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बीमा क्षेत्र में 100% FDI को सरकार ने दी मंजूरी, यह सुधार विदेशी निवेश का खोलेगा रास्ता

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एफडीआई की तय सीमा खत्म किए जाने से इस क्षेत्र में पूंजी और वैश्विक विशेषज्ञता आ सकेगी और इससे बीमा कवरेज को विस्तार देने में मदद मिलेगी

Last Updated- December 12, 2025 | 10:29 PM IST
FDI
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने शुक्रवार को बीमा क्षेत्र में 100 प्रतिशत प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) को अनुमति देने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने यह जानकारी दी।

अधिकारी ने कहा, ‘इस कदम का मकसद पूंजी की आवक को गति देना और विश्व के सबसे तेजी से बढ़ते बीमा बाजार के कवरेज को विस्तार देना है।’ अधिकारी ने आगे कहा कि यह विधेयक सोमवार को संसद के शीतकालीन सत्र में पेश किया जा सकता है। वित्त वर्ष 2025-26 के केंद्रीय बजट में सरकार ने बीमा क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की सीमा खत्म करने का प्रस्ताव किया था, जो इस समय 74 प्रतिशत है। सरकार ने यह भी कहा था कि इस क्षेत्र में विदेशी निवेश के लिए बने नियम और शर्तों को भी सरल बनाया जाएगा।

एफडीआई की तय सीमा खत्म किए जाने से इस क्षेत्र में पूंजी और वैश्विक विशेषज्ञता आ सकेगी और इससे बीमा कवरेज को विस्तार देने में मदद मिलेगी। भारत में जनरल इंश्योरेंस की पहुंच तुलनात्मक रूप से कम है। 2023 में बीमा की पहुंच का वैश्विक औसत जीडीपी का 4.2 प्रतिशत है, जबकि भारत में 1 प्रतिशत है।  

सूत्रों का कहना है, ‘निर्बाध सेवा और पॉलिसीधारकों समर्थन देने, कारोबार सुगमता को प्रोत्साहित करने और बीमा मध्यस्थों के एक बार के पंजीकरण का प्रस्ताव है। इसके अलावा बीमा कंपनियों के पेड अप इक्विटी कैपिटल के शेयरों के हस्तांतरण के मामले में आईआरडीएआई की मंजूरी लेने की सीमा को मौजूगा 1 प्रतिशत से बढ़ाकर 5 प्रतिशत कर दिया

गया है।’बीमा क्षेत्र में अब तक 82,000 करोड़ रुपये प्रत्यक्ष विदेशी निवेश आया है। वित्त मंत्रालय ने बीमा अधिनियम 1938 के विभिन्न प्रावधानों में संशोधन का प्रस्ताव किया था, जिसमें बीमा क्षेत्र में एफडीआई बढ़ाकर 100 प्रतिशत किया जाना, पेड-अप कैपिटल घटाना और कंपोजिट लाइसेंस दिया जाना शामिल है। स

सरकार के इस फैसले पर यूनिवर्सल सोंपो जनरल इंश्योरेंस के एमडी और सीईओ शरद माथुर ने कहा, ‘एफडीआई की सीमा बढ़ाकर 100 प्रतिशत किए जाने से बीमा क्षेत्र को जबरदस्त प्रोत्साहन मिलेगा। ज्यादा पूंजी आने से बीमा कंपनियां अपना कारोबार बढ़ा सकेंगी, अपनी बैलेंस शीट मजबूत कर सकेंगी और उन्नत तकनीक में निवेश कर सकेंगी और दावे के प्रबंधन की व्यवस्था बेहतर कर सकेंगी। इससे खासकर मझोले शहरों में बीमा की पहुंच को समर्थन मिलेगा, जहां बीमा की स्वीकार्यता तुलनात्मक रूप से कम है।’

जेनेराली सेंट्रल लाइफ इंश्योरेंस के एमडी और सीईओ आलोक रुंगटा ने कहा, ‘इससे बीमा क्षेत्र से दीर्घावधि पूंजी हासिल करने में मदद मिलेगी और विकास की  योजनाओं को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही इससे कुल मिलाकर उद्योग की क्षमता बढ़ेगी। इस कदम से बेहतर बीमा पॉलिसियां पेश करने, ग्राहक सेवा में सुधार और जीवन बीमा कवरेज को व्यापक बनाने में मदद मिलेगी।’

पीबी फिनटेक के ज्वाइंट ग्रुप सीईओ सर्ववीर सिंह ने कहा, ‘इस सुधार से बढ़ते हुए बीमा क्षेत्र में स्पष्टता, आत्मविश्वास और दीर्घावधि पूंजी लाने में मदद मिलेगी, जिसकी वित्तीय सुरक्षा मजबूत करने में अहम भूमिका है। इससे वैश्विक विशेषज्ञता लाने और सतत निवेश आकर्षित करने और ग्राहकों के अनुभव को बेहतर बनाने, पूरे देश में इसकी पहुंच बढ़ाने में मदद मिल सकती है।’

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First Published - December 12, 2025 | 10:13 PM IST

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