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RBI ने चार NBFC पर लोन देने से लगाई रोक, नियम से ज्यादा ब्याज वसूल रहीं थीं फाइनेंस कंपनियां

RBI ने जानकारी देते हुए बताया कि उसका यह निर्णय 21 अक्टूबर के कारोबारी दिन के अंत से प्रभावी होगा।

Last Updated- October 17, 2024 | 6:35 PM IST
nbfc, RBI

RBI bars 4 NBFCs: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने आज यानी 17 अक्टूबर को चार गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (NBFCs) पर नियमों का उल्लंघन करने के कारण कड़ा एक्शन लिया है। केंद्रीय बैंक ने इन चारों NBFC को लोन का सैंक्शन यानी मंजूरी देने और वितरित करने पर रोक लगा दी है।

RBI ने जानकारी देते हुए बताया कि उसका यह निर्णय 21 अक्टूबर के कारोबारी दिन के अंत से प्रभावी होगा। ये व्यापारिक प्रतिबंध इन कंपनियों को अपने मौजूदा ग्राहकों को सेवाएं प्रदान करने और मौजूदा नियामक दिशा-निर्देशों के अनुसार वसूली और रिकवरी प्रक्रियाओं को संचालित करने से नहीं रोकते।

कौन सी चार NBFC पर लगी रोक

RBI ने जिन चार NBFCs पर रोक लगाई है उनके नाम हैं- आशीर्वाद माइक्रो फाइनेंस लिमिटेड (Asirvad Micro Finance Ltd.), आरोहण फाइनेंशियल सर्विसेज लिमिटेड (Arohan Financial Services), डीएमआई फाइनेंस लिमिटेड (DMI Finance Private Limited) और नवी फिनसर्व (Navi Finserv Limited)। बता दें कि आशीर्वाद माइक्रो फाइनेंस चेन्नई की, आरोहण फाइनेंशियल कोलकाता, DMI Finance नई दिल्ली औऱ Navi Finserv बेंगलूरु की कंपनी है।

क्या पाई गईं खामियां

केंद्रीय बैंक के अनुसार, इन NBFCs की वेटेड एवरेज लेंडिंग रेट (WALR) और उनकी तरफ से रकम की लागत पर लिए गए ब्याज का अंतर बहुत ज्यादा पाया गया और यह नियमों के अनुरूप नहीं था।

इसके अलावा बहुत ज्यादा ब्याज दरों के साथ, इन गैर-बैंकिंग फाइनेंस कंपनियों (NBFCs) को कई मामलों में रेगुलेटरी गाइडलाइंस का पालन नहीं करते हुए पाया गया। इन दिशा-निर्देशों में घरेलू आय का आकलन (assessment of household income) और उनके माइक्रोफाइनेंस लोन के लिए मौजूदा/प्रस्तावित मंथली रीपेमेंट दायित्वों पर विचार शामिल था।

RBI ने बताया किन शर्तों पर हटेगी रोक

RBI ने कहा, इन व्यावसायिक प्रतिबंधों की समीक्षा तब की जाएगी जब कंपनियों से यह पुष्टि मिलेगी कि उन्होंने नियामकीय दिशा-निर्देशों का पालन सुनिश्चित करने के लिए जरूरी सुधार किए हैं। विशेष रूप से, इन कदमों में उनकी मूल्य निर्धारण नीति, जोखिम प्रबंधन प्रक्रियाएं, ग्राहक सेवा, और शिकायत निवारण पहलुओं को शामिल किया जाएगा, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि रिजर्व बैंक की संतुष्टि के अनुरूप सभी दिशानिर्देशों का पालन किया जा रहा है।

RBI ने कहा, पिछले कुछ महीनों में भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने अपने विनियमित संस्थानों (Regulated Entities) को अलग-अलग माध्यमों से यह समझाने का प्रयास किया है कि उन्हें अपने नियामक स्वतंत्रता (regulatory freedom) का जिम्मेदारी से उपयोग करना चाहिए और विशेष रूप से छोटे मूल्य के लोन के लिए उचित, न्यायसंगत और पारदर्शी मूल्य निर्धारण सुनिश्चित करना चाहिए। हालांकि, ऑनसाइट एग्जामिनेशन और ऑफसाइट कलेक्ट और एनालिसिस किए गए डेटा के दौरान अनुचित और अत्यधिक ब्याज दरों से जुड़ी प्रथाएं देखी जाती रही हैं।

First Published - October 17, 2024 | 6:35 PM IST

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