facebookmetapixel
कई बड़े शहरों में नहीं बिक रहे घर! मेट्रो सिटी में अनसोल्ड घरों का लगा अंबार, 2025 में आंकड़ा 5.7 लाख के पारMCap: शेयर बाजार की तेजी में टॉप 7 कंपनियों का मुनाफा, ₹1.23 लाख करोड़ बढ़ा मार्केट कैपसाल की शुरुआत में FPIs ने निकाले 7,608 करोड़, विदेशी निवेशक रहे सतर्कMarket Outlook: इस हफ्ते बाजार में रुझान तय करेंगे मैक्रो डेटा और FII ट्रेडिंगUS Venezuela Attack: कौन हैं Nicolás Maduro? जिनके पकड़े जाने का दावा अमेरिका ने कियाWeather Update Today: उत्तर भारत में ठंड और घने कोहरे का कहर, IMD ने जारी की चेतावनीUP: लखनऊ में बनेगी AI सिटी, उत्तर प्रदेश को मिलेगा ग्लोबल टेक पहचानHealth Insurance: हेल्थ इंश्योरेंस खरीदते समय अधिकतर लोग क्या गलती करते हैं?दिल्ली की हवा इतनी खराब कैसे हुई? स्टडी में दावा: राजधानी के 65% प्रदूषण के लिए NCR व दूसरे राज्य जिम्मेदारExplainer: 50 शहरों में हिंसा, खामेनेई की धमकी और ट्रंप की चेतावनी…ईरान में आखिर हो क्या रहा है?

भारत-ऑस्ट्रेलिया का व्यापार महामारी के पहले के स्तर के पार

Last Updated- December 11, 2022 | 9:14 PM IST

भारत के साथ ऑस्टे्रलिया का कुल कारोबार महामारी के पहले के स्तर से ज्यादा हो गया है। हालांकि अभी व्यापार समझौते पर बातचीत गति पकड़ रही है।
सरकार ने शुक्रवार को घोषणा की कि वह ऑस्ट्रेलिया के साथ अंतरिम व्यापार समझौते को लेकर सहमति पर पहुंच चुकी है और अगले 30 दिन में इसे अंतिम रूप दे दिया जाएगा। उम्मीद की जा रही है कि इस समझौते से वस्तुओं और सेवाओं के दोनों देशों के आपसी कारोबार की राह की बाधाएं दूर हो सकेंगी।
यह बयान ऐसे समय आया है, जब हाल के आंकड़ों से पता चलता है कि वित्त वर्ष 2021-22 में अब तक भारत का ऑस्ट्रेलिया के साथ कुल कारोबार 17.8 अरब डॉलर पर पहुंच गया है। यह वित्त वर्ष 21 के 12.3 अरब डॉलर और वित्त वर्ष 20 के 12.6 अरब डॉलर की तुलना में ज्यादा है। यह वित्त वर्ष 19 में हुए 16.7 अरब डॉलर की तुलना में ज्यादा है और ऐसा लगता है कि यह वित्त वर्ष 10 में हुए 18 अरब डॉलर कारोबार के आंकड़े को पार कर जाएगा।  इसमें बड़ा हिस्सा ऑस्ट्रेलिया को किए गए निर्यात का है। ऑस्ट्रेलिया को 5.6 अरब डॉलर का निर्यात हुआ है, जो वित्त वर्ष 19 के 3.5 अरब डॉलर की तुलना में 60 प्रतिशत ज्यादा है। भारत ने 12.1 अरब डॉलर का आयात किया है, जो वित्त वर्ष 19 के 13.1 अरब डॉलर की तुलना में करीब 8 प्रतिशत कम है। कम आयात की वजह असमान आर्थिक रिकवरी को बताया जा रहा है, जिसके कारण स्थानीय मांग पर असर पड़ा है। हाल की आर्थिक समीक्षा के आंकड़ों को देखें तो व्यापार समझौते का दीर्घावधि असर सकारात्मक हो सकता है। 

First Published - February 15, 2022 | 11:41 PM IST

संबंधित पोस्ट