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SRA: झोपड़पट्टी पुनर्वास फ्लैट ट्रांसफर शुल्क में 50 प्रतिशत की कमी

मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की अध्यक्षता में हुई राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में झोपड़पट्टी पुनर्वास में फ्लैट ट्रांसफर शुल्क 50 फीसदी कम करने का फैसला लिया गया।

Last Updated- December 11, 2023 | 10:46 AM IST
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महाराष्ट्र सरकार झोपड़पट्टी में रहने वाले को नए साल के पहले ही खास उपहार दिया है। राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में राज्य सरकार ने झोपड़पट्टी पुनर्वास योजना (एसआरए) के तहत बनने वाले फ्लैट के ट्रांसफर की रकम में 50 फीसदी कटौती करने का निर्णय लिया है। एसआरए के तहत बनाएं गए घरों को अब 7 साल के बाद बेचने की अनुमति देने की घोषणा सरकार पहले ही कर चुकी है।

मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की अध्यक्षता में हुई राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में झोपड़पट्टी पुनर्वास में फ्लैट ट्रांसफर शुल्क 50 फीसदी कम करने का फैसला लिया गया। सरकार के इस महत्वपूर्ण निर्णय के बाद झोपड़पट्टीवासियों को फ्लैट ट्रांसफर के लिए एक लाख के बजाय अब 50 हजार शुल्क लिया जाएगा।

सरकार के इस निर्णय से मुंबई सहित एमएमआर क्षेत्र के लाखों झोपड़पट्टी वासियों को फायदा होगा। गौरतलब है कि एसआरए योजना के तहत निर्माणाधीन इमारत के फ्लैट का ट्रांसफर मुफ्त किया जाता है, लेकिन स्टाम्प ड्यूटी के रुप में एक लाख रुपए देने पड़ते हैं। गरीब झोपड़पट्टीवासियों को झोपड़पट्टी पुनर्वास फ्लैट निःशुल्क उपलब्ध कराए जाते हैं ।

उप मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़णवीस ने कुछ दिनों पहले मुंबई में सहकारी आवास समितियों के सम्मेलन में इस संबंध में घोषणा की थी ।

पिछले विधानसभा अधिवेशन के दौरान उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फड़णवीस ने एसआरए में सुधार का विधेयक पेश किया था, विधेयक के चर्चा के दौरान फड़णवीस ने कहा था कि एसआरए के तहत जिन लोगों को घर मिला है, उन्हें ट्रांसफर करने में दिक्कतें आ रही थीं। इन दिक्कतों को दूर करने का निर्णय लिया गया है। सरकार सिंगल विंडो सिस्टम भी लागू कर सकती है।

फड़णवीस ने कहा कि एसआरए के तहत बन रही तमाम परियोजनाएं रुकी पड़ी हैं, जिसे गति देने के लिए इस विधेयक में कई सारे उपाय किए गए हैं। साथ ही उन लोगों को भी राहत देने का प्रस्ताव है, जिन्हें एसआरए के घरों को बेचने में परेशानी आती है।

विधान परिषद में फड़णवीस ने कहा कि अगर झोपड़ीधारक अपने बेटे या पोते के नाम पर ट्रांसफर करना चाहता है, तो 200 रुपये ट्रांसफर फीस रखी गई है। अगर किसी दूसरे को बेच रहा है, तो इस शुल्क को 50,000 रुपये कर दिया गया है।

सरकार ने सात साल के बाद बेचने या ट्रांसफर करने का निर्णय लिया है। भविष्य में जरूरत पड़ेगी, तो इसे पांच साल भी कर सकते है। पहले एसआरए के तहत बने घरों को 10 साल के बाद बेचने के लिए स्टैंप ड्यूटी के बराबर राशि देनी पड़ती थी या 1 लाख रुपये अदा करने पड़ते थे।

First Published - November 30, 2023 | 7:31 PM IST

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