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सेज में तेज, 2 लाख करोड़ रुपये का निवेश

Last Updated- December 05, 2022 | 4:49 PM IST

पिछले तीन वर्षों में विशेष आर्थिक क्षेत्र (सेज) स्थापित करने के चलते 92 प्रस्तावों के साथ हरियाणा औद्योगिक विकास में काफी आगे चल रहा है।


 इससे राज्य में 2 लाख करोड़ रुपये के निवेश और लभग 20 लाख नौकरियों की संभावना बनी हुई है। भारत सरकार की ओर से 51 प्रस्तावों को सैध्दांतिक औपचारिक स्वीकृति प्राप्त हो चुकी है।


उद्योग विभाग के मुताबिक 2006-07 के दौरान राज्य को 27 सेज प्रस्ताव मिले थे, जिसमें 33,762 करोड़ रुपये का निवेश और लगभग 4 लाख लोगों के लिए रोजगार शामिल था। अभी तक राज्य 10,500 करोड़ रुपये बतौर प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के रूप में प्राप्त कर चुका है, जिसमें से 7 हजार करोड रुपये नई औद्योगिक नीति के लागू होने के बाद उसे मिला।


हरियाणा में 1290 बड़ी और मझोली इकाईयां और लगभग 80 हजार के करीब छोटी इकाईयां हैं। राज्य ने वर्ष 2005-06 में लगभग 25 हजार करोड़ रुपये का निर्यात किया।  राज्य सरकार की इकोनॉमी हब्स बनाने की परियोजना है, जिनमें कुंडली-मानेसर-पलवल हाइवे और राज्य के अन्य अनुकूल स्थान शामिल हैं। हरियाणा राज्य औद्योगिक और बुनियादी ढांचा कॉरपोरेशन को भूमि अधिग्रहण के लिए प्राधिकृत है। कॉरपोरेशन यह भूमि उद्योग स्थापना की परियोजनाओं के लिए ही अधिग्रहित कर सकता है।


पिछले दो सालों में राज्य को सार्वजनिक-निजी साझेदारी (पीपीपी) परियोजनाओं में भी सफलता प्राप्त हुई है। पंचकुला के पास हॉटमेल के जनक सबीर भाटिया (निवेश 2000 करोड़) के साथ नैनो सिटी, रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड के साथ 40 हजार करोड़ रुपये का बहुल-उत्पाद सेज, डीएलएफ यूनिवर्सल लिमिटेड के 26 हजार करोड़ रुपये का बहुल-उत्पाद सेज, अंबाला में डीएलएफ यूनिवर्सल के साथ 1950 करोड़ रुपये का बहुल-उत्पाद सेज, यूनिटेक हरियाणा सेज लिमिटेड का कुंडली में 22 हजार करोड़ रुपये का बहुल-उत्पाद सेज।


आदर्श औद्योगिक नगर स्थापित करने के लिए नई परियोजनाओं को फरीदाबाद, रोहतक, जगाधरी और खरखोदा में शुरू किया गया है। इन नगरों में बड़े उद्योगों के लिए कैम्पस, आईसीटी पार्क, औद्योगिक प्लॉट, आवासीय कॉलोनियों में फैक्टरियां, औद्योगिक संस्थान क्षेत्र, मनोरंजन क्षेत्र, शैखिक और स्वास्थ सुविधाएं शामिल होंगे।पानीपत में 35 हजार करोड़ रुपये वाला पेट्रोकैमिकल हब स्थापित किया जाएगा।


 उद्योग जगत के विकास में सबसे बड़ी  बाधा बिजली की है। राज्य की अपनी बिजली उत्पादन क्षमता 4,368 मेगावाट है, जिसके चलते लगभग 4 हजार मेगावाट की कमी पड़ती है। अगले पांच वर्षों में राज्य ने उत्पादन क्षमता को बढ़ा कर 9 हजार मेगावाट का लक्ष्य रखा है। 11वीं पंच वर्षीय योजना के लिए सरकार ने 24,317 करोड़ रुपये का प्रस्ताव रखा है, जिसमें विद्युत क्षेत्र के लिए नए विद्युत उत्पादन संयंत्र और ट्रांसमिशन और विद्युत वितरण प्रणाली को बेहतर बनाने पर विचार किया गया है।


अपने बजट में वित्त मंत्री ने घोषणा की है कि राज्य सरकार अपनी योजना राशि से 20 प्रतिशत इक्विटी देगी और बाकी की 80 प्रतिशत राशि वित्तीय संस्थानों से कर्ज के रूप में विद्युत कंपनियां प्राप्त करेंगी।रिलायंस ने यमुनानगर में 600 मेगावाट क्षमता वाले दो थर्मल विद्युत संयंत्र लगाए हैं। 2009-10 तक हिसार में भी 1200 मेगावाट क्षमता वाला थर्मल विद्युत संयंत्र शुरू किया जाएगा।


 हरियाणा सरकार, दिल्ली सरकार और एनटीपीसी के साझा उद्यम के तहत 1500 मेगावाट क्षमता वाला कोयला आधारित थर्मल विद्युत संयंत्र झार में भी लगाया जाएगा। राज्य अपने नवीकरणीय संसाधनों से भी बिजली उत्पादन करेगी। हरियाणा नवीकरण विद्युत उत्पादन एजेंसी ने 698 मेगावाट बिजली उत्पादन के लिए साझा पत्र पर हस्ताक्षर कर 23 परियोजनाओं को हरी झंडी दे दी है।

First Published - March 20, 2008 | 11:51 PM IST

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