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आगे की राह बनाएगा डिजिटल पब्लिक इन्फ्रास्ट्रक्चर, पर बढ़ा सकता है जोखिम

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विश्व बैंक ने अपनी रिपोर्ट में यह भी कहा है कि रेमिटेंस का डिजिटलीकरण पहुंच बढ़ाने का एक अवसर है, जिसमें इन खातों का इस्तेमाल हो सकता है

Last Updated- September 07, 2023 | 10:29 PM IST
Digital identity project

डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचे (DPI) से वित्तीय समावेशन को गति मिल सकती है। इससे डिजिडल वित्तीय सेवाओं की मौजूदा खाईं कम हो सकती है। इसके जोखिम भी हो सकते हैं और अगर बेहतर सिद्धांतों व वैश्विक मानकों का पालन करके इसकी डिजाइन तैयार नहीं की जाती है तो इससे जोखिम और बढ़ सकता है। वैश्विक वित्तीय समावेशन को लेकर जी20 देशों की साझेदारी पर विश्व बैंक द्वारा तैयार की गई रिपोर्ट में यह कहा गया है।

डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचे के माध्यम से वित्तीय समावेशन बेहतर करने और उत्पादकता बढ़ाने के लिए जी20 की नीतिगत सिफारिशों पर तैयार की गई रिपोर्ट में कहा गया है कि अगर बेहतरीन तरीके से डीपीआई को प्रबंधित किया जाए तो इससे लेन देन की लागत कम करने, नवोन्मेष को बढ़ावा देने, प्रतिस्पर्धा तेज करने और इंटरऑपरेटिबिलिटी व ग्राहकों का अनुभव व विकल्प बेहतर करने में मदद मिल सकती है।

डीपीआई से कानूनी व नियामकीय जोखिम, दिवाला जोखिम जैसे कुछ जोखिम जुड़े हुए हैं, जो व्यापक पैमाने पर इसके माहौल के लिए खतरा हो सकते हैं अगर इसका कोई भी घटक वित्तीय रूप से अनुचित हो जाता है। डीपीआई के दुरुपयोग में वित्तीय ग्राहकों की सुरक्षा के जोखिम पर भी जोर दिया गया है।

रिपोर्ट में नीतिगत सिफारिशों में जोखिम पर आधारित नियमन, निगरानी डीपीआई के वित्तीय क्षेत्र में इस्तेमाल पर नजर रखने की व्यवस्था, बेहतर आंतरिक प्रशासन को प्रोत्साहन दिए जाने सहित अन्य शामिल है। रिपोर्ट में आधार का हवाला दिया गया है, जिसे जनधन बैंक खातों और मोबाइल खातों से जोड़ा गया है, जिससे लेन देन के खातों के मालिकाना बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई है और 2008 में वयस्कों की हिस्सेदारी एक चौथाई थी, जो अब 80 प्रतिशत हो गई है।

डीपीआई के अन्य उदाहरणों में सिंगापुर का सिंगपास, फिलीपींस का फिलसिस, यूएई-पास और फास्ट पेमेंट सिस्टम जैसे भारत का यूपीआई, ब्राजील का पिक्स और तुर्किये के फास्ट के साथ अन्य शामिल हैं।

विश्व बैंक ने अपनी रिपोर्ट में यह भी कहा है कि रेमिटेंस का डिजिटलीकरण पहुंच बढ़ाने का एक अवसर है, जिसमें इन खातों का इस्तेमाल हो सकता है। इससे भी लेनदेन की लागत में कमी आएगी। रिपोर्ट में कहा गया है कि डीपीआई से एमएसएमई को मिलने वाले औपचारिक कर्ज की राह में आने वाली समस्या खत्म हो सकती है।

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First Published - September 7, 2023 | 10:29 PM IST

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