बीते शुक्रवार को अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप द्वारा दुनिया भर के देशों पर लगाए गए टैरिफ को अवैध बताते हुए रद्द कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने 6-3 के बहुमत से यह फैसला सुनाया। कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि अमेरिकी संविधान के तहत टैक्स और टैरिफ लगाने का अधिकार राष्ट्रपति को नहीं, सिर्फ संसद को है।
लेकिन कोर्ट के फैसले के तुरंत बाद ट्रंप ने दुनियाभर के देशों पर 10% ग्लोबल टैरिफ लगा दिया। उन्होंने शुक्रवार को एक आदेश पर हस्ताक्षर कर इसे लागू कर दिया। ट्रंप ने यह फैसला सेक्शन 122 के तहत लिया जो अमेरिका के एक कानून का हिस्सा है, जिसे ट्रेड एक्ट ऑफ 1974 कहा जाता है। यह कानून अमेरिकी राष्ट्रपति को अधिकार देता है कि अगर देश को अचानक व्यापार घाटे या आर्थिक संकट का खतरा हो, तो वे तुरंत आयात पर टैरिफ लगा सकते हैं।
ट्रंप द्वारा लगाया गया 10% का नया टैरिफ 24 फरवरी से दुनियाभर के देशों पर लागू हो जाएगा। इसके चलते भारत को अब 25 प्रतिशत की जगह सिर्फ 10 प्रतिशत रेसिप्रोकल टैरिफ देना पड़ेगा। एक्सपर्ट के मुताबिक, भारतीय कंपनियों के लिए यह अच्छी खबर है क्योंकि उनका सामान अमेरिकी बाजार में पहले से सस्ता पहुंच सकेगा।
टैरिफ यानी कस्टम ड्यूटी या इंपोर्ट ड्यूटी होती है। जब कोई देश दूसरे देश से सामान खरीदता है तो आयात करने वाले को यह ड्यूटी सरकार को चुकानी पड़ती है। ज्यादातर कंपनियां इस टैक्स को आखिरी ग्राहक तक पहुंचा देती हैं। नतीजा यह होता है कि आयात करने वाले देश में वो सामान महंगा हो जाता है। कुछ दूसरे फैक्टर भी कीमत बढ़ाने में मदद करते हैं।
यह शब्द अमेरिका ने ही सबसे पहले इस्तेमाल किया। ट्रंप प्रशासन ने 2 अप्रैल 2025 को भारत समेत करीब 60 देशों पर ये टैरिफ लगाई। मकसद था अमेरिकी निर्यातकों को बराबरी का मौका देना। आसान भाषा में कहें तो अगर कोई देश अमेरिकी सामान पर एक्स प्रतिशत ड्यूटी लगाता है तो अमेरिका भी उसी देश के सामान पर वैसी ही ड्यूटी लगा देगा। ये ड्यूटी पुरानी MFN दरों के ऊपर अतिरिक्त लगाई जाती है।
बता दें कि MFN का मतलब है कि कोई देश एक देश को जो सबसे कम टैक्स देता है, वही कम टैक्स बाकी देशों को भी देना पड़ेगा, यानी सबके साथ बराबरी का व्यवहार।
2 अप्रैल 2025 को अमेरिका ने भारत पर 26 प्रतिशत RT का ऐलान किया था। फिर जुलाई में 25 प्रतिशत RT तय हुई जो 7 अगस्त 2025 से शुरू हो गई। इसके बाद अगस्त में रूसी तेल खरीदने की वजह से अतिरिक्त 25 प्रतिशत टैरिफ लगा दिया गया। इससे कुल RT 50 प्रतिशत तक पहुंच गया।
हालांकि, फरवरी में दोनों देशों के बीच ट्रेड डील के फ्रेमवर्क पर सहमति बनी तो अमेरिका ने टैरिफ को 18 प्रतिशत करने और अतिरिक्त 25 प्रतिशत पेनल्टी हटाने का ऐलान किया। हालांकि, अभी भारत के सामान पर अमेरिका में 25 प्रतिशत टैरिफ ही चल रहा है।
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अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप के टैरिफ को असंवैधानिक करार देते हुए रद्द कर दिया। इसके जवाब में वॉशिंगटन ने नया ऑर्डर जारी किया है। अब 24 फरवरी 2026 से 150 दिनों तक 10 प्रतिशत अस्थायी इंपोर्ट सरचार्ज लगेगा। इसी के चलते भारतीय सामान पर भी यही 10 प्रतिशत रेसिप्रोकल लेवी लागू होगी।
उदाहरण से समझ लेते हैं: अगर कोई प्रोडक्ट अमेरिका में 5 प्रतिशत MFN ड्यूटी देता था तो अब उस पर अतिरिक्त 10 प्रतिशत लगेगा, यानी कुल 15 प्रतिशत। पहले यह 5 प्लस 25 प्रतिशत था। ट्रंप ने अपने आदेश में साफ लिखा, “मैं 150 दिनों के लिए 10 प्रतिशत अस्थायी इंपोर्ट सरचार्ज लगा रहा हूं, जो 24 फरवरी 2026 को सुबह 12:01 ईस्टर्न स्टैंडर्ड टाइम से प्रभावी होगा।”
न्यूज एजेंसी PTI की रिपोर्ट के मुताबिक, एक सूत्र ने बताया कि अब अलग-अलग देशों के लिए अलग RT नहीं रहेगी। जिन सामानों पर RT था, उन पर सबके लिए एक समान 10 प्रतिशत टैक्स लगेगा। अगर भारत के नजरिए से देखें तो 7 फरवरी से 24 फरवरी 2026 तक रूसी तेल वाली पेनल्टी हटा दी गई थी, जिससे अतिरिक्त ड्यूटी 25 प्रतिशत रह गई। 6 फरवरी के संयुक्त बयान में इसे 18 प्रतिशत करने का प्रस्ताव था लेकिन अभी लागू नहीं हुआ। 24 फरवरी से 150 दिनों तक MFN के ऊपर 10 प्रतिशत अस्थायी टैरिफ सब पर लगेगा।
भारत और अमेरिका के बीच होने वाले व्यापार समझौते के पहले चरण को अंतिम रूप देने के लिए भारतीय टीम 23 फरवरी 2026 से वॉशिंगटन में अमेरिकी अधिकारियों से मुलाकात करेगी। उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने 20 फरवरी को कहा कि दोनों देशों के बीच यह डील अगले महीने साइन हो सकती है और उम्मीद है कि अप्रैल से इसे लागू भी कर दिया जाएगा।
वहीं, ट्रंप ने साफ कर दिया कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले का भारत के साथ हो रही ट्रेड डील पर कोई असर नहीं पड़ेगा। उन्होंने कहा कि समझौता अपनी जगह जारी रहेगा। साथ ही, पुराने टैरिफ्स पर कोर्ट के फैसले के बाद अमेरिका ने जवाबी कदम उठाते हुए विदेश से आने वाले सामान पर अतिरिक्त 10 प्रतिशत का ग्लोबल टैक्स लगा दिया है।
न्यूज एजेंसी PTI के मुताबिक, थिंक टैंक GTRI ने कहा कि भारतीय सामान पर RT 25 प्रतिशत से सीधे 10 प्रतिशत हो गया है। इसलिए भारत को अमेरिका के साथ ट्रेड पैक्ट को दोबारा परखना चाहिए। भारत ने 18 प्रतिशत कट के आधार पर अपने टैरिफ कम करने पर हामी भरी थी, लेकिन अब सभी देशों के लिए 10 प्रतिशत कर दिया गया है।
GTRI के फाउंडर अजय श्रीवास्तव ने कहा, “डील्स चैरिटी नहीं होतीं। दोनों तरफ फायदा होना चाहिए। अब भारत को फायदा उठाने के लिए इसे नए तरीके से देखने की जरूरत है।”
व्हाइट हाउस की फैक्ट शीट के मुताबिक, अमेरिका ने साफ किया है कि अपनी अर्थव्यवस्था की जरूरतों और विदेशी लेन-देन को ध्यान में रखते हुए कुछ चीजों को इस अस्थायी ड्यूटी से बाहर रखा गया है।
छूट वाली सूची में अहम खनिज (क्रिटिकल मिनरल्स), करेंसी और बुलियन में इस्तेमाल होने वाली धातुएं, ऊर्जा और ऊर्जा से जुड़े उत्पाद शामिल हैं। इसके अलावा वे प्राकृतिक संसाधन और खाद (फर्टिलाइजर) भी इसमें आते हैं, जिन्हें अमेरिका में न तो उगाया जा सकता है, न पर्याप्त मात्रा में निकाला या बनाया जा सकता है। कुछ कृषि उत्पाद जैसे बीफ, टमाटर और संतरे भी इस टैक्स से बाहर रहेंगे। दवाइयां और उनके कच्चे माल (फार्मास्यूटिकल्स और उनके इंग्रीडिएंट्स) को भी राहत दी गई है।
इसके साथ ही कुछ इलेक्ट्रॉनिक सामान, यात्री वाहन, चुनिंदा हल्के ट्रक, मध्यम और भारी वाहन, बसें और उनके पार्ट्स, साथ ही कुछ एयरोस्पेस उत्पादों पर भी यह अस्थायी टैरिफ लागू नहीं होगा।
स्टील, एल्युमिनियम और कॉपर पर 50 प्रतिशत तथा कुछ ऑटो कंपोनेंट्स पर 25 प्रतिशत वाले सेक्टरल टैरिफ्स पहले की तरह जारी रहेंगे। इनमें कोई बदलाव नहीं किया गया है।
अमेरिका का कहना है कि भारत के साथ उसे बड़ा ट्रेड डेफिसिट (व्यापार घाटा) झेलना पड़ रहा है। वाशिंगटन का नई दिल्ली पर आरोप रहता है कि अमेरिकी सामान पर ज्यादा टैरिफ लगाकर भारतीय बाजार में अमेरिकी निर्यात को रोका जा रहा है।
2021 से 2025 के बीच अमेरिका, भारत का सामान (मर्चेंडाइज) व्यापार में सबसे बड़ा पार्टनर बना रहा। भारत के कुल निर्यात में अमेरिका की हिस्सेदारी करीब 18 प्रतिशत रही, जबकि आयात में 6.22 प्रतिशत और कुल द्विपक्षीय व्यापार में 10.73 प्रतिशत हिस्सा अमेरिका का रहा।
वित्त वर्ष 2024-25 में दोनों देशों के बीच कुल व्यापार 186 अरब डॉलर तक पहुंच गया। इस दौरान भारत ने 86.5 अरब डॉलर का सामान अमेरिका को निर्यात किया, जबकि 45.3 अरब डॉलर का आयात किया। यानी भारत को 41 अरब डॉलर का व्यापार अधिशेष (ट्रेड सरप्लस) मिला। इससे पहले 2023-24 में यह सरप्लस 35.32 अरब डॉलर और 2022-23 में 27.7 अरब डॉलर था।
अगर सेवाओं (सर्विस) की बात करें तो भारत ने करीब 28.7 अरब डॉलर की सेवाएं अमेरिका को निर्यात कीं और 25.5 अरब डॉलर की सेवाएं आयात कीं। इस तरह सेवाओं में 3.2 अरब डॉलर का अधिशेष बना। सामान और सेवाओं को मिलाकर अमेरिका के साथ भारत का कुल व्यापार अधिशेष लगभग 44.4 अरब डॉलर रहा।
2024 में भारत से अमेरिका को जाने वाले प्रमुख सामानों में दवा फॉर्मूलेशन और बायोलॉजिकल्स (8.1 अरब डॉलर), टेलीकॉम उपकरण (6.5 अरब डॉलर), कीमती और अर्ध-कीमती पत्थर (5.3 अरब डॉलर), पेट्रोलियम उत्पाद (4.1 अरब डॉलर), वाहन और ऑटो कंपोनेंट्स (2.8 अरब डॉलर), सोना और अन्य कीमती धातुओं के आभूषण (3.2 अरब डॉलर), कॉटन के रेडीमेड गारमेंट्स (2.8 अरब डॉलर) और आयरन-स्टील उत्पाद (2.7 अरब डॉलर) शामिल रहे।
वहीं अमेरिका से भारत जिन प्रमुख चीजों का आयात करता है, उनमें क्रूड ऑयल (4.5 अरब डॉलर), पेट्रोलियम उत्पाद (3.6 अरब डॉलर), कोयला और कोक (3.4 अरब डॉलर), कट और पॉलिश्ड हीरे (2.6 अरब डॉलर), इलेक्ट्रिक मशीनरी (1.4 अरब डॉलर), एयरक्राफ्ट और स्पेसक्राफ्ट के पार्ट्स (1.3 अरब डॉलर) और सोना (1.3 अरब डॉलर) शामिल हैं।
कैलेंडर वर्ष 2024 में अमेरिका ने भारत से 40.6 अरब डॉलर की सेवाओं का आयात किया। इसमें कंप्यूटर और सूचना सेवाएं 16.7 अरब डॉलर तथा बिजनेस मैनेजमेंट और कंसल्टिंग सेवाएं 7.5 अरब डॉलर की रहीं।
(PTI के इनपुट के साथ)