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रिटायरमेंट बाद ईपीएफ ब्याज पर कर, आंशिक निकासी की मंजूरी नहीं

Last Updated- December 12, 2022 | 5:56 AM IST

कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) ने घोषणा की है कि वर्ष 2020-21 में भी ईपीएफ पर ब्याज की दर 8.5 फीसदी ही रहेगी। उससे पिछले वित्त वर्ष में भी इस पर 8.5 फीसदी की दर से ही ब्याज दिया गया था। इस तरह सरकार के समर्थन वाली जो भी स्थिर आय योजनाएं अभी चल रही हैं, उनमें सबसे अधिक ब्याज कर्मचारी भविष्य निधि पर ही मिल रहा है। ईपीएफ पर ज्यादा प्रतिफल तो मिलता ही है, उससे रकम निकासी के नियम भी खासे सरल हैं। ग्राहक जब सेवानिवृत्त होता है तो उसे ईपीएफ में जमा पूरी रकम निकालने की इजाजत होती है। अगर उसे दो महीने से अधिक बेरोजगारी झेलनी पड़ती है तो भी वह ईपीएफ में मौजूद समूची रकम निकाल सकता है। भविष्य निधि में मौजूद रकम का कुछ हिस्सा निकालने यानी आंशिक निकासी की भी इजाजत है मगर उसके लिए कुछ शर्तें रखी गई हैं।

आंशिक निकासी की शर्तें
मकान बनाने, अचानक इलाज के लिए जरूरत पडऩे और उसी तरह की अन्य जरूरतों के लिए ईपीएफ से कुछ रकम निकालने यानी आंशिक निकासी की इजाजत है। टीमलीज सर्विसेज के बिजनेस हेड (अनुपालन एवं पेरोल आउटसोर्सिंग) प्रशांत सिंह बताते हैं, ‘ईपीएफ से करीब 95 फीसदी अग्रिम निकासी मकान खरीदने या मकान खरीदने के लिए होती है। इसमें प्लॉट खरीदने के लिए रकम निकालना भी शामिल है।’ नियम के मुताबिक मकान या प्लॉट की कीमत देखी जाती है और ग्राहक के मासिक मूल वेतन तथा महंगाई भत्ते का 36 गुना निकाला जाता है। दोनों में से जो भी रकम कम होती है, वह ईपीएफ खाते से निकाली जा सकती है।
कर्मचारी इलाज के लिए भी ईपीएफ से रकम निकाल सकते हैं। इसमें कर्मचारी के मासिक मूल वेतन का छह गुना निकाला जाता है और उसका कुल योगदान तथा ब्याज देखा जाता है। दोनों में से जो भी रकम कम होती है, उसे निकाला जा सकता है। संतान के विवाह के लिए कर्मचारी अपने कुल अंशदान का 50 फीसदी तक निकाल सकता है मगर जरूरी है कि उसे नौकरी करते हुए कम से कम 7 साल हो गए हों।
इसके अलावा संतान की 10वीं के बाद की शिक्षा के लिए भी कर्मचारी अपने कुल अंशदान की 50 फीसदी तक रकम निकाल सकता है। घर की मरम्मत करानी है तो मासिक वेतन और महंगाई भत्ते का 12 गुना देखा जाता है, कर्मचारी का अंशदान और ब्याज देखा जाता है या मरम्मत का कुल खर्च देखा जाता है। तीनों में जो सबसे कम हो उतनी ही रकम निकालने की इजाजत होती है।
बहुत से लोग सेवानिवृत्ति से ठीक पहले भी आंशिक निकासी करते हैं। उम्र 54 साल हो गई हो तो कुल जमा राशि का 90 फीसदी तक निकाल सकते हैं। स्वतंत्र सलाहकार (सेवानिवृत्ति एवं कर्मचारी लाभ) अनिल लोबो बताते हैं, ‘पीएफ की कुल रकम की आंशिक निकासी रिटायरमेंट के एक साल पहले तक करने की अनुमति होती है। मगर उसके लिए उम्र की शर्त पूरी होनी चाहिए। ऐसा इसलिए किया गया है ताकि कर्मचारी रिटायरमेंट के बाद की अपनी जिंदगी की योजना बना सके।’

कोविड अग्रिम
कोविड-19 के संक्रमण ने पूरे देश के लोगों को परेशान कर दिया है और ईपीएफओ भी इस महामारी का हाल देख रहा है। इसलिए उसने महामारी की वजह से पैदा वित्तीय तंगी दूर करने के इरादे से ग्राहकों को मार्च, 2020 में एकमुश्त अग्रिम लेने की मंजूरी दी थी, जिसे लौटाने की जरूरत भी नहीं थी। सिंह कहते हैं, ‘कुल जमा राशि के 75 फीसदी या कर्मचारी के तीन महीने के मूल वेतन में से जो भी कम हो, उसे बतौर अग्रिम निकाला जा सकता था।’ लोबो बताते हैं, ‘हालांकि इससे बहुत मदद मिली, लेकिन कुछ कर्मचारियों ने इस सहूलियत का बेजा फायदा उठाया। उन्होंने कई बार इस सुविधा का लाभ उठाया, जिससे उनके खाते में कम पैसा बचा है।’

रिटायर होने के बाद
आप चाहें तो सेवानिवृत्ति के बाद भी ईपीएफ खाते में धनराशि छोड़ सकते हैं। कर एवं निवेश विशेषज्ञ बलवंत जैन की सलाह है, ‘ईपीएफ पर प्रतिफल की दर काफी ऊंची है और उसका फायदा उठाने के लिए ग्राहकों को इस विकल्प का इस्तेमाल करना चाहिए।’ मगर यहां एक बात ध्यान रखनी होगी। मुंबई की प्रमाणित वित्तीय योजनाकार किरण तैलंग बताती हैं, ‘अगर कोई कर्मचारी रिटायरमेंट के बाद भी अपनी रकम ईपीएफ खाते में रखता है तो उसे केवल 36 महीने तक ही ब्याज मिलेगा। उसके बाद आप अपनी रकम कितने भी साल खाते में छोड़ सकते हैं, उसमें ब्याज के तौर पर एक पाई भी नहीं जुड़ेगी।’
जैन एक और मार्के की बात बताते हैं। वह कहते हैं कि ईपीएफ पर मिलने वाली ब्याज की आय में कर का तरीका भी बदल जाता है। जैन समझाते हैं, ‘जब तक आप कर्मचारी होते हैं तब तक ईपीएफ पर मिलने वाले ब्याज से हुई आमदनी पर कर नहीं काटा जाता। मगर जैसे ही आप सेवानिवृत्त हो जाते हैं, आपकी पीएफ रकम पर मिलने वाला ब्याज कर के दायरे में आ जाता है।’ उसके बाद आपको अपने आयकर रिटर्न में यह रकम आमदनी के मद में दिखानी पड़ेगी। मगर सेवानिवृत्ति के बाद आपको ईपीएफ खाते से आंशिक निकासी की मंजूरी नहीं है। आखिर में ईपीएफ से रकम निकालने के प्रावधानों का सोच-समझकर इस्तेमाल करें ताकि आपके पास सेवानिवृत्ति के बाद भी पर्याप्त पैसा बचा रहे।

लोकप्रिय निश्चित आय योजनाओं में प्रतिफल और कर
कर्मचारी भविष्य निधि
ब्याज दर: 8.5 फीसदी
अवधि: सेवानिवृत्ति तक (ब्याज प्राप्ति के साथ तीन साल तक बढ़ा सकते हैं)
कर: 1 अप्रैल से 2.5 लाख रुपये से अधिक योगदान के ब्याज पर कर
वरिष्ठ नागरिक बचत योजना
ब्याज दर: 7.4 फीसदी
अवधि: 5 साल
कर: धारा 80सी का लाभ, ब्याज पर कर
प्रधानमंत्री वय वंदना योजना
ब्याज दर: 7.4 फीसदी
अवधि : 10 साल
कर : धारा 80सी का लाभ नहीं, ब्याज पर कर
भारत सरकार के बचत बॉन्ड (कर योग्य)
ब्याज दर: 7.15 फीसदी
अवधि : 7 साल
कर: ब्याज आमदनी पर कर, ब्याज चुकाते समय टीडीएस लागू
सुकन्या समृद्धि खाता
ब्याज दर: 7.6 फीसदी
अवधि: खाता खोलने की तारीख से 21 साल या 18 साल के बाद
शादी पर
कर: धारा 80सी के तहत आयकर लाभ। अंतिम धनराशि कर मुक्त
सार्वजनिक भविष्य निधि
ब्याज दर: 7.1 फीसदी
अवधि: 15 साल, जिसे पांच साल के खंडों में बढ़ाया जा सकता है
कर: धारा 80सी का लाभ,  प्रतिफल कर मुक्त
राष्ट्रीय बचत पत्र
ब्याज दर: 6.8 फीसदी
अवधि : 5 साल
कर: धारा 80 सी का लाभ, ब्याज पर कर

First Published - April 14, 2021 | 11:41 PM IST

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