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निवेशकों को कम प्रतिफल की उम्मीद रखनी चाहिए

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Last Updated- December 11, 2022 | 10:17 PM IST

बीएस बातचीत
मिरे ऐसेट इन्वेस्टमेंट मैनेजर्स में मुख्य निवेश अधिकारी नीलेश सुराणा ने चिराग मडिया को दिए साक्षात्कार में कहा कि मध्यावधि में, ओमीक्रोन वैरिएंट के प्रभाव पर नजर रखे जाने की जरूरत होगी, वहीं अमेरिकी मुद्रास्फीति और फेडरल की सख्ती 2022 के दौरान महत्वपूर्ण घटनाक्रम होंगे। उन्होंने कहा कि मौजूदा आय सुधार में भरोसा बाजारों के लिए बेहद महत्वपूर्ण कारक होगा। पेश हें बातचीत के मुख्य अंश:
भारतीय इक्विटी ने कैलेंडर वर्ष 2021 में करीब 24 प्रतिशत का प्रतिफल दिया। क्या आप मानते हैं कि निवेशकों को इस साल भी इसी तरह के प्रतिफल की उम्मीद रखनी चाहिए?
हमारा मानना है कि निवेशकों को उम्मीद कम रखनी चाहिए और निराशा से बचने के लिए दीर्घावधि की समय-सीमा को लेकर प्रतिबद्घता से बचना चाहिए। इक्विटी बाजार प्रतिफल आय वृद्घि, मूल्यांकन, ब्याज दर और प्रवाह की क्रिया हैं। हमारा मानना है कि कॉरपोरेट आय वृद्घि मजबूत बनी रहेगी। विकास संभावनाओं और पूंजी की कम लागत को देखते हुए मूल्यांकन उचित हैं।  

भारतीय इक्विटी में दिसंबर में कुछ कमजोरी दिखी थी, क्या आप मानते हैं कि ओमीक्रोन की चिंताओं, संभावित दर वृद्घि और तरलता को लेकर सख्ती की वजह से आगामी महीनों में बाजार में और गिरावट आ सकती है?
ओमीक्रोन वैरिएंट मुख्य अल्पावधि जोखिम बना हुआ है। हालांकि इसका प्रभाव संक्रमण की कम गंभीरता और मजबूत टीकाकरण को देखते हुए सीमित रहेगा। हमें विश्वास है कि ऊंची दरों के बावजूद ब्याज लागत पहले (2014 के मुकाबले) से कम बनी रहेगी। इसलिए यदि दरें मध्यावधि के दौरान 75-1000 आधार अंक तक बढ़ती हैं तो पूंजी की लागत कम बने रहने की संभावना है।

क्या आप मानते हैं कि भारतीय इक्विटी के मूल्यांकन में ताजा गिरावट के बाद बाजार आकर्षक हो गए हैं?
मूल्यांकन को विकास संभावना और पूंजी की लागत के नजरिये से देखा जाना चाहिए। सभी क्षेत्रों में मजबूत आय वृद्घि की मौजूदा राह और आरओई में सुधार के साथ मूल्यांकन उचित हें। निफ्टी सूचकांक मौजूदा समय में वित्त वर्ष 2024 की आय के 17 गुना पर कारोबार कर रहा है और पूंजी की कम लागत के साथ यह उचित लग रहा है।

अब कौन से कारक बाजार को मजबूती प्रदान कर सकते हैं?
मौजूदा आय सुधार पर भरोसा बाजारों के लिए बेहद महत्वपूर्ण कारक होगा। करीब लगातार सात वर्षों के डाउनग्रेड के बाद हमने मौजूदा आय अपग्रेड चक्र में बदलाव दर्ज किया है। हमें भरोसा है कि भारत ने चक्रीयता के साथ साथ ढांचागत कारकों द्वारा दोनों पर केंद्रित आर्थिक सुधार की अवधि में प्रवेश किया है। मजबूत आय सुधार के कुछ कारणों से वृद्घि की राह में सुधार आया है और खासकर दो दशकों में शानदार किफायती खंड को देखते आवासीय सेगमेंट में बदलाव दर्ज किया गया है। कुल मिलाकर, हमें विश्वास है कि कॉरपोरेट लाभ और आरओई में बदलाव आया है और भविष्य में इसमें और सुधार आएगा।

बाजारों की नजर आगामी बजट सत्र पर रहेगी। क्या किसी बड़ी घोषणा की उम्मीद  हैं?
कई कराधान मु्द्दे अब बजट से बाहर रखे जाते हैं। कुल मिलाकर, मुख्य जोर पारदर्शिता में सुधार लाने, और अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ाने की राह में चुनौतियां दूर करने पर रहेगा। हमें उम्मीद है कि सरकारी पूंजीगत खर्च आवंटन आगामी बजट में ऊंचा बना रह सकता है।

मौजूदा समय में आपका पसंदीदा क्षेत्र कौन से हैं और किन से आप दूर रहना पसंद करेंगे?
हम वित्त, हेल्थकेयर, जीवन बीमा, कंज्यूमर डिस्क्रेशनरी आदि जैसे कम पैठ वाले व्यवसायों में दीर्घावधि अवसरों पर सकारात्मक हैं। वहीं उन शेयरों पर सतर्क हैं जिनमें मूल्यांकन उनके बुनियादी आधार के मुकाबले काफी ज्यादा बढ़ चुके हैं।

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First Published - January 9, 2022 | 11:07 PM IST

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