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रूस से तेल खरीद पर चीन को राहत, ट्रंप ने टैरिफ बढ़ाने का फैसला टाला

Donald Trump China tariffs: ट्रंप ने रूस और चीन से जुड़े टैरिफ और यूक्रेन सीजफायर पर बातचीत में अपनी नीति पर अपडेट दिया।

Last Updated- August 16, 2025 | 12:23 PM IST
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अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने कहा है कि वह अभी चीन जैसे देशों पर रूसी तेल खरीदने को लेकर अतिरिक्त टैरिफ लगाने की जल्दबाज़ी में नहीं हैं। हालांकि, उन्होंने इशारा किया कि आने वाले दो से तीन हफ्तों में इस मुद्दे पर फिर विचार किया जा सकता है।

ट्रंप पहले ही चेतावनी दे चुके हैं कि अगर रूस ने यूक्रेन युद्ध खत्म करने की दिशा में कदम नहीं उठाए तो रूसी कच्चा तेल खरीदने वाले देशों पर सेकेंडरी पेनल्टी लग सकती है। पश्चिमी प्रतिबंधों के बाद से भारत और चीन रूसी तेल के सबसे बड़े खरीदार बने हुए हैं।

ट्रंप लगातार रूसी ऊर्जा खरीदने वाले देशों पर दबाव बनाने के लिए टैरिफ का इस्तेमाल कर रहे हैं। इसी महीने की शुरुआत में उन्होंने भारत से आने वाले सामान पर आयात शुल्क दोगुना करने का ऐलान किया था। अब 27 अगस्त से भारतीय उत्पादों पर टैरिफ 25% से बढ़कर 50% हो जाएगा।

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भारत पर ये टैरिफ तुरंत लागू किए गए हैं, जबकि चीन को अब तक ऐसी कार्रवाई से राहत मिली हुई है। लेकिन ट्रंप के ताज़ा बयान से साफ है कि यह छूट ज्यादा दिनों तक नहीं रह सकती।

अमेरिका-चीन टैरिफ विवाद से भारत को क्या फायदा?

अमेरिका ने फिलहाल चीन पर नए टैरिफ लगाने का फैसला टाल दिया है। जानकारों का मानना है कि इस देरी से भारत को अल्पकाल में अप्रत्यक्ष रूप से फायदा मिल सकता है। अगर बीजिंग पर पेनल्टी नहीं लगती, तो कच्चे तेल का वैश्विक बाजार बड़ा फेरबदल झेलने से बच जाएगा। वरना, रूस और भी सस्ता तेल चीन को भेज सकता था, जिससे भारतीय रिफाइनर्स के लिए मुकाबला कठिन हो जाता।

विशेषज्ञों के अनुसार, अमेरिका-चीन तनाव में थोड़ी भी नरमी आती है तो इससे कमोडिटी की कीमतों और फ्रेट रेट पर दबाव घटेगा, जो भारतीय आयातकों के लिए राहत की बात होगी। हालांकि चेतावनी भी दी जा रही है कि अगर वाशिंगटन आने वाले समय में भारत और चीन दोनों को निशाने पर लेता है, तो यह फायदा ज्यादा दिनों तक नहीं टिक पाएगा।

भारत नहीं रोकेगा रूस से तेल खरीद

भारत ने साफ कर दिया है कि वह किसी भी दबाव में आकर रूस से तेल खरीदना बंद नहीं करेगा। सरकार का कहना है कि यह देश की ऊर्जा सुरक्षा के लिए जरूरी है। एक उद्योग सम्मेलन में पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा, “मुझे कोई चिंता नहीं है। अगर कोई स्थिति बनी तो हम उससे निपट लेंगे।” उन्होंने बताया कि भारत के पास करीब 40 देशों से तेल आपूर्ति का विविध नेटवर्क है।

विदेश मंत्रालय ने भी दोहराया कि भारत की ऊर्जा नीति पूरी तरह राष्ट्रीय हितों पर आधारित है। मंत्रालय ने अमेरिका और यूरोपीय संघ पर “डबल स्टैंडर्ड” अपनाने का आरोप लगाते हुए कहा कि भारत को निशाना बनाना “अनुचित और अव्यावहारिक” है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ अलास्का में हुई शिखर बैठक को “बेहद उपयोगी” बताया। इस मुलाकात में दोनों नेताओं ने यूक्रेन में संभावित सीजफायर पर चर्चा की, लेकिन अंतिम समझौते तक नहीं पहुंच पाए। ट्रंप ने कहा कि बैठक में कई मुद्दों पर सहमति बनी है, हालांकि एक अहम मसला अब भी बाकी है।

ट्रंप ने फॉक्स न्यूज से बातचीत में कहा, “मुझे लगता है कि यह मुलाकात बहुत अच्छी रही।” उन्होंने यह भी साफ किया कि इस प्रगति की वजह से फिलहाल चीन पर नए टैरिफ लगाने का कदम टाल दिया गया है। ट्रंप ने कहा, “अभी हमें इस बारे में सोचने की जरूरत नहीं है… शायद दो-तीन हफ्तों में।”

इसी दौरान ट्रंप और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच व्यापार समझौते को लेकर बातचीत चल रही है। इस समझौते का उद्देश्य टैरिफ कम करना और दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच तनाव घटाना है। हालांकि, अगर अमेरिका नए टैरिफ लागू करता है तो यह प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।

First Published - August 16, 2025 | 12:20 PM IST

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