facebookmetapixel
Advertisement
थोक जमा नियमों में आरबीआई का बदलाव, सभी ग्राहकों को मिलेगी समान ब्याज दर की जानकारी15 साल में मजबूत हुई ग्रामीण अर्थव्यवस्था, मौसम का असर पहले से कम: आरबीआई डिप्टी गवर्नरब्रांड वैल्यू में शाहरुख खान नंबर-1, विराट कोहली को पीछे छोड़ हासिल किया पहला स्थानवीजा की बेंगलूरु में बड़ी छंटनी, 1,400 कर्मचारियों की गई नौकरी; एआई पर बढ़ते फोकस का असरई-कॉमर्स निर्यात के लिए विदेशी कंपनियों को बनानी होगी अलग यूनिट एक्सचेंजों पर बंद भाव में बड़ा अंतर ट्रेडरों के लिए कमाई का मौका, आर्बिट्राज ट्रेडिंग में आई तेजीटाटा संस फिलहाल अपर लेयर एनबीएफसी में रहेगी, सीआईसी लाइसेंस पर फैसला बाकीRBI MPC Meet: रीपो रेट 5.25% पर बरकरार, ग्रोथ अनुमान बढ़ाया, महंगाई आउटलुक घटायाडिजिटल रुपये की बढ़ी रफ्तार, सीबीडीसी और यूएलआई का दायरा लगातार बढ़ा: आरबीआईUPI पर MDR लागू होगा या नहीं? RBI गवर्नर बोले- अभी चर्चा करना जल्दबाजी

इरडा बना रहा है बीमा फर्मों के लिए आईपीओ के नियम

Advertisement
Last Updated- December 07, 2022 | 6:02 PM IST

अधिकांश बडी बीमा कंपनियां अगले साल शेयर बाजार में सूचीबध्द होने की योजना बना रही हैं।


ऐसे में इरडा (बीमा विनियामक एवं विकास प्राधिकरण) इन कंपनियों का वैल्यूएशन तय करने और सार्वजनिक पेशकश (आईपीओ) की कीमत को निर्धारित करने के लिए एक समिति बना रही है। इरडा के एक बड़े अधिकारी ने कहा कि समिति चार महत्वपूर्ण बिंदुओं पर विचार करेगी।

पहला तो इन कंपनियों के सरप्लस को वैल्यू करने का तरीका तैयार किया जाएगा। दूसरा होगा एक्विजिशन कॉस्ट जो कमीशन खर्चे और उत्पाद पर होने वाले प्रारंभिक खर्च पर आधारित होगा। तीसरा, आईपीओ में प्रारंभिक खर्चों, निवेश की गई आय, फ्यूचर मोरटैलिटी रिस्क, क्लेम रेशियो, इंश्योरेंस कंपनी के अनुभव, सरप्लस और घाटे का भी ध्यान रखा जाएगा।

इरडा के एक्चुरी सदस्य आर कन्णन ने कहा कि सरप्लस के वैल्युएशन से निवेशकों को यह जानने में मदद मिलेगी कि उसे एक प्रति शेयर आय के लिए कितना प्रीमियम अदा करना चाहिए। यह समिति 15 से 20 दिनों में तैयार हो जाएगी और इसमें एक्चुरियल सोसायटी, चार्टेड एकाउंटेंट, इरडा सदस्य और बीमा कंपनियों के कार्यकारी शामिल होंगे।

नियमों के अनुसार एक बीमा कंपनी को दस साल के परिचालन के भीतर सूचीबध्द होना होता है। एसबीआई लाइफ और एचडीएफसी ने अगले साल अपने सूचीबध्द होने की घोषणा कर दी है। सबसे बड़ी निजी बीमा कंपनी आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल के 2010-11 में सूचीबध्द होने की संभावना है।

बीमा कारोबार में कई सालों से कॉन्ट्रैक्ट स्पैनिंग होती है। यह इस मामले में अलग है कि इसमें बिक्री के स्तर पर लागत निश्चित नहीं होती है और इनका सिर्फ सिर्फ अनुमान लगाया जा सकता है। एक दर्जन से भी ज्यादा बीमा कंपनियों में एसबीआई लाइफ ही लाभ प्राप्त करने में सफल रही है।

इस कारोबार में ऊंची पूंजी,अच्छी ग्रोथ रेट के साथ पूंजी की भी आवश्यकता होती है जिसका निवेश किया जा सके। लेकिन जब सरकार बीमा के प्रावधानों में फेरबदल का विचार कर रही है और इसमें सूचीबध्द होने की अवधि को बढ़ाना भी शामिल है। इसके बाद कई कंपनियां सूचीबध्द होने को योजना को रद्द कर सकती हैं।

Advertisement
First Published - August 21, 2008 | 10:18 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement