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चीन के साथ बेहतर रिश्ते बनाये रहने पर प्रयासरत भारत: MEA

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Last Updated- December 11, 2022 | 2:41 PM IST

सामरिक क्षेत्र में चीन की बढ़ती सैन्य उपस्थिति के बीच भारत और अमेरिका के हिंद-प्रशांत की बेहतरी के लिए एक साझा दृष्टिकोण का जिक्र करते हुए विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा कि भारत, चीन के साथ ऐसे संबंध बनाने का प्रयास करता है जो आपसी संवेदनशीलता, सम्मान व परस्पर हित पर आधारित हों। चीन का सामरिक हिंद-प्रशांत क्षेत्र में कई देशों के साथ क्षेत्रीय विवाद है और वह विशेष रूप से विवादित दक्षिण चीन सागर में अमेरिका की सक्रिय नीति का विरोध करता रहा है। 

जयशंकर ने बुधवार को भारतीय पत्रकारों के एक समूह से कहा, ‘‘हम चीन के साथ लगातार रिश्तों में सुधार के लिए प्रयासरत हैं। ऐसा रिश्ता जो आपसी संवेदनशीलता, सम्मान और आपसी हित पर बना हो।’’ 

चीन से निपटने को लेकर भारत और अमेरिका की योजना पर किए एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि दोनों देश हिंद-प्रशांत की बेहतरी व उसे मजबूत बनाने के साझा उद्देश्य रखते हैं। उन्होंने कहा, ‘‘जहां भारतीय और अमेरिकी हित की बात आती है, तो मुझे लगता है, यह हिंद-प्रशांत की स्थिरता, सुरक्षा प्रगति, समृद्धि व विकास पर आधारित है। यहां तक ​​कि यूक्रेन के मामले में भी क्योंकि यह युद्ध लंबे समय से लड़ा जा रहा है और वास्तव में यह लोगों के दैनिक जीवन व दुनियाभर में अशांति उत्पन्न कर सकता है।’’ 

जयशंकर ने कहा कि दुनिया बदल गई है और हर कोई इस बात की सराहना करता है कि कोई भी देश खुद अकेले अंतरराष्ट्रीय शांति और आम लोगों की भलाई की जिम्मेदारी या बोझ नहीं उठा सकता है।

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा कि भारत ऐसे समय में स्थिरता लाने व एक सेतु की भूमिका निभा सकता है जब दुनिया में आशा की कोई किरण नजर नहीं आ रही और अंतरराष्ट्रीय समुदाय चिंतित है। उन्होंने कहा कि भारत वैश्विक अर्थव्यवस्था के जोखिम को कम करने में और राजनीतिक दृष्टि से किसी तरह दुनिया का ध्रुवीकरण रोकने में मदद कर सकता है। 

जयशंकर ने भारतीय पत्रकारों के एक समूह से बुधवार को कहा, ‘‘दुनिया में वास्तव में आशा की कोई किरण नहीं दिख रही। मुझे लगता है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय बेहद चिंतित है।’’ मंत्री ने कहा कि भारत के लिए यह अवसरों से कहीं अधिक हैं, क्योंकि यह बहुत कठिन स्थिति है। 

उन्होंने कहा, ‘‘मुझे लगता है कि इस दिशा में भारत अपना योगदान दे सकता है। मुझे लगता है कि आज हम स्थिरता लाने में एक भूमिका निभा सकते हैं। हम एक पुल की तरह काम सकते हैं। हम कूटनीतिक रूप से एक भूमिका निभा सकते हैं। हमें वास्तव में आर्थिक दृष्टि से देखना होगा कि हम वैश्विक अर्थव्यवस्था के जोखिम को कम करने में कैसे योगदान दे सकते हैं? और राजनीतिक दृष्टि से हम किसी तरह से दुनिया का ध्रुवीकरण रोकने में कैसे मदद कर सकते हैं?’’ 

जयशंकर ने कहा कि उन्हें लगता है कि बहुत से अन्य देशों खासकर ‘ग्लोबल साउथ’ के देशों को भारत से बहुत उम्मीदें हैं। उन्होंने कहा, ‘‘हम जो कर सकते हैं करेंगे और हम दुनिया के हाशिए पर मौजूद सभी देशों से भी संपर्क करेंगे।’’ संयुक्त राष्ट्र महासभा (यूएनजीए) के वार्षिक सत्र में भाग लेने के लिए न्यूयॉर्क की अपनी हाल में संपन्न यात्रा के दौरान जयशंकर ने दुनिया भर के विश्व नेताओं और उनके समकक्षों के साथ लगभग 100 बैठकें कीं। 

उन्होंने कहा कि इतनी सारी बैठकें इसलिए की गईं क्योंकि कई लोगों ने मिलने की इच्छा जाहिर की थी। कई देश बातचीत करना चाहते थे। उन्होंने कहा, ‘‘कई देश हमसे बात करना चाहते थे क्योंकि ऐसी धारणा है कि हम प्रमुख ताकतों के साथ संपर्क में हैं, हम उन्हें प्रभावित कर सकते हैं, हम किसी विचार को आकार दे सकते हैं, हम योगदान दे सकते हैं…।’

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First Published - September 29, 2022 | 12:12 PM IST

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