उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ | फाइल फोटो
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में राज्य सरकार ने हाल के महीनों में कई कदम उठाए हैं, जिनमें बुनियादी ढांचे का विकास, विनिर्माण (रक्षा गलियारा समेत) को बढ़ावा देने के लिए निवेश आकर्षित करना, सहकारी समितियों और पारंपरिक शिल्पों को समर्थन देना तथा 5 नवंबर को वाराणसी में देव दीपावली का आयोजन और 27 से 31 दिसंबर तक अयोध्या में राम मंदिर की दूसरी वर्षगांठ के समारोह आदि शामिल हैं।
अनुपूरक बजट 2025-26 पर चर्चा में भाग लेते हुए 24 दिसंबर को मुख्यमंत्री ने ध्यान दिलाया कि निर्भय व्यापार, कारोबारी सुगमता और कारोबारी भरोसे की वजह से किस तरह राज्य अब निवेश का प्रमुख ठिकाना बन गया है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश पर कभी ‘बिमारू’ का शर्मनाक ठप्पा लगा था, जिसे त्यागकर सख्त वित्तीय अनुशासन और सुशासन के जरिये अब वह राजस्व अधिशेष वाला राज्य बन गया है। राज्य का सकल राज्य घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) 2012-16 के 12.88 लाख करोड़ रुपये से तीन गुना होकर करीब 35-36 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। इसलिए प्रति व्यक्ति आय भी 43,000 रुपये से बढ़कर 1.20 लाख रुपये हो गई है।
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि उत्तर प्रदेश पूरी दुनिया के लिए लॉजिस्टिक्स का केंद्र बन रहा है, जहां 22 एक्सप्रेसवे (भारत के कुल एक्सप्रेसवे नेटवर्क का 60 प्रतिशत) और सबसे अधिक हवाई अड्डे (16 चालू, जिनमें 4 अंतरराष्ट्रीय भी) हैं। दिसंबर की शुरुआत में प्रदेश सरकार ने कहा कि जेवर में नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे का उद्घाटन जनवरी 2026 में होगा और यह राज्य का पांचवां अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा होगा। मुख्यमंत्री ने विधान सभा में कहा, ‘आज 16 हवाई अड्डे चालू हैं। इनमें से चार अंतरराष्ट्रीय हैं और पांचवां अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा, जो भारत का सबसे बड़ा होगा, अगले महीने जेवर में चालू किया जाएगा।‘
उन्होंने कहा कि प्रदेश में 15 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव लागू किए जा चुके हैं, जिनसे 60 लाख से अधिक युवाओं को प्रत्यक्ष रोजगार मिला है। उन्होंने 96 लाख इकाइयों वाले मजबूत एमएसएमई क्षेत्र का भी जिक्र किया, जो लगभग 2 करोड़ परिवारों का सहारा है। राज्य में कृषि वृद्धि दर 8 प्रतिशत से बढ़कर 18 प्रतिशत हो गई है। नवीकरणीय ऊर्जा को उत्तर प्रदेश तेजी से बढ़ा रहा है, जिसमें 1 गीगावॉट का सौर ऊर्जा कार्यक्रम भी शामिल है। अपराध के प्रति ‘जीरो टॉलरेंस’ की अपनी सरकार की नीति को उन्होंने कारोबार के लिए महफूज माहौल बनाने वाला सबसे बड़ा कारक बनाया। उन्होंने कहा कि सख्त कानून व्यवस्था और उद्योग क्षेत्रों के लिए 33 नीतियों की वजह से उत्तर प्रदेश वैश्विक निवेशकों के लिए ‘ड्रीम डेस्टिनेशन’ बन गया है।
17 दिसंबर को राज्य सरकार ने उत्तर प्रदेश निर्यात प्रोत्साहन नीति 2025–30 के तहत सेवा निर्यातकों के लिए एक समर्पित विपणन विकास सहायता योजना शुरू करने की घोषणा की। इस योजना के तहत सेवा निर्यातकों को अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अपनी उपस्थिति बढ़ाने के लिए वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी, जिससे उत्तर प्रदेश देश का पहला राज्य बन गया है जिसने विशेष रूप से सेवा निर्यात के लिए एक विपणन सहायता नीति लागू की है। हाल के वर्षों में उत्तर प्रदेश के सेवा क्षेत्र ने निर्यात में मजबूत वृद्धि दर्ज की है और वर्तमान में राज्य के जीएसडीपी में लगभग 45 प्रतिशत का योगदान करता है।
मुख्यमंत्री ने कहा है कि उत्तर प्रदेश का लक्ष्य 2029-30 तक 1 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनना है। उन्होंने कहा कि भारत को 2027 तक 5 ट्रिलियन डॉलर और 2047 तक 30 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के लक्ष्य में उत्तर प्रदेश की महत्वपूर्ण भूमिका है।
मुख्यमंत्री ने विदेशी निवेश प्रवाह को तेज करने के प्रयासों की उच्च-स्तरीय समीक्षा बैठक की 5 दिसंबर को अध्यक्षता की और जोर दिया कि ‘गति, स्थिरता और समर्थन’ नए उत्तर प्रदेश की पहचान होनी चाहिए। अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को बताया कि राज्य ने अप्रैल से सितंबर 2025-26 के बीच 68.3 करोड़ डॉलर का विदेशी निवेश प्राप्त किया है, जिससे अक्टूबर 2019 से अब तक कुल प्रत्यक्ष विदेशी निवेश 275.4 करोड़ डॉलर हो गया है। राज्य ने चालू वित्तीय वर्ष में अब तक 5,963 करोड़ रुपये का प्रवाह दर्ज किया है, जो पिछले वर्षों की तुलना में तेज वृद्धि को दर्शाता है। एफडीआई-एफसीआई-फॉर्चून 500 नीति 2023 के तहत अब तक 11 आवेदकों ने 13,610 करोड़ रुपये मूल्य के प्रस्ताव प्रस्तुत किए हैं, जबकि 22 अन्य ने कुल 17,810 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव दिए हैं।
लगभग 56,000 करोड़ रुपये के निवेश वाले 29 आवेदन प्रक्रियाधीन हैं। जापान, अमेरिका, बेल्जियम, ब्रिटेन, पोलैंड और सिंगापुर राज्य के प्रमुख निवेश साझेदार बने हुए हैं। जापान, दक्षिण कोरिया, ताइवान, जर्मनी, फ्रांस, सिंगापुर और खाड़ी देशों के लिए देश-विशिष्ट निवेश डेस्क सक्रिय रूप से काम कर रहे हैं, जिनका दूतावासों, उच्चायोगों और उद्योग समूहों के साथ निरंतर संवाद जारी है। निवेशकों के साथ 100 से अधिक बैठक की गई हैं, जबकि जापान एक्सटर्नल ट्रेड ऑर्गेनाइजेशन और सिंगापुर इंटरनैशनल चैंबर ऑफ कॉमर्स जैसी संस्थाओं के साथ समझौते ठोस अवसरों में बदल रहे हैं।
राज्य सरकार के मुताबिक 16 दिसंबर को मुख्यमंत्री ने टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन से मुलाकात की, जहां टाटा संस ने राज्य में एक विश्वस्तरीय टाटा-एआई ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (जीसीसी) बनाने का प्रस्ताव रखा। लखनऊ, नोएडा और वाराणसी में टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) इकाइयों के विस्तार और कर्मचारियों की संख्या बढ़ाने पर भी चर्चा हुई, जिससे राज्य में डिजिटल प्रतिभा बहुत बढ़ जाएगी।
राज्य सरकार ने कहा कि टाटा समूह मोबाइल उपकरणों, इलेक्ट्रॉनिक घटकों और अन्य हाई-टेक उत्पादों के विनिर्माण में निवेश बढ़ाना चाहता है। बैठक में उत्तर प्रदेश रक्षा औद्योगिक गलियारे पर भी बात हुई और टाटा समूह ने राज्य में झांसी समेत विभिन्न रक्षा औद्योगिक केंद्रों में ड्रोन, मिसाइल तथा रक्षा वाहन निर्माण में निवेश बढ़ाने का प्रस्ताव रखा। टाटा संस ने मथुरा–वृंदावन क्षेत्र में आठ कुंडों के पुनरुद्धार का कार्य हाथ में लिया है और काम दिसंबर 2025 में शुरू होने की उम्मीद है। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की जयंती पर 25 दिसंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लखनऊ में राष्ट्रीय प्रेरणा स्थल का उद्घाटन किया। दुबग्गा के बसंत कुंज योजना क्षेत्र में गोमती नदी के किनारे 65 एकड़ में फैला यह परिसर 230 करोड़ रुपये की लागत से बनाया गया है।
अधिकारियों ने बताया कि यहां पहले 6.5 लाख टन कचरे का अंबार था, जिसे साफ कर मियावाकी तकनीक से लगभग 50,000 पेड़ लगाए गए और इस स्थान को हरित क्षेत्र में बदल दिया गया। परिसर के केंद्र में संघ परिवार के तीन प्रमुख नेताओं- श्यामा प्रसाद मुखर्जी, दीनदयाल उपाध्याय और वाजपेयी- की 65 फुट ऊंची कांस्य प्रतिमाएं स्थापित हैं।
हाल ही में सिफी टेक्नॉलजीज के चेयरमैन और प्रबंध निदेशक राजू वेगेसना ने मुख्यमंत्री से मुलाकात की और लखनऊ तथा नोएडा में प्रस्तावित ‘एआई सिटीज’ के विकास और एआई से डिजिटल परिवर्तन पर चर्चा की। वेगेसना ने मुख्यमंत्री को बताया कि सिफी ने उत्तर प्रदेश में मुख्य रूप से अत्याधुनिक डेटा केंद्र पर पिछले पांच साल में 12,000 करोड़ रुपये से ज्यादा लगाए हैं और अगले तीन साल में निवेश दोगुना करने की उसकी योजना है।
युवा सहकार सम्मेलन को संबोधित करते हुए 21 दिसंबर को मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार ‘प्रति जिला एक सहकारी बैंक’ पर काम कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछली सरकार की ‘एक जिला, एक माफिया’ संस्कृति से सहकारी क्षेत्र का पतन हुआ और किसानों की पूंजी फंस गई। उन्होंने कहा, ‘2017 से पहले जिला सहकारी बैंकों की स्थिति बेहद खराब थी। 16 बैंकों के लाइसेंस डिफॉल्टर करार देकर रद्द कर दिए गए थे। मगर भाजपा सरकार ने धीरे-धीरे इन 16 बैंकों में जमा किसानों के 4,700 करोड़ वापस कर दिए। आज ये बैंक स्वस्थ हैं और अपने सदस्यों तथा किसानों की समृद्धि में योगदान कर रहे हैं।‘
उत्तर प्रदेश सरकार देश के आयुष क्षेत्र में राज्य की स्थिति मजबूत करने के लिए नई नीति पेश करने जा रही है। नई आयुष नीति में निवेशकों को आकर्षित करने के लिए पूंजी सब्सिडी, भूमि खरीद पर स्टाम्प शुल्क से छूट और ग्रीनफील्ड परियोजनाओं के लिए विशेष रियायतें शामिल हैं। नीति के तहत पीपीपी मॉडल पर अस्पतालों और बुनियादी ढांचे के विकास को बढ़ावा दिया जाएगा।
आदित्यनाथ ने ‘वन डिस्ट्रिक्ट, वन क्यूजीन’ (ओडीओसी) को लागू करने पर भी जोर दिया ताकि हर जिले को उसकी खास पकवान विरासत से पहचान दी जा सके। उन्होंने एक उच्च-स्तरीय बैठक में कहा, ‘वन डिस्ट्रिक्ट, वन प्रोडक्ट’ (ओडीओपी) पहल, जो अब ‘ब्रांड उत्तर प्रदेश’ की विशेषता है, अब ओडीओपी 2.0 की ओर बढ़ रही है, जो स्थानीय उद्योगों, स्वरोजगार और निर्यात को और बढ़ावा देगी।’ बैठक में बताया गया कि 2018 में शुरू होने के बाद से ओडीओपी पहल उत्तर प्रदेश के निर्यात और स्थानीय उद्योगों की रीढ़ बन गई है।
इसके तहत 1.25 लाख से अधिक टूलकिट वितरित किए गए हैं, 6,000 करोड़ रुपये से अधिक के ऋण स्वीकृत किए गए हैं और 8,000 से अधिक उद्यमियों को प्रत्यक्ष विपणन समर्थन मिला है। 30 कॉमन फैसिलिटी सेंटर (सीएफसी) को मंजूरी दी गई है और 44 ओडीओपी उत्पादों को जियो टैग प्रदान किए गए हैं। अब ओडीओपी उत्पाद प्रमुख ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर बेचे जा रहे हैं और राज्य के कुल निर्यात का 50 प्रतिशत से अधिक हिस्सा बनाते हैं।
छह दिसंबर को मुख्यमंत्री ने कहा कि अयोध्या में राम मंदिर की आधारशिला, उसका निर्माण और हाल ही में ‘धर्म ध्वज’ का आरोहण उनके जीवन के महत्त्वपूर्ण क्षण रहे हैं। उससे पहले 2 दिसंबर को उत्तर प्रदेश कैबिनेट ने अयोध्या में प्रस्तावित मंदिर संग्रहालय के विस्तार को मंजूरी दी, जिसमें टाटा संस को 52 एकड़ भूमि पर परियोजना विकसित और संचालित करने का अनुबंध दिया गया। केंद्र सरकार, राज्य सरकार और टाटा संस के बीच भूमि आवंटन के लिए एक समझौता ज्ञापन 3 सितंबर 2024 को हस्ताक्षरित हुआ था।
पहले राज्य ने अयोध्या के मंजहा जमथरा गांव में 25 एकड़ नजूल भूमि 90 वर्षों के लिए हस्तांतरित करने को मंजूरी दी थी। हालांकि, टाटा संस ने परियोजना के पैमाने और वास्तुशिल्पीय भव्यता के अनुरूप अधिक भूमि की मांग की। इसके अनुसार, अतिरिक्त 27.102 एकड़ भूमि अब आवास एवं शहरी नियोजन विभाग से पर्यटन विभाग को हस्तांतरित की जाएगी, जिससे कुल परियोजना क्षेत्र 52.102 एकड़ हो जाएगा।
अयोध्या में इस वर्ष श्री राम जन्मभूमि मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा के बाद से आगंतुकों की संख्या में भारी वृद्धि हुई है, जहां प्रतिदिन अनुमानित 2 से 4 लाख लोग पहुंच रहे हैं। उत्तर प्रदेश सरकार ने कहा कि 2025 के अंत तक अयोध्या में 50 करोड़ तक लोगों आने की उम्मीद है। सरकारी बयान के अनुसार, इस वर्ष जनवरी से जून के बीच लगभग 23 करोड़ लोग अयोध्या आए। सरकार ने कहा कि अयोध्या में बढ़ता पर्यटन प्रवाह स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत कर रहा है, जो उत्तर प्रदेश के जीएसडीपी में अनुमानित 1.5 प्रतिशत का योगदान कर रहा है।
शहर का वार्षिक कारोबार आने वाले वर्षों में 4 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान है। 15 नवंबर को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लखनऊ स्थित ब्रह्मोस एयरोस्पेस इकाई में निर्मित ब्रह्मोस मिसाइलों की पहली खेप को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। लगभग 300 करोड़ रुपये की लागत से 11 मई को शुरू हुई यह अत्याधुनिक इकाई अब पूरी तरह काम कर रही है और उत्तर प्रदेश रक्षा गलियारे की सबसे महत्त्वाकांक्षी परियोजनाओं में शुमार है। उत्तर प्रदेश सरकार ने कारखाने के लिए 80 हेक्टेयर भूमि नि:शुल्क प्रदान की थी।
आदित्यनाथ ने 17 नवंबर को कहा कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान उत्तर प्रदेश के युवाओं द्वारा विकसित ड्रोन ने पाकिस्तान को हैरान कर दिया। उन्होंने कहा, ‘ऑपरेशन सिंदूर’ ने भारत की ताकत को दुनिया के सामने प्रदर्शित किया। उत्तर प्रदेश राष्ट्र की सशस्त्र सेनाओं के साथ मजबूती से खड़ा रहा, रक्षा क्षमताओं में महत्वपूर्ण योगदान दिया। ब्रह्मोस मिसाइल लखनऊ में निर्मित हो रही है, जिसके लिए राज्य सरकार ने भूमि नि:शुल्क प्रदान की है।‘
उन्होंने कहा कि जब ब्रह्मोस इकाई पूरी क्षमता से काम करना शुरू करेगी, तो उत्तर प्रदेश को सालाना 300 से 500 करोड़ रुपये जीएसटी प्राप्त होने की उम्मीद है।