facebookmetapixel
Advertisement
Gold, Silver Price Today: एमसीएक्स पर सोना ₹2,065 की गिरावट के साथ खुला, चांदी भी फिसली₹929 का शेयर उड़ेगा ₹1,880 तक? इस IT Stock पर ब्रोकरेज ने लगाया बड़ा दांवकार से लेकर बाइक तक बंपर बिक्री, जानें मोतीलाल ओसवाल ने किस Auto Stock पर दी BUY की सलाहFractal Analytics vs Aye Finance IPO: किसमें कमाई का मौका, किसमें छुपा है बड़ा खतरा?Stocks to Watch Today: Titan, BSE, Aurobindo समेत ये शेयर रहेंगे फोकस मेंStock Market Today: ओपन होते ही बाजार में रफ्तार, सेंसेक्स 144 अंक बढ़त के साथ खुला, निफ्टी 25,900 के पारलोक सभा अध्यक्ष के खिलाफ प्रस्ताव लाने की तैयारी में विपक्ष, राहुल गांधी की मांग पर अड़ी विपक्षी पार्टियां16वें वित्त आयोग की नई अंतरण व्यवस्था: राज्यों के लिए फायदे-नुकसान और उठते सवालAI Impact Summit 2026: पंजीयन के नाम पर वसूली से बचें, इंडिया AI मिशन ने जारी किया अलर्टहिंद महासागर में भारत का बड़ा कदम: सेशेल्स के लिए 17.5 करोड़ डॉलर के आर्थिक पैकेज का ऐलान

पूर्वोत्तर में हुई है अभूतपूर्व वृद्धि, ₹4.48 लाख करोड़ के निवेश का संकल्प लिया गया: ज्योतिरादित्य सिंधिया

Advertisement

प्रधानमंत्री का विजन था कि पूर्वोत्तर हमारी आर्थिक वृद्धि का इंजन बने, और पिछले 18 महीनों में मेरा अनुभव असाधारण रहा है

Last Updated- December 21, 2025 | 10:50 PM IST
Jyotiraditya Scindia

संचार मंत्री के रूप में सुर्खियों में रहने वाले ज्योतिरादित्य सिंधिया पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्री की अतिरिक्त भूमिका में भी उतने ही सक्रिय हैं। पिछले दिनों गुलवीन औलख और निवेदिता मुखर्जी के साथ बातचीत में सिंधिया ने इस बात पर जोर दिया कि पूर्वोत्तर में 4.48 लाख करोड़ रुपये की निवेश का संकल्प लिया गया है और यह क्षेत्र भारतीय अर्थव्यवस्था की तुलना में तेजी से वृद्धि कर रहा है। प्रमुख अंश:

इस समय जबकि चारों ओर सुधारों की चर्चा है, तो ऐसे में गठन के 25 वर्ष बाद पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्रालय के लिए आगे की क्या राह है?

वर्ष 2014 से 2025 तक प्रधानमंत्री का विजन न केवल उत्तर पूर्वी भारत और अष्ट लक्ष्मी के विकास तक सीमित नहीं था, बल्कि यह सुनिश्चित करना भी था कि पूर्वोत्तर भारत देश के भीतर और विश्व के सामने विकास और प्रगति के भारतीय प्रतिमान का नेतृत्व करे। पिछले 11 वर्षों में सकल बजटीय सहायता का लगभग 10 प्रतिशत, यानी लगभग 24,800 करोड़ रुपये सालाना का निवेश पूर्वोत्तर में हुआ। यह संख्या अब बढ़कर 1.02 लाख करोड़ रुपये सालाना हो गई है। इस अवधि में पूर्वोत्तर को दिए गए अनुदान और वितरण लगभग 6 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गए हैं। ये निवेश बड़ा बदलाव लाने वाले हैं।

प्रधानमंत्री का विजन था कि पूर्वोत्तर हमारी आर्थिक वृद्धि का इंजन बने, और पिछले 18 महीनों में मेरा अनुभव असाधारण रहा है। जहां दुनिया की जीडीपी 2.5 फीसदी की दर से बढ़ी वहीं भारत ने गत तिमाही में 8.2 फीसदी की दर से वृद्धि हासिल की है। हमारी एक दशक की औसत वृद्धि दर करीब 6.8 फीसदी रही है। इसका अर्थ है कि हम विश्व औसत से लगभग 2.5 गुना, या करीब तीन गुना तेज बढ़ रहे हैं। पूर्वोत्तर की बात करें तो सभी आठ राज्यों की दशक भर की सालाना औसत वृद्धि दर यानी सीएजीआर 10 से 12 प्रतिशत है। यानी पूर्वोत्तर भारत की तुलना में लगभग 1.6 गुना और विश्व की तुलना में करीब 5 गुना तेजी से बढ़ रहा है।

क्या आपको लगता है कि यह वृद्धि दर बरकरार रहेगी?

मैंने एक दशक का औसत लिया है जो बताता है कि हमारी अर्थव्यवस्था किस गति से और किस दिशा में बढ़ रही है। यह बहुत परिवर्तनकारी रही है। प्रधानमंत्री इस बदलाव के अगुआ रहे हैं। न केवल निवेश के माध्यम से बल्कि पूर्वोत्तर के साथ संवाद और सहभागिता के माध्यम से भी। पिछले साढ़े ग्यारह वर्षों में प्रधानमंत्री लगभग 75 बार पूर्वोत्तर गए हैं। उन्होंने भारत सरकार के सभी मंत्रियों के लिए पूर्वोत्तर का दौरा करना अनिवार्य भी कर दिया है, और अब तक क्षेत्र में मंत्रियों के लगभग 700 दौरे हो चुके हैं। यही कहानी खुद बयां करती है।

पूर्वोत्तर को भारत का और अधिक अभिन्न अंग बनाने की क्या योजना है? क्योंकि ऐसी घटनाएं घटी हैं जिनके चलते वहां के लोगों को यह लगा है कि वे भारत का हिस्सा नहीं हैं।

मैं आपसे सहमत नहीं हूं क्योंकि मुझे लगता है कि आप ऐसे व्यक्ति की दृष्टि से बात कर रही हैं जिसने पूर्वोत्तर में समय नहीं बिताया है। आपको वहां जाकर समय बिताने की आवश्यकता है। बीते 19 महीनों में मैं 21 बार पूर्वोत्तर गया हूं। इस वर्ष के आरंभ में मैंने योजना बनाई कि मैं हर महीने तीन से चार दिन एक खास राज्य में बिताऊंगा। मैं न केवल वहां के मुख्यमंत्री और मंत्रियों से मिलूंगा बल्कि राज्य के बारे में और गहराई से जानूंगा। इसलिए अक्टूबर में मैं अरुणाचल प्रदेश में, नवंबर में मेघालय में और दिसंबर में नगालैंड में रहा। अगले महीने मैं त्रिपुरा या असम जाऊंगा। इन आठ राज्यों में 4.5 करोड़ लोग रहते हैं। इस आबादी का 75 फीसदी हिस्सा 30 से कम आयु का है। हमारे पास बड़ा जनांकिकी लाभ है। इन सभी राज्यों की औसत साक्षरता दर 93 फीसदी है। बीते 18 महीनों में मैंने तीन बड़े कार्यक्रम करवाए हैं जिनका उद्देश्य वही है जो आपने जिक्र किया।

गत वर्ष दिसंबर में गृह मंत्री ने और मैंने अगरतला में बैंकिंग समिट की जहां हमने निजी क्षेत्र और सरकारी क्षेत्र के बैंकों के साथ पूर्वोत्तर में ऋण को मजबूत करने का प्रयास किया। इसके लिए खास लक्ष्य तय किए और मैं वित्तीय सेवा विभाग तथा वित्त मंत्री के साथ समन्वय कर रहा हूं ताकि उस क्षेत्र में बैंकिंग पाइपलाइन और अधोसंरचना को बेहतर बनाया जा सके। इस वर्ष मई में लगभग 10 महीनों तक भारत के नौ शहरों में रोड शो आयोजित करने के बाद, जिनमें प्रत्येक रोड शो में दो मुख्यमंत्री शामिल थे, आजाद भारत के इतिहास में पहली बार हमने दिल्ली में पूर्वोत्तर निवेश शिखर सम्मेलन आयोजित किया।

इस सम्मेलन की शोभा प्रधानमंत्री ने भी बढ़ाई। इसमें सभी आठ राज्यों के लिए लगभग 4.48 लाख करोड़ रुपये मूल्य के आशय पत्र और समझौता ज्ञापन तैयार किए गए। इस 4.48 लाख करोड़ रुपये में से प्रति राज्य को औसतन लगभग 30,000 से 40,000 करोड़ रुपये का निवेश मिला है। अब मेरा ध्यान जमीनी स्तर पर इन निवेशों को वास्तविकता में बदलने पर है। लगभग 35,000 से 40,000 करोड़ रुपये का निवेश हो चुका है। मैं राज्यों के मुख्यमंत्रियों से उनकी आवश्यकताओं पर लगातार संवाद कर रहा हूं।

उद्योग जगत को पूर्वोत्तर से जोड़ने के लिए क्या योजना है? टाटा ने ओएसएटी (आउटसोर्स्ड सेमीकंडक्टर असेंबली ऐंड टेस्ट) संयंत्र की स्थापना की है। दूसरों का क्या?

यह दरअसल राज्य सरकारों का विषय है। इसके बावजूद मेरा काम यह तय करना है कि निवेश आए और निवेशकों की समस्याओं का समाधान हो। मैंने हर राज्य के लिए एक अलग लॉजिस्टिक्स पाइपलाइन तैयार की है और 12 ऐसे मानकों को देखा है जिन्हें पूरा करना जरूरी है ताकि प्रत्येक राज्य में एक कुशल लॉजिस्टिक्स नेटवर्क तैयार हो सके। मैंने सभी आठ राज्यों का तुलनात्मक अध्ययन किया कि कहां शर्तों को पूरा किया गया है और कहां गुंजाइश बाकी है।

मैं इसकी निगरानी पखवाड़े के आधार पर करता हूं और आपको यह बताते हुए मुझे प्रसन्नता हो रही है कि 96 मानकों में से हमने 65 से 68 को पूरा कर लिया है और उम्मीद है कि जनवरी में होने वाली उत्तर पूर्व परिषद की बैठक के पहले इन्हें पूरा कर लिया जाएगा। मैं तय करना चाहता था कि हम पूर्वोत्तर को लेकर केवल राज्य केंद्रित नजरिया न रखें। गृह मंत्री ने निर्णय लिया है कि हम आठ उच्चस्तरीय कार्य बलों की स्थापना करेंगे जिनकी अध्यक्षता एक मुख्यमंत्री करेंगे। इनमें तीन से चार अन्य मुख्यमंत्री सदस्य के रूप में होंगे। यह कार्य बल कृषि, पर्यटन, अधोसंरचना, लॉजिस्टिक्स, निर्यात और आयात, प्रोटीन, हथकरघा और हस्तशिल्प पर केंद्रित होंगे।

भारत संचार निगम लिमिटेड (बीएसएनएल) पूर्वोत्तर का अभिन्न हिस्सा है। आप कैसे सुनिश्चित करेंगे कि बीएसएनएल को बड़ा अवसर मिल सके?

(हंसते हुए) मैं बीएसएनएल का मंत्री नहीं हूं, मैं दूरसंचार मंत्री हूं । डिजिटल भारत निधि के अंतर्गत हमारे पास 4 जी सेचुरेशन की योजना है। मैं साप्ताहिक आधार पर उन टॉवरों की संख्या की निगरानी करता हूं जिन्हें लगाया जाना है। हम अगले चार से पांच महीनों में 100 प्रतिशत 4 जी सेचुरेशन योजना पर काम कर रहे हैं। मैं इसे केवल पूर्वोत्तर तक सीमित नहीं करने वाला, बल्कि पूरे भारत में लागू करने वाला हूं।

Advertisement
First Published - December 21, 2025 | 10:50 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement