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अदाणी पर विपक्ष की चढ़ाई, मामले की जेपीसी से जांच की मांग

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Last Updated- February 02, 2023 | 11:07 PM IST

पुराने संयुक्त प्रगतिशील मोर्चे के तहत आने वाले दलों तथा आम आदमी पार्टी  ने आपसी दुश्मनी और प्रतिद्वंद्विता को भुलाकर एकजुटता दिखाते हुए गुरुवार को मांग की कि अदाणी परिवार के नेतृत्व वाले कारोबारी समूह के खिलाफ हिंडनबर्ग रिपोर्ट में लगाए गए आरोपों की देश के मुख्य न्यायाधीश से जांच कराई जाए अथवा संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) इस पर चर्चा करे। उन्होंने सरकार से यह भी कहा है कि वह इस कारोबारी समूह के साथ अपने रिश्ते उजागर करे।
सरकार ने इस पर अपने वरिष्ठ मंत्रियों और नेताओं के माध्यम से प्रतिक्रिया दी। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि देश की अर्थव्यवस्था अदाणी समूह के खिलाफ लगे आरोपों की बदौलत शेयर बाजार में मची उथलपुथल से निकल जाएगी। परंतु संसद में और उसके बाहर यह स्पष्ट था कि विपक्ष अदाणी मामले में नियामक एजेंसियों की भूमिका के खुलासे के लिए सरकार पर पूरा जोर लगा रहा था।
दिल्ली के विजय चौक से विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा, ‘हम इस पर चर्चा चाहते थे। हमारे नोटिस खारिज कर दिए गए। हम जब अहम मुद्दे उठाते हैं तो उन पर चर्चा के लिए समय नहीं दिया जाता। एलआईसी, स्टेट बैंक तथा अन्य सरकारी बैंकों में गरीबों का पैसा जमा है जो चुनिंदा कंपनियों को दिया जाता है। या तो संयुक्त संसदीय समिति या सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के निगरानी वाली टीम को इसकी जांच करनी चाहिए। हमने नियम 267 के तहत सस्पेंशन ऑफ बिज़नेस नोटिस भी दिया था ताकि एलआईसी,  सरकारी बैकों और वित्तीय संस्थानों द्वारा उन कंपनियों में निवेश पर चर्चा हो सके जिनका बाजार मूल्य घट रहा है और करोड़ों भारतीयों की मेहनत की कमाई खतरे में हैं।’
सस्पेंशन ऑफ बिज़नेस नोटिस के माध्यम से उच्च सदन के किसी सूचीबद्ध विषय की जगह अन्य विषय पर चर्चा की मांग की जाती है। सरकार पर विपक्ष के साझा हमले से लगता है कि सदन की गतिविधि और चर्चाएं थम जाएंगी। इसके बाद संसद परिसर में समान सोच वाले विपक्षी दलों ने बैठक करके सरकार से जवाब तलब करने की रणनीति पर चर्चा की।
तृणमूल कांग्रेस और सपा जैसे दल अतीत में कांग्रेस के नेतृत्व वाले विपक्षी खेमे से बचते रहे हैं लेकिन इस बार उन्होंने भी सक्रिय भागीदारी की। मामले का नेतृत्व कांग्रेस ने किया और तमाम नेता राज्य सभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के कमरे में मिले।
इनमें कांग्रेस के अलावा द्रविड़ मुन्नेत्र कषगम, तृणमूल कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, जनता दल यूनाइटेड, शिव सेना, माकपा, राकांपा, इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग, नैशनल कॉन्फ्रेंस, आम आदमी पार्टी और केरल कांग्रेस शामिल थे। राजद का कोई नेता नहीं था लेकिन पार्टी नेताओं ने कहा कि वे कांग्रेस के साथ हैं।
नेताओं ने एक वक्तव्य जारी करके कहा कि शेयर बाजार में गिरावट अमृत काल का महा घोटाला है। उन्होंने इस मामले पर सरकार की खामोशी पर भी सवाल किया।
आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह ने गौतम अदाणी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ‘सबसे करीबी मित्र’ करार दिया और कहा, ‘मोदी सरकार इतने बड़े घोटाले पर खामोश क्यों है? सरकार इसलिए चुप है कि इसमें शामिल व्यक्ति प्रधानमंत्री मोदी का सबसे करीबी मित्र है।
अदाणी विदेशों में फर्जी कंपनियां खोलते हैं, अपनी ही कंपनियों के करोड़ों रुपये के शेयर खरीदते हैं और बैंकों से लाखों करोड़ का कर्ज लेते हैं। यह अमृत काल में महाघोटाला है।’ सपा सांसद राम गोपाल यादव ने कहा कि एलआईसी में निवेश करने तथा बैंकों में पैसा रखने वाले लोग डरे हुए हैं कि कहीं सब गंवाना न पड़ जाए।
बाद में खरगे ने दोबारा संवाददाता सम्मेलन में कहा कि विपक्ष सरकार पर दबाव बनाता रहेगा और कल 10 बजे सुबह पुन: बैठक होगी।
विपक्ष का सवाल यह है कि रिजर्व बैंक और सेबी जैसे नियामकों ने उन मसलों पर कदम क्यों नहीं उठाए जो हिंडनबर्ग रिपोर्ट में उठाए गए हैं। खरगे ने कहा, ‘आम लोगों का पैसा स्टेट बैंक और पंजाब नैशनल बैंक जैसे बैंकों में जमा है। लाखों लोगों के पास एलआईसी की पॉलिसी हैं। एक निजी कारोबारी घराने को इन लोगों के पैसे से खिलवाड़ करने का अधिकार किसने दिया?
अदाणी की कंपनियों में जनता का कितना पैसा लगा है? इस पैसे की निगरानी कौन कर रहा है? हम किसी व्यक्ति पर हमला नहीं कर रहे। हम जानना चाहते हैं कि भारत जैसे देश में यह कैसे हुआ?’ कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने कहा कि सरकार अदाणी मामले में बुरी तरह उलझ गई है। वह संसद में इस विषय का जिक्र तक नहीं चाहती है और यही कारण है कि आज दोनों सदन की कार्यवाही स्थगित कर दी गई। उन्होंने कहा कि विपक्ष को इस महा घोटाले में जेपीसी की मांग का अवसर तक नहीं दिया गया।
रमेश ने अदाणी समूह पर कटाक्ष करते हुए ट्वीट किया, ‘अदाणी का नैतिक रूप से सही होने की बात कहना वैसे ही है जैसा उनके प्रधान मेंटर द्वारा विनम्रता, सादगी और विशाल हृदयता के सद्गुणों का उपदेश देना। यह ‘एंटायर पॉलिटिकल साइंस’ है।’
कांग्रेस के संगठन महासचिव के.सी. वेणुगोपाल ने सरकार पर लोगों की बचत की रक्षा करने के प्रति असंवेदनशील होने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि जनभावनाओं को ध्यान में रखते हुए कांग्रेस आगामी छह फरवरी को जिला स्तर पर भारतीय जीवन बीमा निगम और भारतीय स्टेट बैंक के कार्यालयों के बाहर
प्रदर्शन करेगी।
कांग्रेस के मीडिया एवं प्रचार विभाग के प्रमुख पवन खेड़ा ने दावा किया, ‘मोदी जी, बहुत मेहनत करके जो गुब्बारा फुलाया, उसकी हवा निकल गई। सारे नियम कानून ताक पर रखकर मोदी जी ने एक आदमी पाल-पोसकर बड़ा किया। यह मोदी जी और अदाणी जी के बीच का मामला होता तो हमें क्या आपत्ति थी। यह मामला हर भारतवासी की खून-पसीने की कमाई से जुड़ गया है। यह मामला सबकी जेब तक पहुंच गया।’

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First Published - February 2, 2023 | 11:07 PM IST

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