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UCC पर भाजपा को मिला आम आदमी पार्टी का सैद्धांतिक समर्थन

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शिरोमणि अकाली दल ने बुधवार को कहा कि पूरे देश में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू होने से अल्पसंख्यक और आदिवासी समुदायों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।

Last Updated- June 29, 2023 | 12:25 AM IST
BJP got principled support from Aam Aadmi Party on UCC

आम आदमी पार्टी (आप) ने समान नागरिक संहिता (UCC) को बुधवार को अपना सैद्धांतिक समर्थन दिया, लेकिन उसने कहा कि सभी हितधारकों से व्यापक विचार-विमर्श के बाद आम सहमति से ही इसे लाया जाना चाहिए। ‘आप’ के राष्ट्रीय महासचिव (संगठन) संदीप पाठक ने कहा कि सरकार को इस प्रस्ताव पर सभी हितधारकों से व्यापक विचार-विमर्श करना चाहिए जिसमें राजनीतिक दल और गैर-राजनीतिक संस्थाएं शामिल हों।

पाठक ने कहा, ‘आप सैद्धांतिक रूप से यूसीसी का समर्थन करती है। (संविधान का) अनुच्छेद 44 भी इसका समर्थन करता है।’ उन्होंने कहा कि लेकिन सरकार को यूसीसी तभी लाना चाहिए जब हितधारकों के बीच आम सहमति हो। पाठक ने कहा, ‘हमारा मानना है कि इस तरह के मुद्दों पर हमें आम सहमति से आगे बढ़ना चाहिए। हम मानते हैं कि इसे (यूसीसी को) सभी पक्षों के बीच आम सहमति बनने के बाद ही लागू किया जाना चाहिए।’

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को समान नागरिक संहिता की पुरजोर वकालत करते हुए कहा था, ‘हम देख रहे हैं यूसीसी के नाम पर लोगों को भड़काने का काम हो रहा है। एक घर में परिवार के एक सदस्य के लिए एक कानून हो, दूसरे के लिए दूसरा, तो क्या वह परिवार चल पाएगा। फिर ऐसी दोहरी व्यवस्था से देश कैसे चल पाएगा?’

अल्पसंख्यकों, आदिवासी समुदाय पर विपरीत प्रभाव होगा : अकाली दल

शिरोमणि अकाली दल ने बुधवार को कहा कि पूरे देश में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू होने से अल्पसंख्यक और आदिवासी समुदायों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।

पंजाब में विपक्षी दल ने यूसीसी को अपना ‘सैद्धांतिक’ समर्थन देने के लिए आम आदमी पार्टी (आप) की भी आलोचना की और कहा कि मंजूरी ने उसके ‘अल्पसंख्यक विरोधी चेहरे’ को उजागर कर दिया है।

एक बयान में, वरिष्ठ अकाली नेता दलजीत सिंह चीमा ने कहा कि अकाली दल ने हमेशा पूरे देश के लिए समान नागरिक संहिता का विरोध किया है और वह इस मुद्दे पर 22वें विधि आयोग के साथ-साथ संसद में भी अपनी आपत्ति दर्ज कराएगा।

उन्होंने कहा कि पार्टी का मानना है कि देश में नागरिक कानून आस्था, विश्वास, जाति और रीति-रिवाजों से प्रभावित हैं और विभिन्न धर्मों के लिए अलग-अलग हैं। चीमा ने कहा, ‘सामाजिक ताने-बाने के साथ-साथ विविधता में एकता की अवधारणा की सुरक्षा के हित में इन्हें बरकरार रखा जाना चाहिए।’ भाषा

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First Published - June 29, 2023 | 12:25 AM IST (बिजनेस स्टैंडर्ड के स्टाफ ने इस रिपोर्ट की हेडलाइन और फोटो ही बदली है, बाकी खबर एक साझा समाचार स्रोत से बिना किसी बदलाव के प्रकाशित हुई है।)

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