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पहली तिमाही में माल ढुलाई 21 प्रतिशत कम

Last Updated- December 15, 2022 | 5:31 AM IST

कोविड-19 के प्रसार को रोकने के लिए की गई देशबंदी और आर्थिक गतिविधियां सुस्त होने से भारतीय रेल की माल ढुलाई वित्त वर्ष 21 की पहली तिमाही में 21 प्रतिशत गिरकर 24.1 करोड़ टन रह गई है।
रेलवे की माल ढुलाई से कमाई भी अप्रैल से जून के दौरान 31 प्रतिशत घटकर 22,266 करोड़ रुपये रह गई है। जून महीने में रेलवे ने .93 करोड़ टन ढुलाई की, जो 2019-20 के जून महीने की तुलना में 8 प्रतिशत कम है। इस महीने के दौरान माल ढुलाई से कमाई भी 18 प्रतिशत घटकर 8,826 करोड़ रुपये रह गई है।
रेलवे बोर्ड के चेयरमैन वाईके यादव ने संकेत दिए हैं कि आर्थिक गतिविधियां बढऩे के साथ जून महीने में माल ढुलाई उल्लेखनीय रूप से बढ़ी है। उन्होंने कहा, ‘जून महीने में हमने जून 2019 की तुलना में 91 प्रतिशत नियमित ढुलाई की है। सीमेंट, कोयला, उर्वरक, स्टील की ढुलाई बढ़ रही है।’
अप्रैल और मई महीने में रेलवे की ढुलाई घटी थी और यह 2019 की तुलना में 70 प्रतिशत रह गई। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक कोविड-19 के कारण  वित्त वर्ष के पहले दो महीने में कुल 5.8 करोड़ टन माल की ढुलाई हुई।
जिंसों में खाद्यान्न की ढुलाई अप्रैल से जून के दौरान 83 प्रतिशत बढ़ी है और यह 2019-20 के 89 लाख टन की तुलना में 2020-21 में 162.8 लाख टन हो गया है। इसमें बढ़ोतरी की प्रमुख वजह यह है कि रेलवे ने  खादद्यान्न, बिजली क्षेत्र के लिए कोयले, पेट्रोलियम और पार्सल सेवाओं की ढुलाई पर ज्यादा जोर दिया।
रेलवे की कुल ढुलाई में कोयले की हिस्सेदारी अहम होती है। वित्त वर्ष 2020-21 की पहली तिमाही में कोयले की ढुलाई 29 प्रतिशत घटकर 1121.4 लाख टन रह गई, जो 2019-20 की पहली तिमाही में 1585.2 लाख टन थी। रेलवे के मुताबिक कोयले की ढुलाई कम रही क्योंकि ताप बिजली संयंत्रों के पास 28 दिन के लिए कोयले का पर्याप्त स्टॉक था। रेलवे को उम्मीद है कि तीसरी तिमाही तक कोयले की ढुलाई इसी स्तर पर बनी रहेगी और चौथी तिमाही में ढुलाई बढ़ेगी।
इस अवधि के दौरान सीमेंट और क्लिंकर की ढुलाई 27 प्रतिशत, खनिज एवं अयस्क की 23 प्रतिशत और स्टील की 21 प्रतिशत कम हुई है।
पिछले 3 महीने में ढुलाई खंड में प्रमुख लक्ष्य यह हासिल हुआ है कि ढुलाई का वक्त कम हुआ है। मालगाडिय़ों की औसत रफ्तार इस दौरान 23 किलोमीटर से बढ़कर 41 किलोमीटर प्रति घंटे हो गई।
अगर यात्री ट्रेनों की स्थिति देखेंं तो 200 मेल एक्सप्रेस विशेष ट्रेनों से 1 जून से प्रतिदिन करीब 20 से 22 करोड़ रुपये कमाई हुई है। रेलवे ने 1 मई से श्रमिक स्पेशल ट्रेनें शुरू की थीं और इस दौरान 4,590 ट्रेनें चलाई गईं। रेलवे ने पहले ही संकेत दिए हैं कि श्रमिक ट्रेनों की मांग पहले की कम हो गई है।

First Published - July 3, 2020 | 12:35 AM IST

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