पहुंचे US के नए राजदूत गोर,कहा: वापस आकर अच्छा लग रहा, दोनों देशों के सामने कमाल के मौकेCorporate Action: स्प्लिट-बोनस-डिविडेंड से बढ़ेगी हलचल, निवेशकों के लिए उत्साह भरा रहेगा अगला हफ्ताIran Protest: निर्वासित ईरानी शाहपुत्र पहलवी का नया संदेश- विरोध तेज करें, शहरों के केंद्रों पर कब्जे की तैयारी करें350% का तगड़ा डिविडेंड! 5 साल में 960% का रिटर्न देने वाली कंपनी का निवेशकों को जबरदस्त तोहफाSuzuki ने उतारा पहला इलेक्ट्रिक स्कूटर e-Access, बुकिंग हुई शुरू! जानें कीमत65 मौतें, 2311 गिरफ्तारी के बाद एक फोन कॉल से सरकार विरोधी प्रदर्शन और तेज….आखिर ईरान में हो क्या रहा है?US Visa: अमेरिकी वीजा सख्ती ने बदला रुख, भारतीय एग्जीक्यूटिव्स की भारत वापसी बढ़ी

डर कम तो होटलों में जगी उम्मीदें

Last Updated- December 12, 2022 | 12:33 AM IST

होटल उद्योग में उम्मीद का माहौल नजर आने लगा है। दक्षिण एशिया होटल निवेश सम्मेलन (एचआईसीएसए) में एकत्रित तमाम होटल उद्यमियों ने कोरोना महामारी की तीसरी लहर न आने की उम्मीद बढऩे से होटल उद्योग की रिकवरी होने की आस लगाई हुई है। शून्य राजस्व की अभूतपूर्व स्थिति से बच निकले होटल उद्योग का यह दो-दिवसीय सम्मेलन कारोबार की संभावनाएं एवं चुनौतियों का जायजा लेने का जरिया बना।
सलाहकार फर्म होटलिवेट द्वारा आयोजित यह सम्मेलन पिछले साल मार्च में कोविड-19 महामारी के आने के बाद का पहला बड़ा कार्यक्रम है जिसमें लोग भौतिक रूप से मौजूद रहे। इसके जरिये होटल उद्योग यह दर्शाने की कोशिश कर रहा है कि अब आतिथ्य क्षेत्र सामान्य हो रहा है।
धीरे-धीरे हालात सामान्य होने और तेज होते टीकाकरण के बीच पिछले डेढ़ साल में अधिकांश समय तक बंद रहे सार्वजनिक स्थानों के दोबारा खुलने से होटल उद्योग कारोबार के सिलसिले में आने वाले मेहमानों की वापसी के लिए खुद को तैयार कर रहा है। अधिकांश होटलों की बुकिंग कोविड-पूर्व के स्तर से करीब 60-70 फीसदी पर जा पहुंची है लेकिन औसत दैनिक बुकिंग दर अब भी कम है और अगले 6-8 महीनों में ही इसके कोविड-पूर्व पर पहुंच पाने की संभावना है। इंडियन होटल्स के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्याधिकारी पुनीत चटवाल कहते हैं, ‘सितंबर तिमाही हमारी उम्मीद से कहीं ज्यादा अच्छी रही है। मौजमस्ती के लिए आने वाले मेहमान होटल कारोबार को चला रहे हैं और प्रति कमरा राजस्व कोविड-पूर्व से ऊंचा रहा है। अगर मेट्रो शहरों के होटलों को कोविड-पूर्व स्तर का 80-90 फीसदी औसत राजस्व प्रति कमरा भी मिलने लगता है तो हम 100 फीसदी को पार कर जाएंगे। इसकी वजह यह है कि घूमने-फिरने के लिए आने वाले मेहमानों से मिलने वाला प्रति कमरा औसत राजस्व वर्ष 2018-19 के स्तर का 100-250 फीसदी है।’
दूसरे उद्यमी भी इसी तरह की राय रखते हैं। इंटरनैशनल होटल ग्रुप के प्रबंध निदेशक (दक्षिण पश्चिम एशिया) सुदीप जैन कहते हैं, ‘कमरों के भरने के मामले में हम काफी हद तक स्तर हासिल कर चुके हैं लेकिन दरें अब भी महामारी-पूर्व की तुलना में आधी हैं।’
रेटिंग एजेंसी केयर रेटिंग्स का अनुमान है कि वित्त वर्ष 2021-22 में औसत कमरा किराया एक साल पहले की तुलना में 7-10 फीसदी ज्यादा रहेगा लेकिन वह भी कोविड-पूर्व की तुलना में 30-35 फीसदी कम होगा। औसत कमरा किराये की सामान्य स्थिति बुकिंग के हालात सुधरने के बाद ही बहाल हो पाएगी।
होटल बुकिंग की हालत सुधरने के बावजूद अधिकांश होटल कंपनियों की बैलेंस शीट ठीक नहीं है। सम्मेलन में शामिल कई प्रतिनिधियों का यह मानना है कि महामारी की वजह से लगे लॉकडाउन ने होटलों को अपने कारोबार के बारे में नए सिरे से सोचने और कई तौर-तरीकों की समीक्षा एवं लागत ढांचे को नए सिरे से तय करने के लिए मजबूर किया।
अधिकांश फर्मों ने लागत में कटौती और अपनी सक्षमता बढ़ाने के लिए डिजिटल माध्यमों का इस्तेमाल बढ़ा दिया है। मसलन, लेमन ट्री होटल्स के प्रबंध निदेशक पतु केसवानी ने बताया कि फ्रंट एवं बैक-एंड गतिविधियों के डिजिटलीकरण के लिए कंपनी ने बोस्टन कंसल्टिंग ग्रुप की सेवाएं ली हैं। होटलों ने कर्मचारियों में भी कटौती की है। अगर लेमन ट्री होटल का ही उदाहरण लें तो उसके कर्मचारियों की संख्या घटकर 5,500 रह गई है जो पहले 8,500 हुआ करती थी। यात्रा पर लगी बंदिशों और बंद होटलों से ऑनलाइन ट्रैवल एजेंटों पर भी बुरा असर पड़ा है। मेकमाईट्रिप के संस्थापक एवं मुख्य कार्याधिकारी दीप कालरा कहते हैं, ‘जून तिमाही हमारे लिए बहुत निर्दयी थी। सबसे मुश्किल काम श्रम लागत को कम करना था। हमें 10 फीसदी कटौती करनी पड़ी।’

First Published - October 3, 2021 | 11:23 PM IST

संबंधित पोस्ट