गुरुग्राम में रहने वाले प्रबंधन पेशेवर सुमित सिंह (बदला नाम) की कोविड-19 से पीडि़त सास को जब सांस लेने में तकलीफ होने लगी तो उन्होंने प्लाज्मा दाता तलाशने के लिए सोशल मीडिया एक एसओएस भेजा। उन्हें प्लाज्मा की दो यूनिट लेने के लिए पात्र दाता तलाशने में दो दिन लगे। उन्हें एक यूनिट दिल्ली प्लाज्मा बैंक से मिली और एक यूनिट पीतमपुरा ब्लड बैंक से। पहले दाता ने केवल बदले में प्लाज्मा दान देने के लिए कहा, जबकि दूसरे ने एक यूनिट प्लाज्मा के लिए 18,000 रुपये लिए।
सिंह ने कहा, ‘प्लाज्मा थैरेपी तभी शुरू हो सकती है, जब आपकी जांच रिपोर्ट पॉजिटिव आएं। लेकिन मेरी सास की रिपोर्ट दो बार नेगेटिव आईं। उसके बाद हमने दूसरी लैब में जांच कराई। बहुत से लोग प्लाज्मा देने से डर रहे हैं। खुशकिस्मती से मेरी सास के लिए यह थेरेपी कारगर रही और अब आईसीयू से बाहर आ गई हैं।’
सिंह की अच्छी किस्मत थी कि उनके पड़ोसी का दोस्त उनकी मदद को आगे आया। जब से प्लाज्मा थेरेपी ऑफ-लेबल इलाज बना है, तब से रक्त प्लाज्मा की मांग इसकी मौजूदा आपूर्ति की तुलना में कई गुना बढ़ गई है। इंस्टीट््यूट ऑफ लिवर ऐंड बिलियरी साइंसेज की ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन विशेषज्ञ डॉ. मीनू वाजपेयी ने कहा, ‘फोन की घंटी बंद नहीं हो रही है। हमारे पास लगातार प्लाज्मा के लिए कॉल आ रहे हैं। हम मांग पूरी करने की पूरी कोशिश कर रहे हैं और प्लाज्मा देने के बदले प्लाज्मा मुहैया करा रहे हैं।’ गौरतलब है कि इंस्टीट््यूट ऑफ लिवर ऐंड बिलियरी साइंसेज में ही दिल्ली का पहला प्लाज्मा बैंक शुरू हुआ है। हॉलीवुड अभिनेता टॉम हैंक्स से लेकर दिल्ली की मंत्री आतिशी मार्लिना जैसी जानी-मानी हस्तियों ने भी कोविड-19 से उबरने के बाद प्लाज्मा दान किया है। इसका उद्देश्य उन हजारों लोगों के सामने प्लाज्मा दान करने के लिए आगे आने की एक मिसाल कायम करना है, जो कोविड से उबर चुके हैं।
फोर्टिस मेमोरियल रिसर्च इंस्टीट््यूट के निदेशक और क्रिटिकल केयर मेडिसिन विभाग के प्रमुख डॉ. संदीप दीवान ने कहा, ‘सबसे बड़ी मुश्किल मरीज के लिए सही दानदाता तलाशना और डोनर बैंक बनाए रखना है।’ दीवान ने कहा कि उनके अस्पताल समेत सभी अस्पताल उन सभी कोविड मरीजों का ब्योरा रख रहे हैं, जिनका उन्होंने इलाज किया है ताकि जरूरत पडऩे पर उनसे संपर्क साधा जा सके। उन्होंने कहा, ‘हम जिन कोविड मरीजों का इलाज कर रहे हैं, उनके नाम, पते और रक्त समूह का ब्योरा रख रहे हैं।’ मैक्स अस्पताल ने प्लाज्मा थेरेपी परीक्षणों के तहत 50 मरीजों को नामांकित किया था। इसने इलाज के ऑफ-लेबल बनने के बाद करीब 200 मरीजों का इलाज किया। ये मरीज अध्ययन के दायरे से बाहर थे। हालांकि इस अस्पताल के पास प्लाज्मा बैंक नहीं है। यह आपात स्थिति में अपने मरीजों के लिए कुछ यूनिट रखता है।
मैक्स हेल्थकेयर में समूह स्वास्थ्य निदेशक डॉ. संदीप बुद्धिराजा ने कहा, ‘हमें इस बात को लेकर सचेत रहना चाहिए क्योंकि कभी भी किसी मरीज को प्लाज्मा थेरेपी की जरूरत पड़ सकती है और उसके परिवार को एक या दो दिन पहले इस बात की जानकारी देनी होगी। इससे समय रहते प्लाज्मा उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।’ बुद्धिराजा ने कहा कि दिल्ली में प्लाज्मा बैंक की शुरुआत के बाद स्थिति में सुधार हुआ है। उन्होंने कहा,’हमें उन्हें प्लाज्मा की जरूरत के बारे में इत्तला देने के अलावा हमें वे डॉक्टर भी मुहैया कराना चाहिए, जो बेहतर इलाज कर सकते हैं।’
केरल में कुछ डॉक्टर कोरोनावयरस मरीजों का एक व्हाट्सऐप ग्रुप का इस्तेमाल कर रहे हैं। मामले बढऩे के समय लोगों को प्लाज्मा देने की अपील करने के लिए यह ग्रुप बनाया गया था। कोविड-19 संक्रमण से बाहर आने के एक महीने बाद कोई व्यक्ति प्लाज्मा दे सकता है।
महिलाओं में केवल वे ही प्लाज्मा दे सकती हैं, जिन्होंने संतान को जन्म नहीं दिया है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि संतान को जन्म दे चुकीं महिलाओं के रक्त प्लाज्मा में एंडीबॉडी पाए जाते हैं, जो प्लाज्मा चढ़ाने के समय फेफड़े को गंभीर नुकसान पहुंचा सकते हैं। डॉक्टरों का कहना है कि अब प्लाज्मा देने वाले लोगों तक पहुंचना पहले के मुकाबले आसान हो गया है। पिछले कुछ सप्ताहों के दौरान दिल्ली के प्लाज्मा बैंक में प्लाज्मा देने वाले लोगों की संख्या दोगुनी बढ़कर 50 से अधिक हो गई है। हालांकि व्यक्ति के शरीर से प्लाज्मा लेना आसान है, लेकिन डॉक्टरों का कहना है कि प्लाज्मा दाता की जांच, विभिन्न तरह के फॉर्म भरने में ही काफी समय लग जाता है।
प्लाज्मा लेने की प्रक्रिया में सेल सेपरेटर नाम के एक उपकरण से रक्त संग्रह किया जाता है। आकाश हेल्थकेयर में ब्लड बैंक की जिम्मेदारी संभालने वाली डॉ. हरप्रीत कौर कहती हैं, ‘सेपरेटर रक्त से विभिन्न तत्वों को अलग करना शुरू कर देता है। इनमें प्लाज्मा एक अलग रखे थैले में एकत्र होता है और शेष रक्त दोबारा दाता के शरीर में चला जाता है।’
प्लाज्मा संग्रह करने में करीब 10,000-11,000 खर्च आता है। प्लाजमा थेरेपी की मानक खुराक 200 मिलीलीटर तय की गई है। करीब 410 मिलीलीटर रक्त एकत्र करने पर 200 मिलीलीटर के दो थैले प्लाज्मा से भरते हैं। हालांकि प्लाज्मा थेरेपी बिल्कुल नई नही हैं और न ही यह इलाज का कोई स्थापित मानक नहीं है।
इंडियन स्पाइनल इंजरीज सेंटर के स्वास्थ्य निदेशक डॉ. एच ए छाबरा ने कहा, ‘शरीर किसी संक्रमण से लडऩे के लिए सफेद रक्त कण के साथ एंडीबॉडी बनाता है। जो व्यक्ति कोविड-19 से कभी संक्रमित रहा है, उसके शरीर में एंटीबॉडी और रक्त प्लाज्मा में श्वेत रक्त कण भी हो सकते हैं। अगर यह प्लाज्मा किसी दूसरे संक्रमित व्यक्ति को चढ़ाया जाता है तो इसमें पाए जाने वाले एंटीबॉडी संक्रमण से लडऩे में मदद कर सकते हैं।’