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जाति जनगणना को राष्ट्रीय जनगणना में शामिल किया जाएगा: केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव

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‘कांग्रेस और उसका INDIA गठबंधन जाति जनगणना को केवल एक राजनीतिक उपकरण की तरह इस्तेमाल कर रहे हैं।’

Last Updated- April 30, 2025 | 5:27 PM IST
Ashwini Vaishnaw
प्रतीकात्मक तस्वीर

सूचना और प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि जाति जनगणना को अब राष्ट्रीय जनगणना का हिस्सा बनाया जाएगा। कैबिनेट की प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए, वैष्णव ने कहा,  “कैबिनेट की राजनीतिक मामलों की समिति (CCPA) ने निर्णय लिया है कि आगामी जनगणना में जातिगत विवरण को शामिल किया जाएगा।”

जाति जनगणना पर हो रही चर्चा पर टिप्पणी करते हुए, उन्होंने विपक्षी इंडिया गठबंधन की आलोचना की और कहा:  “यह बात सभी को समझ में आ चुकी है कि कांग्रेस और उसका INDIA गठबंधन जाति जनगणना को केवल एक राजनीतिक उपकरण की तरह इस्तेमाल कर रहे हैं। कुछ राज्यों ने जातियों की गिनती के लिए सर्वेक्षण कराए हैं। हालांकि कुछ राज्यों ने यह कार्य ठीक से किया, लेकिन कुछ राज्यों ने इसे केवल राजनीतिक लाभ के लिए और अपारदर्शी तरीके से किया।”

उन्होंने आगे कहा:  “ऐसे सर्वेक्षणों से समाज में संदेह की स्थिति उत्पन्न हुई। हमारे सामाजिक ताने-बाने को राजनीति से प्रभावित न होने देने के लिए, जाति गिनती को सर्वे के बजाय जनगणना में पारदर्शिता के साथ शामिल किया जाना चाहिए।”

2021 से स्थगित राष्ट्रीय जनगणना इस वर्ष हो सकती है शुरू

केंद्र सरकार के अनुसार, 2021 की जनगणना कोविड-19 महामारी के कारण टल गई थी, और अब सरकार इस वर्ष जनगणना फिर से शुरू करने की तैयारी में है। यह विलंब भारत की पारंपरिक दशकवार जनगणना प्रक्रिया में एक बड़ा बदलाव है, जो 1951 से नियमित रूप से हर 10 साल में होती आ रही है।

राजनीतिक दलों, खासकर कांग्रेस पार्टी, ने लंबे समय से जातिगत जनगणना की मांग की है ताकि अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) की वास्तविक जनसंख्या का आकलन हो सके। यह मुद्दा INDIA गठबंधन के पिछले लोकसभा चुनाव अभियान का भी एक अहम हिस्सा रहा है।

वर्तमान में सरकारी नौकरियों और शैक्षणिक संस्थानों में OBC आरक्षण का आधार 1931 की जनगणना है, जिसे अब अप्रासंगिक माना जा रहा है।

2026 की परिसीमन प्रक्रिया पर भी पड़ेगा असर

जनगणना को लेकर हो रही चर्चा ने आगामी 2026 की परिसीमन प्रक्रिया पर भी ध्यान केंद्रित किया है। यह प्रक्रिया अद्यतन जनगणना डेटा के आधार पर संसद में सीटों के आवंटन को फिर से निर्धारित कर सकती है।

भारत में आखिरी जनगणना 2011 में हुई थी, जिसमें कुल जनसंख्या 1.21 अरब दर्ज की गई थी। ग्रामीण जनसंख्या 68.84% रही, जबकि शहरी जनसंख्या 31.16% थी। उत्तर प्रदेश सबसे अधिक जनसंख्या वाला राज्य रहा, जबकि लक्षद्वीप सबसे कम आबादी वाला केंद्रशासित प्रदेश था।

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First Published - April 30, 2025 | 5:08 PM IST

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