facebookmetapixel
Advertisement
पेपर लीक के खिलाफ कानून में संशोधन को केंद्रीय मंत्रिमंडल की मंजूरी, सोमवार को संसद में पेश होगा विधेयकभारी बारिश और बाढ़ का कहर: गुजरात में सेना ने संभाला मोर्चा, असम-महाराष्ट्र में भी हालात गंभीरचार साल के निचले स्तर पर पहुंची निजी कारोबारी गतिविधियां, महंगाई और पश्चिम एशिया तनाव से सुस्त पड़ी रफ्तारफ्रंट-रनिंग मामले में ऐक्सिस MF के पूर्व डीलर वीरेश जोशी पर 7 साल का प्रतिबंध, 3 करोड़ का जुर्माना भीरसायन क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए सरकार का बड़ा कदम, 3,030 करोड़ रुपये की ‘भव्य-रसायन’ योजना मंजूरCBDT को वित्त मंत्री की सख्त हिदायत, कहा: अभी भी 5.4 लाख अपीलें लंबित, मुकदमेबाजी रणनीति की करें समीक्षाUS Tariff on India: अमेरिका ने भारतीय वस्तुओं पर लगाया 10% टैरिफ, धारा 301 के तहत हुई कार्रवाईUpcoming IPO: देश का सबसे बड़ा हेल्थकेयर IPO ला रही मणिपाल हेल्थ, 29 जुलाई से खुलेगा इश्यूHindustan Zinc Q1 Results: दोगुने से ज्यादा बढ़ा मुनाफा, 5,469 करोड़ रुपये पर पहुंचा आंकड़ाबिना इंटरनेट चलने वाले Bitchat ऐप पर सरकार का शिकंजा, GitHub से कोड हटाने का दिया निर्देश

कर ढांचे में बदलाव से जीवन बीमा कंपनियों को राहत

Advertisement
Last Updated- March 24, 2023 | 11:21 PM IST
Insurance Portfolio

भले ही जीवन बीमा उद्योग को वित्त मंत्री द्वारा किसी तरह की राहत नहीं दी गई है, लेकिन डेट म्युचुअल फंडों पर इंडेक्सेशन लाभ के तहत दीर्घा​​व​धि पूंजीगत लाभ (LTCG) कर हटने से दीर्घाव​धि डेट योजनाओं के लिए कराधान एक समान हो सकता है। विश्लेषकों का कहना है कि इस बदलाव से बीमा उद्योग कुछ राहत महसूस कर सकता है, क्योंकि प्रति वर्ष 5 लाख रुपये निवेश के तहत कर-मुक्त प्रतिफल चाहने वाले ग्राहक अब जीवन बीमा कंपनियों के गारंटीड उत्पाद चुन सकते हैं।

वित्त मंत्री द्वारा संसद में पेश वित्त विधेयक में इस साल के बजट में कर संबं​धित कोई बदलाव नहीं किया गया था।

CLSA ने शुक्रवार को एक रिपोर्ट में कहा, ‘डेट म्युचुअल फंडों के लिए कर संबं​धित बदलाव के साथ अब सभी डेट योजनाओं के लिए कराधान समान हो गया है।’

कोटक लाइफ इंश्योरेंस के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्या​धिकारी महेश बालासुब्रमण्यन ने कहा, ‘डेट म्युचुअल फंडों से इंडेक्सेशन लाभ समाप्त होने से अब बीमा कंपनियां अच्छी ​स्थिति में होंगी। अब योजनाओं की प्रतिस्पर्धा से उनकी मांग निर्धारित होगी।’

उद्योग के जानकारों का कहना है कि डेट म्युचुअल फंडों और ज्यादा कीमत वाली पार्टिसिपेटरी जीवन बीमा पॉलिसी पर कराधान की शुरुआत का मतलब यह हो सकता है कि इससे बैंक साव​धि जमाएं ज्यादा आकर्षक हो जाएंगी। अब तक बैंक जमाओं पर ब्याज पर कर अलग कर दर से लगता था और डेट म्युचुअल फंडों को इंडेक्सेशन के साथ 20 प्रतिशत एलटीसीजी कर दायरे में रखा गया, वहीं जीवन बचत योजनाएं कर-मुक्त प्रतिफल की श्रेणी में रही हैं।

इंडियाफर्स्ट लाइफ इंश्योरेंस के उप मुख्य कार्या​धिकारी रुषभ गांधी के अनुसार, सभी समझदार निवेशक अपने स्वयं के परिसंप​त्ति आवंटन आधारित जो​खिम प्रोफाइल के हिसाब से काम करेंगे। ताजा घटनाक्रम की वजह से हम जीवन बीमा योजनाओं के पक्ष में आवंटन में बड़ा बदलाव देख सकते हैं।

Advertisement
First Published - March 24, 2023 | 9:26 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement