facebookmetapixel
Advertisement
विदेशी निवेशकों की खरीदारी से बाजार में लौटी रौनक, सेंसेक्स 889 अंक उछला, निफ्टी में 265 अंकों की बढ़तपश्चिम एशिया में हवाई हमलों से कच्चा तेल 7% उछला, ब्रेंट क्रूड 90 डॉलर के करीब पहुंचाRBI के दखल और शेयर बाजार की तेजी से रुपया मजबूत, 13 जुलाई के बाद सबसे ऊंचे स्तर पर बंदSEBI के नए टोटल एक्सपेंस रेश्यो नियम लागू, फिर भी AMC ने बचाया मार्जिन, मुनाफा भी बढ़ाटाटा कंज्यूमर प्रोडक्ट्स की Q1 में दमदार शुरुआत, ब्रांडेड कारोबार और ग्रोथ पोर्टफोलियो से बिक्री में दोहरे अंक की बढ़तIRDAI ने प्रो टेक जनरल इंश्योरेंस को लाइसेंस दिया, पतंजलि-डीएस ग्रुप के मैग्मा जनरल इंश्योरेंस अधिग्रहण को भी मंजूरीसाइबर हमलों के बढ़ते खतरे से बैंक सतर्क, 5 साल में साइबर बीमा कवर दोगुना कर 10 करोड़ डॉलर तक पहुंचायायूपी में उद्योगों को बड़ी राहत, ₹1 के शुल्क पर शुरू होगा निर्माण; नया भवन विनियम जल्द होगा लागूSBI ने AT-1 बॉन्ड से जुटाए ₹4,691 करोड़, चालू वित्त वर्ष का पहला परपेचुअल बॉन्ड इश्यूडिग्री के बाद भी नौकरी की चुनौती, कंपनियों को नहीं मिल रहे तैयार उम्मीदवार

बीमा एजेंटों को राहत: बीमा कमीशन, बोनस पर टीडीएस कम

Advertisement

वैयक्तिक एजेंटों से टीडीएस को 5 फीसदी से घटाकर 2 फीसदी करने की सिफारिश की गई है

Last Updated- July 23, 2024 | 10:47 PM IST
Insurance

मंगलवार को आम बजट में वैयक्तिक एजेंटों को मिले बीमा कमीशन और परिपक्वता पर जीवन बीमा पॉलिसी के तहत मिले बोनस या पूरी रकम के भुगतान पर स्रोत पर कर कटौती (टीडीएस) में कमी करने का प्रस्ताव रखा गया। वैयक्तिक एजेंटों से स्रोत पर कर कटौती यानी टीडीएस को मौजूदा 5 फीसदी से घटाकर 2 फीसदी करने की सिफारिश की गई है, जो 1 अप्रैल 2025 से प्रभावी होगा।

इसी तरह जीवन बीमा पॉलिसियों पर बोनस के भुगतान या 10 डी के तहत कुल आय में शामिल न किए जाने वाले को छोड़कर बाकी फंड के भुगतान पर टीडीएस को 5 फीसदी से घटाकर 2 फीसदी पर लाने का प्रस्ताव है, जो 1 अक्टूबर 2024 से प्रभावी होगा।

इस कदम से ब्रोकरों व पॉलिसीधारकों को ज्यादा नकदी सुनिश्चित हो सकेगी। वैयक्तिक एजेंटों को बीमा कमीशन पर टीडीएस को 5 फीसदी से 2 फीसदी किए जाने से ऐसे लोगों के हाथ में अतिरिक्त आय सुनिश्चित होगी, जिसका भुगतान बीमा कंपनियां करती हैं।

परिपक्वता पर जीवन बीमा पॉलिसी पर बोनस भुगतान पर टीडीएस को घटाकर 2 फीसदी किए जाने से वैयक्तिक पॉलिसीधारकों के हाथ में ज्यादा प्राप्ति सुनिश्चित होगी। यह कहना है गो डिजिट जनरल इंश्योरेंस के मुख्य निवेश अधिकारी परिमल हेडा का।

इसके अलावा बजट में जीएसटी परिषद के उस विचार को दोहराया गया है कि प्रमुख बीमा कंपनी की तरफ से करार के तहत सहयोगी बीमा कंपनी के साथ प्रीमियम साझा करना या पुनर्बीमा कंपनियों को बीमा कंपनी की तरफ से सेवा देने को वस्तु एवं सेवा की आपूर्ति नहीं मानी जाएगी।

शार्दुल अमरचंद मंगलदास ऐंड कंपनी की पार्टनर (बीमा व पुनर्बीमा) शैलजा लाल ने कहा, यह मसला जीएसटी प्राधिकरणों व बीमा कंपनियों के बीच पिछले कई साल से विवाद का विषय रहा है और बीमा क्षेत्र के लिए यह स्वागतयोग्य स्पष्टीकरण है क्योंकि ऐसी व्यवस्था पर संभावित जीएसटी भुगतान का भारी बोझ अब हट जाएगा।

Advertisement
First Published - July 23, 2024 | 10:36 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement